क्या होता है हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट? भारत के पड़ोसी में होगा चालू, बिजली के अलावा बनेगी ये बड़ी चीज

क्या होता है हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट? भारत के पड़ोसी में होगा चालू, बिजली के अलावा बनेगी ये बड़ी चीज

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Hybrid Nuclear Power Plant: जुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट का पहला फेज़ 2032 में शुरू होने की उम्मीद है.

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Updated: January 19, 2026 12:41 PM IST email india.com By Vineet Sharan email india.com twitter india.com | Edited by Vineet Sharan email india.com twitter india.com Facebook india.com twitter india.com telegram india.com Follow Us india.com Follow Us क्या होता है हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट? भारत के पड़ोसी देश में होगा चालू, बिजली के अलावा बनेगी ये बड़ी चीज (photo credit AI, for representation only)

Hybrid Nuclear Power Plant: चीन के न्यूक्लियर साइंस्ट ने कमाल कर दिखाया है. पड़ोसी देश में दुनिया के पहले हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट का कंस्ट्रक्शन शुरू हो गया है. आइये जानते हैं कि यह नया पावर प्लांट पुराने परंपरागत न्यूक्लियर पावर प्लांट से कैसे अलग है.

कहां बन रहा नया प्लांट

जुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पूर्वी चीन के जियांग्सू प्रांत में लियानयुंगांग शहर में बनाया जा रहा है और इसके सात साल में बनने की उम्मीद है. यानी यह 2032 तक ऑपरेशन में आ सकता है. शुक्रवार को न्यूक्लियर यूनिट वन के लिए कंक्रीट डालकर आधिकारिक तौर पर काम शुरू हो गया.

कैसे अलग है नया प्लांट

इस प्रोजेक्ट को जो चीज यूनिक बनाती है, वह यह है कि यह दो अलग-अलग न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी को मिलाता है. यह प्लांट हुआलोंग वन प्रेशराइज़्ड वॉटर रिएक्टर और एक हाई-टेम्परेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर को एक साथ लाएगा.

बिजली के अलावा भाप भी बनेगी यहां

यह प्लांट न सिर्फ बिजली पैदा करने के लिए डिजाइन किया गया है, बल्कि इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए स्टीम की सप्लाई भी करेगा. इस तरह की हाइब्रिड न्यूक्लियर फैसिलिटी पहले दुनिया में कहीं भी नहीं बनाई गई है

दो फेज में निर्माण

यह प्रोजेक्ट दो फेज़ में डेवलप किया जाएगा. पहले फेज में हुआलोंग वन रिएक्टर यूनिट और एक हाई-टेम्परेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर यूनिट बनाई जाएगी.

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कौन कर रहा निर्माण

हुआलोंग वन रिएक्टर चीन की पूरी तरह से स्वदेशी तीसरी पीढ़ी की न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी पर आधारित है. इसे चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप और चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन ने डेवलप किया है.

क्या होगा चीन को फायदा

एक बार जब प्लांट चालू हो जाएगा, तो उम्मीद है कि इससे फॉसिल फ्यूल का इस्तेमाल काफी कम हो जाएगा. सालाना कोयले की खपत में लगभग 7.26 मिलियन टन की कमी आने का अनुमान है. साथ ही, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को हर साल लगभग 19.6 मिलियन टन कम किया जा सकता है.

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Vineet Sharan Srivastava एक भारतीय पत्रकार और डिजिटल न्यूज एक्सपर्ट हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 17 वर्षों का अनुभव है. वह असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं ... और पढ़ें

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