लोहरी से लेकर पोंगल तक, जानें भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाया जाता है फसलों का त्योहार

लोहरी से लेकर पोंगल तक, जानें भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाया जाता है फसलों का त्योहार

धर्म-कर्म लोहरी से लेकर पोंगल तक, जानें भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाया जाता है फसलों का त्योहार

भारत के फसल उत्सव कृषि परंपराओं से जुड़े ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हैं, जो किसानों, प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. लोहरी, मकर संक्रांति, उत्तरायण और पोंगल जैसे त्योहार विविध क्षेत्रों में अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाए जाते हैं.

Written byRavi Prashant

भारत के फसल उत्सव कृषि परंपराओं से जुड़े ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हैं, जो किसानों, प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. लोहरी, मकर संक्रांति, उत्तरायण और पोंगल जैसे त्योहार विविध क्षेत्रों में अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाए जाते हैं.

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Ravi Prashant 13 Jan 2026 20:50 IST

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लोहरी 2026 Photograph: (GROK)

भारत की सांस्कृतिक संरचना में फसल उत्सवों का एक विशिष्ट और सम्मानजनक स्थान है. कृषि आधारित समाज में ये पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों के परिश्रम, प्रकृति की उदारता और सामुदायिक एकता का उत्सव हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों में मनाए जाने वाले हार्वेस्ट फेस्टिवल्स स्थानीय जलवायु, फसल पैटर्न और परंपराओं के अनुसार भिन्न होते हैं, लेकिन इनका मूल भाव कृतज्ञता और समृद्धि ही रहता है.

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लोहरी:- सर्दियों के अंत का उत्सव

लोहरी मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में मनाई जाती है. यह पर्व कठोर सर्दियों के अंत और दिन लंबे होने की शुरुआत का प्रतीक है. इस अवसर पर लोग अलाव के चारों ओर एकत्र होकर लोकगीत गाते हैं और भांगड़ा व गिद्दा जैसे पारंपरिक नृत्य करते हैं. अग्नि और सूर्य की पूजा के माध्यम से ऊष्मा, नवजीवन और आशा का संदेश दिया जाता है. मक्की की रोटी, सरसों का साग, पिन्नी, गुड़ गजक और हलवा जैसे व्यंजन सामाजिक मेल-जोल को और मजबूत करते हैं.

मकर संक्रांति:- सूर्य उपासना और शुभ आरंभ

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसे सूर्य देव को समर्पित किया जाता है. यह पर्व देशभर में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है. पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और प्रार्थनाएं इस दिन का प्रमुख हिस्सा हैं. पतंग उड़ाना इस त्योहार की सबसे लोकप्रिय परंपराओं में से एक है, जो उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है. यह पर्व शीत अयनांत के समापन और शुभ काल की शुरुआत को दर्शाता है.

उत्तरायण:- रंगीन पतंगों का उत्सव

उत्तरायण विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है. यह मकर संक्रांति के साथ ही पड़ता है और सूर्य देव तथा विद्या की देवी सरस्वती को समर्पित होता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध इस पर्व में आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है. मान्यता है कि इस समय सूर्य की किरणें शरीर और मन को शुद्ध करती हैं, जिससे उत्तरायण सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन जाता है.

पोंगल:- दक्षिण भारत का चार दिनों का पर्व

पोंगल मुख्य रूप से तमिलनाडु, पुडुचेरी और श्रीलंका के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला चार दिवसीय फसल उत्सव है. ‘पोंगल’ शब्द का अर्थ उबाल आना या छलकना है, जो समृद्धि और प्रचुरता का प्रतीक है. भोगी पोंगल से शुरू होकर सूर्य पोंगल, मट्टू पोंगल और कन्नुम पोंगल तक चलने वाले इस पर्व में सूर्य देव को चावल, दूध और गुड़ से बना विशेष व्यंजन अर्पित किया जाता है. रंगीन कोलम, मवेशियों की पूजा, मंदिर दर्शन और पारिवारिक भोज इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं.

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