पति और पत्नी अलग-अलग फाइल करते हैं टैक्स? अब मैरिड कपल को बजट में मिलने वाला है बड़ा सरप्राइज, जान लें अपने मतलब की बात

पति और पत्नी अलग-अलग फाइल करते हैं टैक्स? अब मैरिड कपल को बजट में मिलने वाला है बड़ा सरप्राइज, जान लें अपने मतलब की बात

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Joint Taxation: इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने फाइनेंस मिनिस्ट्री को बजट में मैरिड कपल के लिए जॉइंट टैक्सेशन को शामिल करने की सलाह दी है. इस बदलाव से न सिर्फ मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि भारत का टैक्स स्ट्रक्चर अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों के बराबर आ जाएगा.

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Published: January 15, 2026 5:40 PM IST email india.com By Anjali Karmakar email india.com Facebook india.com twitter india.com telegram india.com Follow Us india.com Follow Us पति और पत्नी अलग-अलग फाइल करते हैं टैक्स? अब मैरिड कपल को बजट में मिलने वाला है बड़ा सरप्राइज, जान लें अपने मतलब की बात अभी इनकम टैक्स के न्यू रीजीम में पति और पत्नी दोनों 4 लाख रुपये के बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन के हकदार हैं.

बदलते जमाने के साथ-साथ लोगों की सोच भी बदली है. अब पत्नी सिर्फ घर के कामों, ससुरालवालों और बच्चों की देखभाल करने तक सीमित नहीं है. वो घर से बाहर निकलकर कमाने भी लगी है. बड़े शहरों में मैरिड कपल वर्किंग ही होते हैं, ताकि दोनों कमाकर अपने सपनों को पूरा कर सके. अब कमाई होगी, तो सरकार को टैक्स भी देना होगा. मौजूदा नियम के मुताबिक, अगर पति और पत्नी दोनों वर्किंग हैं. उनकी इनकम टैक्स स्लैब के दायरे में आती है, तो दोनों को ही इनकम टैक्स भरना पड़ता है. इससे कई परिवारों में टैक्स लायबिलिटी बढ़ जाती है. केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ऐसे वर्किंग मैरिड कपल को बड़ा सरप्राइज दे सकती है. इससे मैरिड कपल की टैक्स लायबिलिटी कम हो जाएगी.

दरअसल, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने फाइनेंस मिनिस्ट्री को बजट में मैरिड कपल के लिए जॉइंट टैक्सेशन को शामिल करने की सलाह दी है. ICAI का कहना है कि पति-पत्नी को जॉइंट रिटर्न फाइल करने का ऑप्शन मिलना चाहिए.अभी इनकम टैक्स के न्यू रीजीम में पति और पत्नी दोनों 4 लाख रुपये के बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन के हकदार हैं. जबकि ओल्ड टैक्स रिजीम में पति-पत्नी के लिए बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन अलग-अलग होता है. दोनों 2.5-2.5 लाख रुपये तक की इनकम पर बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन ले सकते हैं.

ICAI ने दी ये दलीलें
ICAI ने कहा, “भारत में पत्नियों में भी कमाने की दिलचस्पी बढ़ रही है. लेकिन, अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनमें परिवार पति की इनकम पर निर्भर है. मौजूदा नियम की वजह से कई परिवार पेपर पर इनकम दूसरे सदस्यों के नाम से दिखाते हैं. अगर सरकार पति और पत्नी के लिए जॉइंट टैक्सेशन की शुरुआत करती है, तो ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

बजट में क्या हो सकता है?

पति और पत्नी को वैलिड पैन के साथ जॉइंट रिटर्न फाइलिंग की परमिशन दी जा सकती है. इससे दोनों पर एकसाथ टैक्स लगाया जा सकता है. टैक्सपेयर्स के लिए ये ऑप्शन होना चाहिए कि अगर वह मौजूदा सिस्टम में रहना चाहता है, तो रह सकता है. इसके साथ ही बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट भी दोगुना करने की बात कही गई है. इससे 8 लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले परिवार को टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं रह जाएगी. इनकम बढ़ने के साथ टैक्स भी बढ़ता जाएगा. ऐसे में 30% टैक्स सालाना 48 लाख रुपये से ज्यादा की इनकम पर लगेगा.

जॉइंट टैक्सेशन के फायदे?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जॉइंट टैक्सेशन शुरू होने से उन मामलों में बहुत आसानी होगी, जहां प्रॉपर्टी पति-पत्नी के नाम पर जॉइंट होती है. अक्सर ऐसी संपत्तियों की फंडिंग एक ही व्यक्ति करता है, जिससे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच और नोटिस का खतरा बना रहता है. सिंगल रिटर्न फाइलिंग से कागजी कार्रवाई और कंप्लायंस का बोझ कम होगा, जिससे टैक्सपेयर्स और डिपार्टमेंट दोनों का समय बचेगा. इस बदलाव से न सिर्फ मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि भारत का टैक्स स्ट्रक्चर अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों के बराबर आ जाएगा.

प्रस्तावित टैक्स स्लैब
ICAI ने मैरिड कपल के लिए टैक्स स्लैब का प्रस्ताव भी रखा है. इसमें 6 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. 6 से 14 लाख पर 5%, 14 से 20 लाख पर 10%, 20 से 24 लाख पर 15%, 24 से 30 लाख पर 20% और 30 लाख से ज्यादा की इनकम पर 30% टैक्स रखने की सलाह दी गई है. इसके अलावा बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट 6 लाख रुपये और सरचार्ज लिमिट 1 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है.

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जॉइंट टैक्सेशन को लेकर बाकी देशों में क्या कानून है?
अमेरिका, जर्मनी और पुर्तगाल में पति और पत्नी को जॉइंटली इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की इजाजत है. अमेरिका में मैरिड फाइलिंग जॉइंटली (MFJ) सिस्टम लागू है. इसमें सिंगल रिटर्न फाइलिंग के मुकाबले जॉइंट टैक्स डबल है. इससे पति और पत्नी की जॉइंट इनकम की वजह से हायर टैक्स ब्रैकेट लागू नहीं होता है, जबकि सिर्फ पति या पत्नी की इनकम होने पर वह हायर टैक्स ब्रैकेट में आ जाती है. वहीं, जर्मनी और पुर्तगाल समेत यूरोप के कई देशों में जॉइंट या फैमिली बेस्ड टैक्सेशन है. इससे परिवार पर टैक्स का बोझ कम पड़ता है.

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Anjali Karmakar

अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें

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