क्या लाल बाल वाले लोगों को कम होता है कैंसर का खतरा? नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा
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नई रिसर्च में दावा किया गया है कि लाल बालों में मौजूद फियोमेलेनिन पिगमेंट शरीर को हानिकारक तत्वों से बचाने में मदद कर सकता है. ऐसे में चलिए जानते हैं इस स्टडी के बारे में.
Written byAkansha Thakur
नई रिसर्च में दावा किया गया है कि लाल बालों में मौजूद फियोमेलेनिन पिगमेंट शरीर को हानिकारक तत्वों से बचाने में मदद कर सकता है. ऐसे में चलिए जानते हैं इस स्टडी के बारे में.
Akansha Thakur 19 Jan 2026 13:23 IST
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Red Hair Pigment
आपने अक्सर महिलाओं को देखा होगा जो अपने बालो पर लाल कलर और तरह-तरह के कलर करवाती रहती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाल बाल कैंसर के खतरे को कम कर सकता है. हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च ने लाल बालों को लेकर एक दिलचस्प बात बताई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लाल बालों में मौजूद एक खास पिगमेंट शरीर को कुछ हानिकारक तत्वों से बचाने में मदद कर सकता है. स्पेन के शोधकर्ताओं के अनुसार, शरीर में सिस्टीन नामक एक अमीनो एसिड होता है. सामान्य मात्रा में यह नुकसानदेह नहीं है. लेकिन अगर यह अधिक मात्रा में जमा हो जाए, तो यह सूजन, कोशिकाओं को नुकसान और समय से पहले बूढ़ापन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है.
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क्या है फियोमेलेनिन?
लाल बालों में पाए जाने वाले पीले-नारंगी रंग के पिगमेंट को फियोमेलेनिन कहा जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पिगमेंट शरीर में अतिरिक्त सिस्टीन को संतुलित रखने में मदद करता है. इससे किडनी, लिवर, आंखें, मांसपेशियां और दिमाग जैसे अहम अंग सुरक्षित रह सकते हैं.
पक्षियों पर किया गया एक्सपेरिमेंट
इस अध्ययन के लिए स्पेन के नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल साइंसेज की टीम ने जेब्रा फिंच नाम के पक्षियों पर रिसर्च की. इन पक्षियों के पंख और चोंच चमकीले नारंगी रंग के होते हैं. कुल 65 पक्षियों को तीन समूहों में बांटा गया. एक समूह को सिस्टीन दिया गया. दूसरे समूह को सिस्टीन के साथ एक दवा दी गई, जिससे फियोमेलेनिन बनना रुक जाए और तीसरा समूह सामान्य रखा गया. 30 दिनों बाद उनके खून और नए उगते पंखों की जांच की गई. इसके जरिए यह देखा गया कि कोशिकाओं पर कितना असर पड़ा.
क्या निकला नतीजा?
शोध में पाया गया कि जिन नर पक्षियों में फियोमेलेनिन बन रहा था, उनकी कोशिकाओं को कम नुकसान हुआ. वहीं जिन पक्षियों में यह पिगमेंट बनने से रोका गया, उनमें कोशिकाओं का नुकसान ज्यादा देखा गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पिगमेंट सिस्टीन के हानिकारक प्रभाव को संतुलित करने का काम कर सकता है.
इंसानों पर अभी और शोध जरूरी
हालांकि, फियोमेलेनिन धूप की पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा नहीं देता. इसी वजह से लाल बाल और गोरी त्वचा वाले लोगों में त्वचा कैंसर का खतरा ज्यादा माना जाता है. यह रिसर्च अभी पक्षियों पर की गई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह जानने के लिए और अध्ययन जरूरी हैं कि इंसानों में भी यही प्रक्रिया काम करती है या नहीं.
सिस्टीन कहां मिलता है?
सिस्टीन प्रोटीन से भरपूर भोजन में पाया जाता है. यह सप्लीमेंट के रूप में भी मिलता है, जिसे आमतौर पर एनएसी कहा जाता है. सामान्य संतुलित आहार लेने वालों में इसकी अधिकता से खतरा कम माना जाता है. इस स्टडी का मुख्य संदेश यही है कि शरीर के बाहरी रंग और पिगमेंट का संबंध हमारी अंदरूनी सेहत से भी हो सकता है. यह शोध PNAS Nexus नाम की जर्नल में प्रकाशित हुआ है.
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