क्या मेनोपॉज के बाद इम्युनिटी गिरने से बढ़ता है सर्वाइकल कैंसर का खतरा? डॉक्टर से जानें जवाब
लाइफ़स्टाइल स्वास्थ्य क्या मेनोपॉज के बाद इम्युनिटी गिरने से बढ़ता है सर्वाइकल कैंसर का खतरा? डॉक्टर से जानें जवाब
अक्सर महिलाओं को लगता है कि मेनोपॉज यानी माहवारी बंद होने के बाद उन्हें गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाने की जरूरत नहीं है. उन्हें लगता है कि पीरियड्स खत्म, तो टेंशन खत्म लेकिन गायनेकोलॉजिस्ट मधुकर भारद्वाज ने इस बारे में क्या बताया है. आइए जानते हैं.
Written byAkansha Thakur
अक्सर महिलाओं को लगता है कि मेनोपॉज यानी माहवारी बंद होने के बाद उन्हें गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाने की जरूरत नहीं है. उन्हें लगता है कि पीरियड्स खत्म, तो टेंशन खत्म लेकिन गायनेकोलॉजिस्ट मधुकर भारद्वाज ने इस बारे में क्या बताया है. आइए जानते हैं.
Akansha Thakur 25 Jan 2026 11:53 IST
Follow Us
New Update/newsnation/media/media_files/2026/01/25/cervical-cancer-hpv-risk-2026-01-25-11-52-46.jpg)
Cervical Cancer HPV Risk
अक्सर मेनोपॉज को सिर्फ पीरियड्स के रुकने से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन यह समय शरीर के अंदर कई बड़े बदलाव लेकर आता है. इनमें सबसे अहम बदलाव इम्युनिटी से जुड़ा होता है. यही कारण है कि इस दौर में महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है.
Advertisment
उम्र और इम्युनिटी का संबंध
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, गायनेकोलॉजिस्ट मधुकर भारद्वाज बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है. विज्ञान में इसे इम्यूनोसेनेसेंस कहा जाता है. इसका मतलब है कि शरीर की रक्षा प्रणाली पहले की तरह तेजी से काम नहीं कर पाती.
हार्मोनल बदलाव और शरीर पर असर
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने लगता है. इसका असर सिर्फ मूड या हड्डियों पर नहीं पड़ता. यह महिलाओं के निजी अंगों की सेहत को भी प्रभावित करता है. एस्ट्रोजन योनि के पीएच बैलेंस को सही बनाए रखने में मदद करता है. जब यह हार्मोन कम होता है, तो पीएच का संतुलन बिगड़ सकता है. इससे अच्छे बैक्टीरिया कम हो जाते हैं. यह स्थिति शरीर की पहली सुरक्षा परत को कमजोर कर सकती है.
इम्युनिटी गिरने से बढ़ता है सर्वाइकल कैंसर का खतरा?
गायनेकोलॉजिस्ट मधुकर भारद्वाज का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर अचानक नहीं होता. यह आमतौर पर हाई-रिस्क ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी एचपीवी के लंबे समय तक शरीर में रहने से विकसित होता है. अक्सर मजबूत इम्युनिटी इस वायरस को खुद ही खत्म कर देती है. परेशानी तब होती है, जब वायरस सालों तक शरीर में बना रहता है. यही स्थिति आगे चलकर कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है.
कब बढ़ जाता है खतरा?
अगर किसी महिला की इम्युनिटी पहले से कमजोर है, तो एचपीवी के टिके रहने की संभावना ज्यादा होती है. यह कमजोरी एचआईवी, अंग प्रत्यारोपण या कुछ दवाओं की वजह से हो सकती है. मेनोपॉज खुद कैंसर की वजह नहीं बनता. लेकिन उम्र और हार्मोनल बदलाव मिलकर शरीर की निगरानी प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं. इससे पुराने संक्रमण दोबारा बढ़ सकते हैं.
पुराने संक्रमण का दोबारा जागना
कई बार एचपीवी का संक्रमण जवानी में होता है. वह सालों तक शांत रहता है. उम्र बढ़ने पर जब इम्युनिटी कमजोर होती है, तो यह फिर से एक्टिव हो सकता है. इसलिए डरने की नहीं, बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है.
मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए जरूरी सलाह
1. नियमित जांच जारी रखें
पीरियड्स बंद होने का मतलब यह नहीं कि जांच की जरूरत खत्म हो गई. पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट से खतरे को समय रहते पकड़ा जा सकता है. डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए सही समय क्या है.
2. लक्षणों को हल्के में न लें
मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग, लगातार डिस्चार्ज, पेल्विक दर्द या संबंध बनाते समय दर्द जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें. जांच जरूर कराएं.
3. इम्युनिटी मजबूत रखें
डायबिटीज को कंट्रोल में रखें. खून और विटामिन की कमी न होने दें. अच्छी नींद लें. रोज थोड़ा एक्टिव रहें. धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें.
ऐसे करें बचाव
सर्वाइकल कैंसर उन बीमारियों में से है, जिन्हें रोका जा सकता है. समय पर जांच और सही जीवनशैली से जोखिम काफी हद तक कम हो सकता है. साथ ही बच्चों को एचपीवी वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करें. इससे भविष्य में बड़ी परेशानी से बचाव संभव है.
यह भी पढ़ें: मेथी का पानी उबालकर पीना चाहिए या भिगोकर? कौन होता है ज्यादा फायदेमंद जाने यहां
cervical cancer
treatment of cervical cancer
Read More
हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें!
विशेष ऑफ़र और नवीनतम समाचार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बनेंअब सदस्यता लें
Read the Next Article