किसने लिखा है ईरान का राष्ट्रगान, इसका मतलब भी दिमाग हिला देगा आज
Hindi Gallery Hindi Who Wrote Iran National Anthem Mehr E Khavaran Hindi Meaning Also Shock Your Brain Iran Ka Rashtra Gaan Kisne Likha Hai Aur Iska Hindi Me Matlab Kya Hai 8265954 किसने लिखा है ईरान का राष्ट्रगान, इसका हिंदी में मतलब भी दिमाग हिला देगा
सत्ता में बदलाव के लिए पूरे ईरान में तीखा विरोध-प्रदर्शन जारी है. मगर इन सबके बीच ईरान का राष्ट्रगान भी चर्चा में बना हुआ है. जानते हैं ईरान का राष्ट्रगान किसने लिखा है.
Last updated on - January 13, 2026 9:37 AM IST
By Ikramuddin
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चौंकाने वाला है नाम
ईरान का वर्तमान राष्ट्रगान 1990 में अपनाया गया, लेकिन इसके बोल लिखने वाले का नाम सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं. यह कोई आम कवि नहीं, बल्कि सैयद बघेरी हैं, जिन्होंने 1989 में ये बोल तैयार किए थे.
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संगीत के रचनाकार
संगीत की रचना हसन रियाही ने 1988 में की थी. वे ईरानी संगीतकार थे, जिन्होंने इस्लामी क्रांति के बाद के दौर में यह धुन बनाई.
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क्या कहता है राष्ट्रगान
राष्ट्रगान में 'बहमन' (यानी फारसी कैलेंडर का महीना, जहां इस्लामी क्रांति हुई) का जिक्र है. यह आयतुल्लाह खुमैनी की क्रांति को अमर बताता है, जो कई लोगों के लिए भावुक और विवादास्पद है.
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पहली लाइन का मतलब
राष्ट्रगान की पहली लाइन सूरज की किरण से शुरू होती है. यानी सर जद अज उफक मेहर-ए खावरान. इसका मतलब पूर्व दिशा से सूरज उगता है, जो न्याय में विश्वास करने वालों की आंखों की रोशनी है.
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इमाम खुमैनी का संदेश
पयामत ऐ इमाम 'इस्तेकलाल, आजादी नक्श-ए जान-ए मास्त. यानी हे इमाम! आपका संदेश स्वतंत्रता, आजादी हमारी आत्मा में अंकित है. यह क्रांति का मूल मंत्र है.
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क्रांति का प्रमुखता से जिक्र
शहीदान पेचीदे दर गूश-ए ज़मान फरयादतान का मतलब है कि शहीदों की आवाज समय के कानों में गूंज रही है. मतलब: क्रांति के शहीद अमर हैं और देश को बचाए रखेंगे.
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हमेशा कायम रहने वाला इस्लामी गणराज्य
पायंदे मानी ओ जावेदान जुम्हूरी-ए इस्लामी-ए ईरान. इस लाइन का मतलब है कि इस्लामी गणराज्य ईरान हमेशा बना रहेगा और अमर है. यह सीधा राजनीतिक संदेश है.
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कई लोग क्यों नहीं गाते? विरोध का प्रतीक
हाल के विरोध प्रदर्शनों में ईरानी लोग इस राष्ट्रगान की जगह अनऑफिशियल गाना 'ए ईरान' गाते हैं, क्योंकि वर्तमान वाला उन्हें क्रांति से जोड़ता है, जो विवादास्पद है.
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पुराना राष्ट्रगान और नया राष्ट्रगान
1979 क्रांति से पहले 'ए ईरान' (हुसैन गुल-ए-गुलाब के बोल) ज्यादा लोकप्रिय था. वह सिर्फ देशभक्ति पर था, ना कि इस्लामी गणराज्य पर. नया वाला ज्यादा धार्मिक है.
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सबसे बड़ा चौंकाने वाला सच
राष्ट्रगान के बोल सुनकर लगता है जैसे कोई धार्मिक-राजनीतिक घोषणापत्र हो, ना कि सिर्फ देशभक्ति का गीत. इसका मतलब आज भी लाखों ईरानियों के लिए 'क्रांति की जीत' है.