पश्चिम बंगाल में एसआईआर:अब तक 11472 अवैध मतदाता मिले, नदिया में सबसे ज्यादा: राज्य सरकार ने जारी किया आंकड़ा - West Bengal Sir Over 11,000 Illegal Voters Identified So Far State Government Releases Data News In Hindi

पश्चिम बंगाल में एसआईआर:अब तक 11472 अवैध मतदाता मिले, नदिया में सबसे ज्यादा: राज्य सरकार ने जारी किया आंकड़ा - West Bengal Sir Over 11,000 Illegal Voters Identified So Far State Government Releases Data News In Hindi

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पश्चिम बंगाल में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत में गर्माहट तेज है। ये गर्माहट राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) लेकर भी है। इसका बड़ा कारण है कि चुनाव को लेकर जहां एक ओर राजनीतिक पार्टियों के बीच बयानबाजी तेज है। तो दूसरी ओर एसआईआर को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच तनातनी देखने को मिल रही है। इसी बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने  राज्य में चल रहे एसआईआर को लेकर अवैद मतदाताओं का आंकड़ा जारी किया। सरकार ने मंगलवार को बताया कि राज्य में चल रहे एसआईआर के दौरान अब तक 11,472 अवैध मतदाता पहचान लिए गए हैं।

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इन अवैध मतदाताओं में सबसे अधिक संख्या नादिया जिले की है, जबकि बांकुरा और कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में अब तक कोई अवैध मतदाता नहीं मिला है। राज्य सरकार ने यह डेटा साझा किया। हालांकि अभी तक चुनाव आयोग ने इस पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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मतदाता सूची की चल रही जांच
बता दें कि एसआईआर के तहत राज्य भर में मतदाता सूची की साफ-सफाई और गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। अब तक 9,30,993 मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी है और उनकी जानकारी ऑनलाइन अपलोड कर दी गई है। मतदाता सूची से हटाए जाने वाले अवैध मतदाताओं की पहचान राज्य सरकार के कर्मचारी, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के तहत अब तक कुल 65,78,058 नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें से 32,49,091 नोटिस पहले ही भेजे जा चुके हैं।

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कौन से जिला में कितने अवैध मतदाता जिला / क्षेत्र अवैध मतदाता संख्या नादिया 9,228 बांकुरा 0 कोलकाता (दक्षिणी हिस्सा) 0 मालदा 15 मुर्शिदाबाद 68 उत्तर 24 परगना 147 दक्षिण 24 परगना 69 कोलकाता (उत्तरी हिस्सा) 54 हावड़ा 26 हुगली 989 पूर्वी मिदनापुर 2 पश्चिम मिदनापुर 105 पुरुलिया 44 पूर्वी बर्धमान 167 बीरभूम 264 अलीपुरद्वार 9 कालिम्पोंग 65 झरग्राम 3 पश्चिम बर्धमान 4

एसआईआर बना राजनीतिक विवाद का कारण, कैसे?
गौरतलब है कि राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है। इसका बड़ा कारण है कि एक ओर विपक्ष का कहना है कि यह फर्जी मतदाताओं की पहचान करने में मदद करेगी, जबकि शासक तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रक्रिया के तरीके पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़े बहस को और बढ़ा सकते हैं, खासकर जब अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।

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क्या कहता है, डाटा? 
पहले चरण के बाद प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची (16 दिसंबर) में कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ हो गई थी, यानी राज्य भर में 58 लाख नाम हटाए गए। इसमें से हटाने के कारणों में मृत्यु, स्थायी प्रवासन, डुप्लीकेशन और गणना फॉर्म न जमा करना शामिल था। ड्राफ्ट में 1.83 लाख मतदाताओं को फर्जी/घोस्ट के रूप में चिह्नित किया गया था।

वहीं बात अगर दूसरे चरण की प्रक्रिया की करें तो इसमें 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई की जा रही है। इसमें 1.36 करोड़ मतदाता जिनमें तर्कसंगत विसंगतियां पाई गई हैं और लगभग 31 लाख मतदाता जिनकी रिकॉर्ड में मैपिंग नहीं है, को शामिल किया गया है।

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