मैनेजर को 1 साल सिखाया कैसे होता है काम! फिर उसने ही नौकरी से निकाला, जब फंसी तो दे डाला यह ऑफर
Hindi India HindiStartup Company Taught Her Manager How To Work For A Year Then He Fired Her And When She Was Trapped She Offered Him This मैनेजर को 1 साल सिखाया कैसे होता है काम! फिर उसने ही नौकरी से निकाला, जब फंसी तो दे डाला यह ऑफर
एक स्टार्टअप कर्मचारी को खुद के बनाए ऑटोमेटेड सिस्टम के कारण नौकरी से निकाल दिया गया. उसकी 'बहन जैसी' मैनेजर ने काम सीखकर उसे हटाया और अब उसे ही फ्रीलांसर के रूप में काम करने का ऑफर दिया है.
Published: January 12, 2026 8:00 PM IST
By Satyam Kumar
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सांकेतिक चित्र
कॉर्पोरेट जगत में वफादारी और रिश्तों की अहमियत क्या है? इस सवाल पर सोशल मीडिया साइट रेडिट (Reddit) के ‘r/OfficePolitics’ ग्रुप में एक नई बहस छिड़ गई है. एक स्टार्टअप कर्मचारी ने अपने साथ हुए ‘धोखे’ की कहानी साझा की है, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या दफ्तर में किसी को अपना मानना सबसे बड़ी भूल हो सकती है.
मैनेजर को ‘बहन’ मानकर सिखाया काम
इस कहानी की शुरुआत एक गहरे भरोसे के साथ हुई थी. कर्मचारी अपनी मैनेजर के काफी करीब था और उसे अपनी बड़ी बहन की तरह मानता था. इसी भरोसे के चलते उसने पिछले 10 महीनों में मेहनत से बनाए अपने ऑटोमेटेड सिस्टम की बारीकियां उसे प्यार से समझाईं. उसने स्टेप-बाय-स्टेप अपनी मैनेजर को वह सब कुछ सिखाया जो उस काम को आसान बनाता था.

reddit user post
काम आसान होते ही थमाया ‘टर्मिनेशन लेटर’
जैसे ही मैनेजर को सिस्टम समझ में आ गया, रिश्तों की अहमियत अचानक खत्म हो गई. मैनेजर ने बड़ी ही शालीनता से उसे बताया कि बजट की कमी के कारण उसकी भूमिका खत्म की जा रही है और अब वह (मैनेजर) खुद उसकी जिम्मेदारियां संभालेंगी. जिस कर्मचारी ने अपनी काबिलियत से कंपनी के घंटों के काम को मिनटों में समेटा था, उसे ही बेकार समझकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
‘बहन’ ने दिया फ्रीलांसिंग का ऑफर
नौकरी छीनने के बाद मैनेजर ने उसे एक बड़ा ऑफर दिया. उसने कहा कि वह साल में दो बार फ्रीलांसर के तौर पर उसका काम रिव्यू करने के लिए आ सकता है. यह ऑफर उस कर्मचारी के लिए घाव पर नमक छिड़कने जैसा था. कर्मचारी का कहना है कि उसे नई नौकरी ढूंढने में दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जिस तरह से उसे इस्तेमाल करके फेंका गया, उस धोखे ने उसे अंदर तक तोड़ दिया है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘कॉर्पोरेट वफादारी’ पर बहस
यह पोस्ट वायरल होते ही रेडिट यूजर्स दो गुटों में बंट गए. कुछ लोगों ने सहानुभूति जताते हुए कहा कि ऑफिस में कोई दोस्त नहीं होता, वहां सिर्फ स्वार्थ होता है. वहीं कुछ एक्सपर्ट्स ने सलाह दी कि उसे इस फ्रीलांसिंग ऑफर को ठुकरा देना चाहिए, क्योंकि ऑटोमेटेड सिस्टम को मेंटेन करना किसी नौसिखिए के बस की बात नहीं है और जल्द ही मैनेजर मुसीबत में फंसने वाली है. जाते-जाते बता दें कि यह मामला एक बड़ा सबक है कि स्टार्टअप कल्चर में जहां ‘टीम एक परिवार है’ जैसे जुमले इस्तेमाल किए जाते हैं, वहां असलियत कितनी कड़वी है. अपनी स्किल्स को इतना पारदर्शी बनाना कि आपकी जगह कोई और ले ले, अक्सर पेशेवर जोखिम बन जाता है. इस कर्मचारी की कहानी आज के युवाओं को प्रोफेशनल बाउंड्री (Professional Boundary) सेट करने की चेतावनी दे रही है.
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Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
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