पहली मुगल लड़की जो खैबर दर्रा पार कर पहुंची थी दिल्ली, तीन बादशाहों का इतिहास लिखा, बाबर-हुमायूं-अकबर से था ये रिश्ता

पहली मुगल लड़की जो खैबर दर्रा पार कर पहुंची थी दिल्ली, तीन बादशाहों का इतिहास लिखा, बाबर-हुमायूं-अकबर से था ये रिश्ता

Hindi Gallery Hindi Who Was Gulbadan Begum Mughal Princess Daughter Of Babur Author Of Humayun Nama Woman To Go On Hajj 8263637 पहली मुगल लड़की जो खैबर दर्रा पार कर पहुंची थी दिल्ली, तीन बादशाहों का इतिहास लिखा, बाबर-हुमायूं-अकबर से था ये रिश्ता

Mughal princess Gulbadan Banu: गुलबदन बानो बेगम मुगल खानदान की तीन पीढ़ियों को देखने वाली एकमात्र महिला थीं. वह इतिहासकार भी थीं और उन्होंने हज भी किया था.

Published date india.com Last updated on - January 11, 2026 9:45 AM IST

email india.com By Shivendra Rai email india.com twitter india.com

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गुलबदन बानो बेगम कौन थीं?

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ये कहानी है मुगल बादशाह बाबर की बेटी, हुमायूं की सौतेली बहन और अकबर की बुआ गुलबदन बानो बेगम की. वह मुगल शाही खानदान की पहली लड़की थीं जो शाही काफिले के साथ बेहद कठिन खैबर दर्रा पार कर के दिल्ली आई थीं. जब वह भारत आईं तब उनकी उम्र सिर्फ 6 साल थी.

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हुमायूंनामा लिखने वाली महिला

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गुलबदन बानो बेगम का जन्म 1523 ईस्वी में हुआ था. उन्होंने हुमायूंनामा लिखी जो मुगल बादशाह हुमायूं की जीवनी है. हुमायूंनामा में उन्होंने बाबर, हुमायूं और अकबर के समय के मुगल दरबार और हरम की अंदरूनी दुनिया का विवरण दिया है.

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तीन पीढियों की गवाह

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गुलबदन बानो बेगम मुगल खानदान की तीन पीढ़ियों को देखने वाली एकमात्र महिला थीं. वह इतिहासकार भी थीं और उन्होंने हज भी किया था. गुलबदन ने 64 सालों की उम्र में हुमायूंनामा लिखी थी. उन्होंने मुगलों के दर-बदर जीवन से लेकर अकबर के शक्तिशाली साम्राज्य तक को अपनी आंखों से देखा था.

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हुमायूं ने किया था पालन-पोषण

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गुलबदन बानो जब केवल आठ साल की थीं तब उनके पिता बाबर की मृत्यु हो गई. उनका पालन-पोषण बड़े सौतेले भाई हुमायूं ने किया. हुमायूं ने सत्रह साल की उम्र में उनकी शादी एक चगताई रईस खिजर ख्वाजा खान से कराई.

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अकबर ने वापस भारत बुलाया

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विवाह के बाद गुलबदन बानो काबुल चली गईं. 1557 में अकबर ने आगरा में शाही परिवार में शामिल होने के लिए उन्हें वापस बुलाया. मुगल शाही परिवार में उनका बहुत प्रभाव और सम्मान था. अकबर के अनुरोध पर उन्होंने हुमायूं की जीवनी लिखी. ये किताब कई राज खोलती है और हुमायूं और उसके सौतेले भाई कामरान मिर्ज़ा के साथ उसके टकराव के बारे में दुर्लभ जानकारी देती है.

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हुमायूं और कामरान की दुश्मनी

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गुलबदन बानो ने हुमायूं और कामरान की दुश्मनी की एक कहानी अपनी किताब में बताई है. उन्होंने लिखा है कि कामरान के धोखे से तंग आकर हुमायूं ने उसे गिरफ़्तार कर लिया. हुमायूं ने अपने सौतेले भाई को कठोर सजा दी और कामरान की आंखें फोड़ने का आदेश दिया.

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हज करने वाली पहली महिला

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गुलबदन बानो मुगल खानदान की पहली महिला थीं जो सऊदी अरब में हज पर गईं. उनके हज पर जाने के फैसले को अकबर का समर्थन प्राप्त था. गुलबदन बानो सूरत से नौकाओं में 11 महिलाओं के दल के साथ हज के लिए निकलीं थीं. उनके साथ कुछ पुरुष भी थे. सन 1603 में 80 साल की उम्र में उनकी मौत हुई. (तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं.)

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