हिंदी में संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनने और नोबेल पुरस्कार पाने की पूरी क्षमता: प्रो. तोमियो मिजोकामी

हिंदी में संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनने और नोबेल पुरस्कार पाने की पूरी क्षमता: प्रो. तोमियो मिजोकामी

देश हिंदी में संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनने और नोबेल पुरस्कार पाने की पूरी क्षमता: प्रो. तोमियो मिजोकामी

World Hindi Diwas: भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की महानिदेशक सुश्री के. नंदिनी सिंगला ने कहा, 'प्रो. तोमियो मिजोकामी भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक मैत्री के जीवंत प्रतीक हैं.

Written byRahul DabasPublished byYashodhan Sharma

World Hindi Diwas: भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की महानिदेशक सुश्री के. नंदिनी सिंगला ने कहा, 'प्रो. तोमियो मिजोकामी भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक मैत्री के जीवंत प्रतीक हैं.

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Rahul Dabas 10 Jan 2026 18:13 IST

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World Hindi Diwas Photograph: (NN)

World Hindi Diwas: विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर पद्मश्री सम्मानित जापानी भाषाविद् और ओसाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस प्रोफेसर तोमियो मिजोकामी ने हिंदी की वैश्विक भूमिका पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि हिंदी में संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनने और नोबेल पुरस्कार जैसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने की पूरी क्षमता मौजूद है.

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84 वर्षीय प्रो. मिजोकामी को भारत–जापान सांस्कृतिक संबंधों के सबसे प्रभावशाली सेतु के रूप में देखा जाता है. हिंदी सहित छह भारतीय भाषाओं के अध्ययन, अध्यापन और प्रचार में उनका दशकों का योगदान रहा है.

पद्मश्री से सम्मानित

भारत सरकार ने वर्ष 2018 में प्रो. मिजोकामी को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था. राष्ट्रपति भवन में आयोजित सिविल इन्वेस्टिचर समारोह में यह सम्मान उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया.

कार्यक्रम के दौरान भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की महानिदेशक सुश्री के. नंदिनी सिंगला ने कहा, “प्रो. तोमियो मिजोकामी भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक मैत्री के जीवंत प्रतीक हैं. भाषा-कूटनीति के माध्यम से उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को नई गहराई दी है.”

जापान में हिंदी को अकादमिक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका

प्रो. मिजोकामी के प्रयासों से जापान के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी, पंजाबी और अन्य भारतीय भाषाओं को अकादमिक पाठ्यक्रमों में स्थान मिला. इससे न केवल भाषाई अध्ययन को बल मिला, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और साहित्य की समझ भी जापान में व्यापक हुई.

ICCR के उप महानिदेशक डॉ. राजेश रंजन ने कहा,“आज हिंदी एक वैश्विक संवाद की भाषा बन चुकी है. विभिन्न देशों से आए हिंदी छात्र इस तथ्य का प्रमाण हैं कि हिंदी अब एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप ले चुकी है.”

अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में उज्बेकिस्तान, श्रीलंका, यूक्रेन, जापान, तंजानिया और अफ़ग़ानिस्तान सहित कई देशों से आए हिंदी छात्र और शोधार्थी शामिल हुए. यह बहुराष्ट्रीय सहभागिता हिंदी के वैश्विक विस्तार को रेखांकित करती है.

14 जनवरी तक भारत प्रवास पर रहेंगे प्रो. मिजोकामी

ICCR के विशेष आमंत्रण पर प्रो. मिजोकामी इन दिनों भारत यात्रा पर हैं. वे 14 जनवरी 2026 तक भारत में प्रवास करेंगे और इस दौरान विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं संवाद कार्यक्रमों में छात्रों और शोधकर्ताओं से संवाद करेंगे. विश्व हिंदी दिवस पर उनकी उपस्थिति यह स्पष्ट संदेश देती है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देशों और संस्कृतियों को जोड़ने वाला वैश्विक सेतु है.

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