आजादी से अब तक कितनी बार बदला प्रधानमंत्री आवास का पता? तीन मूर्ति भवन से सेवा तीर्थ तक सत्ता के ठिकानों की पूरी कहानी
Hindi Gallery Hindi How Many Times Pm Residence Address Changed Since 1947 From Teen Murti Bhavan To Seva Teerth 8265495 आजादी से अब तक कितनी बार बदला प्रधानमंत्री आवास का पता? तीन मूर्ति भवन से सेवा तीर्थ तक सत्ता के ठिकानों की पूरी कहानी
भारत में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास का पता आजादी के बाद कई बार बदला है. पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू तीन मूर्ति भवन में रहते थे, जो बाद में स्मारक बना. चलिए आपको बताते हैं पीएम आवास बदलने की पूरी कहानी.
Last updated on - January 12, 2026 6:31 PM IST
By Tanuja Joshi
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नेहरू के बाद बदला ठिकाना
1964 में नेहरू के निधन के बाद तीन मूर्ति भवन का उपयोग आवास के रूप में समाप्त हो गया. 1984 में इसे नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय में बदल दिया गया, जो आज ऐतिहासिक धरोहर है.
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लाल बहादुर शास्त्री और 10 जनपथ
देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 10 जनपथ को अपना आधिकारिक निवास बनाया. वे 1964 से 1966 तक यहीं रहे, बाद में यह भवन कांग्रेस पार्टी को सौंप दिया गया.
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इंदिरा गांधी और सफदरजंग रोड का इतिहास
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सफदरजंग रोड स्थित बंगले में रहती थीं. 31 अक्टूबर 1984 को यहीं उनकी हत्या हुई, जिसके बाद इस आवास को इंदिरा गांधी स्मारक और संग्रहालय में बदल दिया गया.
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रेस कोर्स रोड से पीएम आवास बनने की शुरुआत
1980 के दशक में लुटियंस दिल्ली में पांच बंगलों को प्रधानमंत्री आवास के रूप में विकसित किया गया. 1984 में राजीव गांधी पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने 7 रेस कोर्स रोड को स्थायी निवास के तौर पर अपनाया.
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7 रेस कोर्स रोड को मिली आधिकारिक पहचान
1990 में प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में 7 रेस कोर्स रोड को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास घोषित किया गया, जिसके बाद यह सत्ता का स्थायी पता बन गया.
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7 लोक कल्याण मार्ग: सिर्फ बंगला नहीं, पूरा परिसर
नाम बदलकर 7 लोक कल्याण मार्ग किए जाने के बाद यह पांच बंगलों का विशाल परिसर बन गया. इसमें पीएम का निजी आवास, कार्यालय, गेस्ट हाउस, एसपीजी आवास और हेलीपैड तक शामिल हैं.
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सेवा तीर्थ परिसर: सत्ता का नया केंद्र
अब रायसीना हिल के पास सेवा तीर्थ परिसर लगभग तैयार है, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय और आवास एक ही जगह होंगे. यह बदलाव सुरक्षा, प्रशासन और कार्यक्षमता को नई दिशा देगा.