कौन हैं शुभांशु शुक्ला? उस भारतीय एस्ट्रोनॉट की कहानी जिसने सितारों तक पहुंचाया देश का नाम, अशोक चक्र से किया गया सम्मानित
Hindi India HindiWho Is Shubhanshu Shukla Gets Ashok Chakra Achivements Of Indian Astronaut Iss कौन हैं शुभांशु शुक्ला? उस भारतीय एस्ट्रोनॉट की कहानी जिसने सितारों तक पहुंचाया देश का नाम, अशोक चक्र से किया गया सम्मानित
शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और भारत के अंतरिक्ष इतिहास का एक चमकता हुआ नाम हैं. उन्होंने जून 2025 में इतिहास रचते हुए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बनने का गौरव हासिल किया.
Published: January 25, 2026 7:59 PM IST
By Tanuja Joshi
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Shubhanshu Shukla Gets Ashok Chakra: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने न केवल देश की सुरक्षा में योगदान दिया, बल्कि भारत के अंतरिक्ष इतिहास में भी अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया. जून 2025 में उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचकर इतिहास रच दिया और ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने. इस असाधारण उपलब्धि और अंतरिक्ष कार्यक्रम में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मान अशोक चक्र प्रदान किया गया.
शुभांशु शुक्ला का सफर एक फाइटर पायलट से अंतरिक्ष यात्री बनने तक का है, जो कड़ी मेहनत, अनुशासन और असाधारण साहस की मिसाल पेश करता है. भारतीय वायुसेना में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को उड़ाया और एक बेहद कुशल टेस्टेड पायलट के रूप में पहचान बनाई. उनकी यही तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती उन्हें भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों की सूची तक ले गई.
SpaceX के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से भरी थी उड़ान
26 जून 2025 को शुभांशु शुक्ला ने अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से SpaceX के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए उड़ान भरी. यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग का भी प्रतीक था. ISS पर अपने प्रवास के दौरान उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी गतिविधियों में हिस्सा लिया, जिससे भविष्य के भारतीय मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण डेटा और अनुभव प्राप्त हुआ.
हालांकि अंतरिक्ष में जाने वाले वे दूसरे भारतीय हैं. उनसे पहले 1984 में राकेश शर्मा सोवियत संघ के मिशन के तहत अंतरिक्ष गए थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने का गौरव पहली बार किसी भारतीय को मिला, और वह नाम शुभांशु शुक्ला का है. यह उपलब्धि भारत की तकनीकी प्रगति और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
ISS पर बिताए गए दिनों के दौरान शुभांशु शुक्ला ने यह भी साबित किया कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री विश्व स्तरीय मिशनों में नेतृत्व और जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह सक्षम हैं. उनकी शांत निर्णय क्षमता, जोखिम भरे हालात में सटीक सोच और तकनीकी समझ ने उन्हें वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में सम्मान दिलाया.
अशोक चक्र से सम्मानित किया जाना यह दर्शाता है कि शुक्ला की उपलब्धि केवल वैज्ञानिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी है. उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है. खासकर उन युवाओं के लिए, जो आसमान से आगे सितारों तक पहुंचने का सपना देखते हैं. शुभांशु शुक्ला आज उस नए भारत का प्रतीक हैं, जो सीमाओं से आगे सोचता है और अंतरिक्ष में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है.
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Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
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