ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

साइंस-टेक विदेश ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

Written byIANS

ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स से तंग आया ईयू, अमेरिका से तकनीकी निर्भरता घटाने पर कर रहा विचार

author-image

IANS 25 Jan 2026 18:10 IST

Article Image Follow Us

New UpdateEU flags,European Union,

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी शर्तों पर व्यापार करने के लिए टैरिफ के जरिए दबाव बना रहे हैं। ट्रंप अपने हिसाब से लगातार तमाम देशों को टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि यूरोपीय यूनियन के साथ-साथ दुनिया के कई देश अपनी निर्भरता अमेरिका से कम करने की योजना पर विचार कर रहे हैं।

Advertisment

दरअसल, आज के वक्त में हमारे जीवन में डिजिटल फ्रेमवर्क एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। डिजिटल जगत की ज्यादातर कंपनियां अमेरिका की देन हैं। ऐसे में अगर यह फ्रेमवर्क टूटता है, तो कई जरूरी सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं।

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही वैश्विक राजनीति में एक तनाव पैदा कर दिया है। दुनिया के कई देश राजनीति और व्यापार से लेकर तकनीक के क्षेत्र में डायनेमिक्स चेंज करने पर विचार कर रहे हैं। ग्रीनलैंड के लिए ट्रंप की बार-बार की मांगों और टैरिफ की धमकियों ने ईयू को अपने पुराने साथी के साथ संबंधों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

यूरोप का ज्यादातर डेटा अमेरिकी क्लाउड सर्विसेज पर स्टोर होता है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों के पास यूरोप के दो-तिहाई से ज्यादा मार्केट का मालिकाना हक है, जबकि ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी अमेरिका-बेस्ड एआई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आगे हैं।

यूरोपियन पार्लियामेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईयू 80 फीसदी से ज्यादा डिजिटल प्रोडक्ट्स, सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के लिए नॉन-ईयू देशों पर निर्भर करता है।

ईयू के लॉ-मेकर्स अमेरिका से इतर अलग तकनीकी निर्भरता पर जोर दे रहे हैं। ईयू के कानून बनाने वाले गूगल, ओपन एआई, माइक्रोसॉफ्ट जैसी तमाम कंपनियों के बदले अन्य सोर्स या देसी जुगाड़ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

स्वीडन के राइज रिसर्च इंस्टीट्यूट की सीनियर रिसर्चर और लुंड यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर जोहान लिनाकर के अनुसार यूरोप की लापरवाही ने इस समूह को एक ऐसे स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां यूरोप का ज्यादातर हिस्सा अमेरिका के बिग टेक के दिए गए क्लाउड पर चल रहा है।

उन्होंने कहा, “पब्लिक सेक्टर और सरकारें दशकों से एक कम्फर्ट सिंड्रोम से जूझ रही हैं। यहां कंजर्वेटिव प्रोक्योरमेंट कल्चर, रिस्क से बचने की आदत और जैसा है, वैसा ही रहने को तरजीह देने का रिवाज रहा है। अब फर्क यह है कि भूराजनीतिक माहौल जोखिम का एक नया पहलू जोड़ता है, इनोवेशन की कमी और बढ़ती लाइसेंस कॉस्ट से भी आगे है।”

थिंक-टैंक बर्टेल्समैन स्टिफ्टंग का अनुमान है कि यूरोस्टैक को अपना लक्ष्य हासिल करने में लगभग एक दशक और 300 बिलियन यूरो लगेंगे। अमेरिकी ट्रेड ग्रुप चैंबर ऑफ प्रोग्रेस (जिसमें अमेरिका की कई दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं) के एक कम कंजर्वेटिव अनुमान के अनुसार, पूरी लागत 5 ट्रिलियन यूरो से कहीं ज्यादा होगी।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Read More हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें! विशेष ऑफ़र और नवीनतम समाचार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बनेंअब सदस्यता लें

Read the Next Article

View Original Source