रेलवे से विदा हुआ अंग्रेजों के जमाने का 'काला कोट'! अब नए लुक में दिखेंगे अधिकारी, केन्द्र सरकार ने बदला दशकों पुराना ड्रेस कोड

रेलवे से विदा हुआ अंग्रेजों के जमाने का 'काला कोट'! अब नए लुक में दिखेंगे अधिकारी, केन्द्र सरकार ने बदला दशकों पुराना ड्रेस कोड

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रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने औपनिवेशिक मानसिकता को खत्म करने के लिए अधिकारियों के पारंपरिक काले सूट और कोट को हटाने की घोषणा की है. अब रेलवे '52 हफ्ते-52 सुधार' के संकल्प के साथ तकनीक और भारतीय समाधानों पर फोकस करेगी.

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Published: January 11, 2026 5:37 PM IST email india.com By Satyam Kumar email india.com twitter india.com Facebook india.com twitter india.com telegram india.com Follow Us india.com Follow Us रेलवे से विदा हुआ अंग्रेजों के जमाने का 'काला कोट'! अब नए लुक में दिखेंगे अधिकारी, केन्द्र सरकार ने बदला दशकों पुराना ड्रेस कोड रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव

भारतीय रेलवे अब अंग्रेजों के जमाने की पहचान और गुलामी के प्रतीकों से पूरी तरह मुक्त होने और खुद को समय के साथ ट्रेंडी बनाने की राह पर है. इसी क्रम में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल अधिकारियों के लिए दशकों पुराने ‘काले कोट’ के अनिवार्य ड्रेस कोड को समाप्त करने का ऐतिहासिक ऐलान किया है.

अब काले कोट में नजर नहीं आएंगे रेलवे अधिकारी

भारतीय रेलवे के इतिहास में एक बड़ा अध्याय बदलने जा रहा है. रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटिश काल से चले आ रहे बंद गले के काले सूट और कोट को अब औपचारिक पोशाक (Official Dress) के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. यह फैसला केवल कपड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि रेलवे की कार्यसंस्कृति से औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) को जड़ से मिटाने की एक बड़ी पहल मानी जा रही है.

विकसित भारत की विकसित रेलवे के लिए हमारे संकल्प
✅ 2026 में 52 reforms
✅ Technology, innovation और AI का उपयोग
✅ Maintenance practices का एक नया स्तर
✅ Safety पर focus
✅ Training के नए parameters
✅ No colonial mindset

Ati Vishisht Rail Seva Puraskar 2025,… pic.twitter.com/Q9yOE66y5j

— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) January 9, 2026

औपनिवेशिक पहचान से मिलेगी आजादी

अब तक रेलवे में निरीक्षण, परेड और विशेष सरकारी आयोजनों के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के लिए काला कोट पहनना अनिवार्य था. यह पहनावा अंग्रेजों ने अपने शासनकाल के दौरान रसूख और अनुशासन के प्रतीक के रूप में शुरू किया था. रेलमंत्री ने 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार समारोह में कहा कि चाहे वह काम करने का तरीका हो या पहनावा, हमें अंग्रेजों की आहट से दूर होना होगा और भारतीय समाधानों पर भरोसा करना होगा.

52 हफ्ते-52 सुधार का संकल्प

काले कोट से निजात दिलाने के साथ ही रेलमंत्री ने साल 2026 के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश किया है. उन्होंने ’52 हफ्ते-52 सुधार’ का लक्ष्य रखा है. इसके तहत हर हफ्ते एक नया सुधार किया जाएगा. सेवा, उत्पादन, निर्माण और सुरक्षा जैसे हर विभाग में हर सप्ताह एक नया सुधार लागू किया जाएगा.

वहीं, रेलवे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक को खुले मन से अपनाएगी ताकि पिछले 100 वर्षों की कमियों को दूर किया जा सके. साथ ही रेलमंत्री ने इनोवेशन अवार्ड्स को लागू करने की घोषणा की. रेलवे के विकास में योगदान देने वाली टीमों को ‘इनोवेशन अवार्ड’ दिया जाएगा, जिसमें सर्वश्रेष्ठ टीम को 1 लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार मिलेगा.

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Today, in a meeting with Union MoS @VSOMANNA_BJP Ji and Union MoS @RavneetBittu Ji, along with Senior Railway Officials, it has been decided to bring major reforms in Railways this year.

– 52 Reforms in 52 Weeks for systematic improvements in service delivery
– Focus on Safety
-… pic.twitter.com/A6CWqhlNRL

— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) January 8, 2026

स्टार्टअप्स और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

सरकार अब विदेशी तकनीक के बजाय भारतीय स्टार्टअप्स और स्वदेशी समाधानों को प्राथमिकता दे रही है. इसके लिए जल्द ही एक ‘इनोवेशन पोर्टल’ लॉन्च किया जाएगा, जहां वैज्ञानिक और स्टार्टअप्स रेलवे की समस्याओं का समाधान पेश कर सकेंगे. सफल तकनीक के ट्रायल के लिए रेलवे 1.50 करोड़ रुपये तक का अनुदान भी देगी. इस बदलाव का उद्देश्य भारतीय रेल को 2047 तक ‘विकसित भारत’ का सबसे मजबूत और आधुनिक स्तंभ बनाना है. अधिकारियों को अब केवल आदेश देने वाले ‘साहब’ के बजाय एक तकनीकी और सेवा-उन्मुख लीडर के रूप में पहचान बनानी होगी.

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सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें

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