मच्छरों को लग रही ज्यादा प्यास, क्यों पी रहे ज्यादा इंसानी खून?
Hindi World HindiMosquitoes Are Getting Thirstier Why Are They Drinking More Human Blood मच्छरों को लग रही ज्यादा प्यास, क्यों पी रहे ज्यादा इंसानी खून?
Mosquitoes: रिसर्चर्स के अनुसार, यह इकोलॉजिकल गड़बड़ी मच्छरों को इंसानी बस्तियों के करीब ला रही है.
Published: January 15, 2026 2:17 PM IST
By Vineet Sharan
| Edited by Vineet Sharan
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(photo credit AI, for representation only)
Mosquitoes: एक मच्छर पहले की तुलना में ज्यादा लोगों को काट रहे हैं. फ्रंटियर्स इन इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित एक नए शोध में यह दावा किया गया है. आइये जानते हैं कि इसकी क्या वजह है.
मच्छरों के ठिकाने सिकुड़ रहे
इंसानी बस्तियां जंगलों में और अंदर तक जा रही हैं, इसके नतीजे सिर्फ पेड़ों के गायब होने और जानवरों के विस्थापित होने तक ही सीमित नहीं हैं. एक नई रिसर्च स्टडी के मुताबिक, मच्छरों को सिकुड़ते हुए ठिकानों में ढलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, और इसके नतीजे में, वे ज्यादा से ज़्यादा इंसानों को काट रहे हैं.
फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ रियो डी जनेरियो के को-ऑथर डॉ. सर्जियो मचाडो ने बताया, जब प्राकृतिक ऑप्शन कम हो जाते हैं, तो मच्छर खून के नए, वैकल्पिक सोर्स ढूंढने पर मजबूर हो जाते हैं. सुविधा के लिए वे इंसानों पर ज्यादा निर्भर हो जाते हैं, क्योंकि इन इलाकों में हम सबसे ज्यादा पाए जाने वाले होस्ट हैं. स्टडी में बताया गया है कि जैसे-जैसे जानवरों की आबादी कम हो रही है या दूर जा रही है, मच्छर अपना खाने का तरीका बदलते दिख रहे हैं.
इसका क्या होगा इंसानों पर असर
शोधकर्ताओं के मुताबिक एक मच्छर के ज्यादा इंसानों के काटने के चलते संक्रामक बीमारियों के फैलने के बारे में नई चिंताएं बढ़ रही हैं.
कितनी तरह की बीमारियों का खतरा
अटलांटिक फॉरेस्ट क्षेत्र और दुनिया भर के दूसरे क्षेत्रों में मच्छर येलो फीवर, डेंगू, ज़ीका और चिकनगुनिया जैसे वायरस फैलाते हैं, जो सभी इंसानी सेहत के लिए काफ़ी खतरनाक हैं.
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कहां हुआ यह शोध
फ्रंटियर्स इन इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन मेंपब्लिश हुई यह रिसर्च ब्राज़ील के अटलांटिक फॉरेस्ट पर फोकस करती है, जो धरती के सबसे ज़्यादा बायोडायवर्सिटी वाले क्षेत्रों में से एक है. मच्छरों के खाने के पैटर्न को समझने के लिए, रिसर्चर्स ने रियो डी जनेरियो राज्य में दो सुरक्षित जंगल रिज़र्व, सिटियो रेकैंटो प्रेज़रवार और गुआपियाकू नदी इकोलॉजिकल रिजर्व से कीड़े इकट्ठा किए.
जंगल पर कटाई का असर
कभी देश के समुद्र तट के किनारे बिना रुके फैला हुआ, आज जंगल का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा ही बचा है, जो जंगल की कटाई और डेवलपमेंट की वजह से है.
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Vineet Sharan
Vineet Sharan Srivastava एक भारतीय पत्रकार और डिजिटल न्यूज एक्सपर्ट हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 17 वर्षों का अनुभव है. वह असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं ... और पढ़ें
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