खुद की कब्र बनवाने वाले शख्स का निधन, गांव के लिए बन गए मिसाल
देश खुद की कब्र बनवाने वाले शख्स का निधन, गांव के लिए बन गए मिसाल - क्या थी वजह?
Man Who Built His Own Grave Now Death: तेलंगाना में लक्ष्मीपुरम गांव के निवासी नक्का इंद्रय्या ने कई वर्षों पहले अपनी कब्र बनवाकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था. 11 जनवरी को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.
Written byUma Sharma
Man Who Built His Own Grave Now Death: तेलंगाना में लक्ष्मीपुरम गांव के निवासी नक्का इंद्रय्या ने कई वर्षों पहले अपनी कब्र बनवाकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था. 11 जनवरी को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.
Uma Sharma 12 Jan 2026 15:19 IST
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Man Who Built His Own Grave Now Death: मरने की बात सुनकर लोगों के होश उड़ जाते हैं. कई लोग तो इस तरह की बात भी करना पसंद नहीं करते. लेकिन तेलंगाना के एक शख्स ने वर्षों पहले अपनी मौत की न सिर्फ बात की बल्कि खुद के लिए एक कब्र भी बनवा ली. वर्षों पहले जिस मकसद से इस शख्स ने अपनी कब्र खुदवाई थी उस कब्र में जाने का वक्त भी 11 जनवरी 2026 को आ गया. नक्का इंद्रय्या नामक इस शख्स ने दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन उन्होंने अपनी कब्र क्यों खुदवाई इसके पीछे क्या वजह थी? आइए जानते हैं.
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तेलंगाना के लक्ष्मीपुरम गांव के 80 वर्षीय नक्का इंद्रय्या ने कई साल पहले अपनी ही कब्र खुदवाई थी. उनके इस काम ने हर किसी को चौंका दिया था. दरअसल उन्होंने जहां अपनी कब्र खुदवाई उसके पास में ही उनकी पत्नी भी कब्र थी. उनकी अंतिम इच्छा थी कि उन्हें मरने के बाद इसी कब्र में दफनाया जाए.
पत्नी की कब्र के बगल में बनवाई थी अपनी कब्र
इंद्रय्या ने यह कदम इसलिए उठाया था ताकि उनकी मृत्यु के बाद उनके बच्चों को अंतिम संस्कार के दौरान किसी तरह का मानसिक या आर्थिक बोझ न उठाना पड़े. उन्होंने अपनी पत्नी की कब्र के बगल में अपनी कब्र बनवाई थी और वहां जीवन और मृत्यु के सत्य को दर्शाने वाला संदेश लिखी एक पट्टिका भी लगवाई थी.
अपनी कब्र पर लगाते थे रोज झाड़ू
ग्रामीणों की मानें तो इंद्रय्या नियमित रूप से उस जगह पर जाते थे. वो वहां साफ-सफाई करते, पौधों को पानी देते और शांत बैठकर आत्मचिंतन किया करते थे. उनका जीवन निस्वार्थ सेवा, दानशीलता और सादगी का प्रतीक रहा.
गांव के लिए किए कई नेक काम
इंद्रय्या के बड़े भाई नक्का भूमय्या ने बताया, “उन्होंने अपनी कब्र खुद खुदवाई, गांव में एक चर्च बनवाया और कई सामाजिक कार्य किए. अपने जीवनकाल में उन्होंने अपनी संपत्ति अपने चार बच्चों में बांट दी, उनके लिए घर बनवाए और परिवार में नौ शादियां कराईं.” साथ ही एक अन्य ग्रामीण श्रीनिवास ने इंद्रय्या के जीवन दर्शन को याद करते हुए कहा, “जो कुछ आप जमा करते हैं, वह यहीं छूट जाता है, लेकिन जो आप दूसरों को देते हैं, वही हमेशा आपके साथ रहता है.”
अंतिम इच्छा हुई पूरी
उनके निधन के बाद इंद्रय्या की अंतिम इच्छा पूरी की गई. बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी में उन्हें उसी कब्र में दफनाया गया, जिसे उन्होंने वर्षों पहले स्वयं के लिए बनवाया था. इंद्रय्या अक्सर कहा करते थे, “मैंने चार-पांच घर, एक स्कूल, एक चर्च और अब अपनी कब्र भी बनवाई है. मैं बहुत खुश हूं. कब्र बनवाने से लोगों को दुख होता है, लेकिन मुझे इससे संतोष मिलता है.”
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