कब पेश हुआ था भारत का पहला बजट? कितने रुपये की मिली थी मंजूरी? आजादी से अब तक क्या-क्या हुए बदलाव

कब पेश हुआ था भारत का पहला बजट? कितने रुपये की मिली थी मंजूरी? आजादी से अब तक क्या-क्या हुए बदलाव

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भारत का केंद्रीय बजट सिर्फ कमाई और खर्चों का लेखाजेखा नहीं है. ये देश की आर्थिक सोच और नीतिगत दिशा का आईना भी होता है.समय के साथ भारत की अर्थव्यवस्था बदली और उसी के साथ बजट की परंपराएं भी आधुनिक होती चली गईं.

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Published: January 13, 2026 6:49 PM IST email india.com By Anjali Karmakar email india.com Facebook india.com twitter india.com telegram india.com Follow Us india.com Follow Us कब पेश हुआ था भारत का पहला बजट? कितने रुपये की मिली थी मंजूरी? आजादी से अब तक  क्या-क्या हुए बदलाव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को आम बजट पेश करने वाली हैं. भारत के इतिहास का ये 80वां आम बजट होगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट (Union Budget 2026-27) पेश करने जा रही हैं. इसी के साथ सीतारमण लगातार 9 बार बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी.भारत के इतिहास का ये 80वां आम बजट होगा. 1 फरवरी को रविवार पड़ रहा है. ये दूसरी बार है, जब देश का बजट रविवार को पेश हो रहा है. इससे पहले 1999 में रविवार को ही आम बजट पेश हुआ था.

Highlights

भारत में जेम्स विल्सन ने पेश किया था पहला बजट. स्वतंत्र भारत का पहला बजट आरके शनमुघम चेट्टी ने किया पेश. पहले बजट का 92.74 करोड़ रुपये रक्षा सेवाओं पर हुआ खर्च.

भारत का केंद्रीय बजट सिर्फ कमाई और खर्चों का लेखाजेखा नहीं है. ये देश की आर्थिक सोच और नीतिगत दिशा का आईना भी होता है.समय के साथ भारत की अर्थव्यवस्था बदली और उसी के साथ बजट की परंपराएं भी आधुनिक होती चली गईं.

आइए जानते हैं भारत में पहला बजट कब पेश हुआ था? स्वतंत्र भारत का पहला बजट कब पेश हुआ और ये कितने रुपये का बजट था? आजादी से लेकर अब तक देश के आम बजट में क्या-क्या बदलाव हुए हैं:-

कब पेश हुआ था पहला बजट?
भारत में पहली बार बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था. उस समय देश ब्रिटिश शासन के अधीन था. इस बजट को उस समय के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था. उस दौर में बजट का मकसद आम जनता की भलाई से ज्यादा, ब्रिटिश शासन की जरूरतों को पूरा करना था.

आजाद भारत का पहला केंद्रीय बजट कब और किसने पेश किया?
वहीं, आजाद भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था. इसे तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने लोकसभा में पेश किया था. ये बजट आजादी के बाद की शुरुआती आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था. इसमें देश के पुनर्निर्माण और बुनियादी जरूरतों पर फोकस रखा गया.

आजाद भारत का पहला बजट कितने रुपये का था?
आजाद भारत का पहला बजट सिर्फ 171.15 करोड़ रुपये का था. बजट में कुल रेवेन्यू 171.15 करोड़, कुल एक्पेनडिचर(खर्च) 197.29 करोड़ रुपये था. इस बजट में राजकोषीय घाटा यानी Fiscal Deficit 24.59 करोड़ था. तब डिफेंस पर फोकस रखा गया था. इस सेक्टर के लिए 92.74 करोड़ का बजट रखा गया था. उस दौर में कुल खर्च का करीब 46-50% हिस्सा सिर्फ रक्षा पर खर्च हुआ.

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स्वतंत्र भारत का पहला बजट साढ़े सात महीने के लिए था
भारत के विभाजन के कारण व्यापक दंगों के बीच पहला केंद्रीय बजट पेश किया गया था। यह बजट साढ़े सात महीने का था, जिसके बाद अगला बजट 1 अप्रैल, 1948 से लागू होना था.

28 फरवरी से 1 फरवरी हुआ बजट का दिन
लंबे समय तक भारत में केंद्रीय बजट हर साल 28 फरवरी को पेश किया जाता रहा. यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी. साल 2017 में मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए बजट की तारीख 1 फरवरी कर दी. इसका मकसद यह था कि बजट से जुड़ी योजनाएं नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से पहले ही लागू की जा सके.

टाइमिंग में भी हुआ बदलाव
पहले बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था. अटल बिहारी वाजपेयी की NDA सरकार ने बजट पेश करने का टाइम बदला. तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट की टाइमिंग शाम 5 बजे से बदलकर सुबह 11 बजे कर दी. तब से लेकर आज तक बजट इसी समय पेश किया जाता है.

शनिवार को भी बजट हुआ पेश
पहले शनिवार और रविवार को मार्केट क्लोज होने के कारण बजट पेश नहीं होता था. लेकिन, समय के साथ-साथ ये परंपरा भी टूटी.2015 और 2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को बजट पेश किया था. 2020 में कोविड महामारी के दौरान रविवार को संसद की कार्यवाही हुई थी.वहीं, 2025 में निर्मला सीतारमण ने भी शनिवार को बजट पेश किया था. अब 1 फरवरी 2026 मे रविवार को बजट रखा जाएगा.

2017 में रेल बजट हुआ मर्ज
कई दशकों तक भारत में अलग से रेल बजट पेश किया जाता था. साल 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट में मर्ज कर दिया गया. इसे लेकर सरकार का तर्क था कि इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा.

ब्रीफकेस से निकालकर लाल कपड़े में लपेटी गई बजट की फाइलें
साल 2019 से पहले बजट को लेदर ब्रीफकेस में संसद लाया जाता था. लेकिन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को तोड़ा. उन्होंने बजट को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर पेश किया. इसे देश का बहीखाता बताया गया.

कागजी फाइलों से डिजिटल फॉर्म का सफर
पहले बजट दस्तावेज भारी-भरकम कागजी फाइलों में पेश किए जाते थे. साल 2021 में पहली बार भारत का केंद्रीय बजट पूरी तरह डिजिटल फॉर्म में पेश किया गया. इसके साथ ही ‘बजट ऐप’ भी लॉन्च किया गया. इससे आम लोग आसानी से बजट से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकें.

सबसे लंबा और सबसे छोटा बजट भाषण
शब्द के हिसाब से सबसे लंबा बजट भाषण मनमोहन सिंह ने 1991 में दिया था. इस भाषण में 18,177 शब्द थे. अरुण जेटली का 2017 में बजट भाषण 18604 शब्दों का था. सबसे ज्‍यादा देर तक बजट भाषण का रिकॉर्ड जसवंत सिंह के नाम है. उन्होंने 2003 में अपना बजट पेश करने के लिए 2 घंटे 13 मिनट का समय लिया. 1977 में हिरूभाई एम पटेल ने अंतरिम बजट पेश करते हुए 800 शब्दों का सबसे छोटा बजट भाषण दिया था.

सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड
जनता दल के मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा 10 बार बजट पेश किया है. उनके बाद कांग्रेस के पी चिदंबरम हैं, जिन्होंने 9 बार बजट पेश किए हैं. निर्मला सीतरमण 1 फरवरी 2026 को लगातार 9वीं बार बजट पेश करने वाली पहली महिला वित्त मंत्री बन जाएंगी.

जब प्रधानमंत्री ने पेश किया बजट
जवाहरलाल लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के रूप में बजट पेश किया. 1970 में इंदिरा गांधी बजट पेश करने वाली पहली महिला वित्त मंत्री बनीं. हालांकि, पीएम होने के अलावा उनके पास यह एक पोर्टफोलियो था. वहीं, 28 फरवरी 1973 को वाईबी चव्हाण ने बजट पेश किया, जिसे 550 करोड़ रुपये के बजट घाटे के कारण ‘काला बजट’ कहा जाने लगा.

फोकस एरिया भी बदले
शुरुआती दौर में बजट का फोकस कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचे पर था. बाद में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी और सामाजिक कल्याण जैसे विषय बजट की प्राथमिकताओं में शामिल होते गए. अब बजट में आत्मनिर्भर भारत, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर जोर दिया जाता है.

केंद्रीय बजट में हुए ये बदलाव दिखाते हैं कि भारत की आर्थिक नीति समय के साथ अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और आधुनिक होती गई है.

FAQs
राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय में फर्क?
राजस्व व्यय दिन-प्रतिदिन के खर्च (वेतन, सब्सिडी) हैं, ये संपत्ति नहीं बनाते हैं. जबकि पूंजीगत व्यय बुनियादी ढांचे (सड़कें, अस्पताल) पर निवेश हैं. इनसे लॉन्ग टर्म में संपत्ति बनती है.

राजकोषीय घाटा क्या होता है?
यह वह राशि है जो सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए उधार लेनी पड़ती है.

अंतरिम बजट किसे कहते हैं?
चुनाव वर्ष में पेश किया जाने वाले बजट को अंतरिम बजट कहते हैं. ये अस्थायी बजट होता है, ताकि नई सरकार के कार्यभार संभालने तक वित्तीय कार्य चलते रहें.

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Anjali Karmakar

Anjali Karmakar

अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें

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