झवेरी बाजार का बदला मिजाज:10% एडवांस का दौर बीता, अब पूरे भुगतान पर ही बुक हो रहे हैं सोने-चांदी के गहने - Zaveri Bazaar's Mood Changes: The Era Of 10% Advance Is Over, Now Gold And Silver Jewellery Are Being Booked
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सोने और चांदी की कीमतों में प्रतिदिन होते उतार-चढ़ाव ने पुरानी कारोबारी परंपर को बदलाव आ रहा है। यह बदलाव सोने-चांदी के थोक बाजार की खरीदारी से लेकर रिटेल ज्वलेर्स की खरीदारी तक देखने को मिल रहा है। मुंबई के झवेरी बाजार के ज्वेलर्स का कहना है कि , वर्तमान समय में सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों की वजह से कारोबार के पारंपरिक तरीकों को बदलना पड़ा है। वर्तमान समय में कीमतों में अस्थिरता होने की वजह से अब सराफा बाजार में सोने और चांदी की खरीदारी के लिए पूरा भुगतान देकर माल दिया जा रहा है।
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आंशिक भुगतान नहीं पूरे भुगतान पर हो रहे हैं सौदे
बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार जैन कहते हैं, कारोबारी आशिंक भुगतान पर सौदा नहीं कर रहे हैं। बाजार ने इस जोखिम से बचने के लिए नए कारोबारी तरीकों को अपना लिया है। इससे पहले मुंबई के झवेरी बाजार और अन्य थोक सराफा बाजारों में पहले 10 से 20 प्रतिशत अग्रिम भुगतान लेकर आर्डर बुक किया जाता था। क्योंकि पहले सोने और चांदी की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव होता था। ग्राहक और कारोबारी आपसी सहमति से इसे समायोजित कर लेते थे। लेकिन पिछले कुछ महिनों में कीमतों में असमान्य तेजी और अस्थिरता देखी जा रही है। जिसकी वजह से अब थोक बाजार में सौदे के लिए पूरा यानी 100 प्रतिशत भुगतान देकर माल दिया जा रहा है।
जोखिम से बचने के लिए अब 100 प्रतिशत का भुगतान
सराफा बाजार के होलसेल एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश बाफना बताते हैं, वैश्विक अनिश्चितता भरे इस माहौल में कीमतें भी अनिश्चित बन गई हैं। जिसकी वजह से अब ऑर्डर का पूरा भुगतान करने के बाद ही माल दिया जा रहा है। वर्तमान समय में सोने के दाम एक ही दिन में 3 से 4 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक ऊपर-नीचे हो रहे हैं, वहीं चांदी में 10 से 15 हजार रुपये प्रति किलो तक का उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ऐसे में कोई 10 से 20 प्रतिशत राशि देकर सौदा करता है, तो कीमतों में बदलाव होने पर किसी एक पक्ष को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसी जोखिम से बचने के लिए अब 100 प्रतिशत का भुगतान कर सौदा करना पड़ रहा है।
जितना ऑर्डर उतना माल उठा रहे हैं ज्वेलर्स
चांदनी ज्वेलर्स के मुकेश जैन कहते हैं, ज्वेलर्स के पास जितना ऑर्डर ग्राहकों की से आ रहा है, वे उतना ही माल बाजार से ले रहे हैं। उदाहरण के लिए ज्वेलर के पास शादी ब्याह की वजह से 15 ऑर्डर सोने के आभूषण बनाने के है, जिनका वजन अलग-अलग है, तो ज्वेलर्स उतना ही सोना और चांदी थोक बाजार से ले रहे हैं, जितना आभूषणों में इस्तेमाल होने वाला है। वर्तमान समय में बड़े स्तर पर स्टॉक नहीं किया जा रहा है। मुकेश कहते हैं, आभूषण निर्माण की मजदूरी भले ही पहले की तरह काम पूरा होने के बाद ली जा रही है, लेकिन उसमें लगने वाले सोने और चांदी की पूरी कीमत पहले से ही ग्राहकों से जमा करवाई जा रही है।
चांदी के बर्तनों और मूर्तियों में उधारी का चलन बंद
सिल्वर इम्पोरियम के राहुल मेहता कहते हैं, चांदी के थोक बाजार में चांदी के बर्तन और मूर्तियां भी भुगतान करने के बाद दुकानदों को दी जा रही हैं। जबकि इससे पहले बर्तन और मूर्तियों में उधार का चलन था। ज्वेलर्स का कहना है कि जब तक सोने-चांदी की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक कारोबार में इसी तरह से पूरा भुगतान होने के बाद सौदा होगा।