'पैदा करेगी भूकंप और टाइम-स्पेस को सिकोड़ देगी...' भारत के दुश्मन ने बनाई ऐसी गजब की महामशीन, जानें क्या होगा इस्तेमाल

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China Hypergravity Machine: चीन के वैज्ञानिकों ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाते हाइपरग्रेविटी मशीन बनाई है. यह मशीन स्पेस और टाइम को कंप्रेस कर सकती है और प्रयोगशाली के अंदर बांध टूटने और भूकंप जैसी विनाशकारी घटनाओं को पैदा कर सकती है.

साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मशीन को CHIEF1900 का नाम दिया गया है.

यह मशीन शंघाई इलेक्ट्रिक न्यूक्लियर पावर ग्रुप द्वारा बनाई गई थी और 22 दिसंबर को इंस्टॉलेशन के लिए पूर्वी चीन में झेजियांग यूनिवर्सिटी भेजी गई. मशीन सेंट्रीफ्यूगल हाइपरग्रेविटी एंड इंटरडिसिप्लिनरी एक्सपेरिमेंट फैसिलिटी (CHIEF) का हिस्सा हैं, जो यूनिवर्सिटी कैंपस के 15 मीटर (49 फीट) नीचे एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला है.

एक बार चालू होने के बाद, यह रिसर्चर्स को स्पेस और टाइम को कंप्रेस करने, एक प्रयोगशाला के अंदर बांध टूटने और भूकंप जैसी विनाशकारी घटनाओं को फिर से बनाने की अनुमति देगा.

यह मशीनों पृथ्वी की ग्रेविटी से सैकड़ों या हजारों गुना ज़्यादा ताकत पैदा करके समय और दूरी को कंप्रेस कर सकती हैं, जिससे ऐसी घटनाओं का अध्ययन करना संभव हो जाता है जिनमें दशकों लग सकते हैं या जो किलोमीटर तक फैली होती हैं.

जैसे उदाहरण के लिए, 500 मीटर ऊंचे बांध की स्ट्रक्चरल स्थिरता का आकलन करने के लिए, वैज्ञानिक 5-मीटर का मॉडल बना सकते हैं और उसे 100g पर घुमा सकते हैं. यह उसी तनाव स्तर को दोहराता है जो असली दुनिया में पूरे बांध को अनुभव होगा. हाइपरग्रेविटी प्रयोग यह भी बताते हैं कि हजारों सालों में प्रदूषक मिट्टी से कैसे फैलते हैं – ऐसे परिदृश्य जिनका वास्तविक समय में अध्ययन करना लगभग असंभव है.

यह मशीन मल्टी-टन सैंपल को बेजोड़ तीव्रता से घुमा सकती है. 1,900 g·tonne की क्षमता के साथ यह मशीन एक यूनिट को ग्रेविटेशनल एक्सेलेरेशन (g) और सैंपल मास को टन में जोड़ती है. CHIEF1900 वैज्ञानिक रिसर्च के लिए अब तक बनाया गया सबसे शक्तिशाली सेंट्रीफ्यूज है. यह CHIEF1300 से आगे है, जो सितंबर में ऑनलाइन हुआ था, जिसकी क्षमता 1,300 g·tonne है.

झेजियांग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और CHIEF के चीफ साइंटिस्ट चेन युनमिन ने कहा, हम ऐसे प्रायोगिक वातावरण बनाना चाहते हैं जो मिलीसेकंड से लेकर हजारों साल तक, और परमाणु से लेकर किलोमीटर पैमाने तक फैले हों. (photo credit AI, for representation only)

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