12 Year Old Daughter Says She Doesnt Want Mother S Life,12 साल की बेटी ने मां की जिंदगी देखकर कहा-‘मैं उनकी जैसी लाइफ नहीं जीना चाहती’, एक्सपर्ट ने समझाया क्‍यों ? - 12 year old daughter sees her mothers life and says i don t want to live the same life expert explains why - Family News

12 Year Old Daughter Says She Doesnt Want Mother S Life,12 साल की बेटी ने मां की जिंदगी देखकर कहा-‘मैं उनकी जैसी लाइफ नहीं जीना चाहती’, एक्सपर्ट ने समझाया क्‍यों ? - 12 year old daughter sees her mothers life and says i don t want to live the same life expert explains why - Family News

माता-पिता की जिंदगी का बच्चों पर गहरा असर पड़ता है। अगर पेरेंट्स अपनी लाइफ में किसी तरह का प्रेशर या दबाव झेलते हैं, तो बच्चे कहीं न कहीं इसे अपने मन में गांठ बांध लेते हैं और सोचते हैं क‍ि ‘खुद के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं होने देंगे’। ऐसा ही कुछ हुआ एक बारह साल की बच्ची के साथ, जिसने मां की जिंदगी को देखकर तय किया कि वह उनकी जैसी जिंदगी नहीं जीना चाहती। लेकिन आखिर उसने ऐसा क्‍या देखा अपनी मां की ज‍िंदगी में और उसे देखकर पीड‍ियाट्र‍िशयल डॉक्‍टर माधवी भारद्धाज ने क्‍यों कहा क‍ि ऐसी ज‍िंदगी नहीं जीनी है। चल‍िए जानते हैं व‍िस्‍तार से।

(सभी तस्‍वीरें-सांकेत‍ि‍क हैं)

12 साल की हो गई बेटी और घर का कुछ काम नहीं करती

12 साल की हो गई बेटी और घर का कुछ काम नहीं करती

पीडियाट्रिशियन डॉक्टर माधवी भारद्धाज बताती हैं कि हाल ही में एक मां ने उन्हें बताया कि उनकी बेटी बारह साल की हो गई है, लेकिन वह बिल्कुल भी किचन का काम नहीं करना चाहती। अगर उससे सिर्फ पानी का गिलास लेने को कहा जाए, तो वह उस पर भी चिढ़ जाती है।’

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नहीं करना मुझे घर का काम क्‍योंक‍ि

नहीं करना मुझे घर का काम क्‍योंक‍ि

वे आगे बताती हैं कि मां की यह बात सुनकर उन्होंने बच्ची से बात की। काफी देर समझाने के बाद बच्ची ने बताया कि उसने नोटिस किया है कि उसकी मम्मी सुबह से शाम तक किचन में लगी रहती हैं। 10 साल का भाई है, पापा हैं, हम सब हैं। हम सब थककर घर आते हैं, लेकिन शायद मम्मी हमसे भी ज्यादा थकी होती हैं, फिर भी आते ही किचन में लग जाती हैं। मम्‍मी रात में सबसे लास्‍ट में सोती हैं और फ‍िर सुबह सबसे पहले जाग जाती हैं। मुझे ऐसी लाइफ नहीं चाह‍िए।’ Image-Istock

ताक‍ि बेटी को जिम्मेदारी न उठानी पड़े

ताक‍ि बेटी को जिम्मेदारी न उठानी पड़े

पेरेंट्स को यह समझना जरूरी है कि हमारे बच्चों की साइकोलॉजी कैसे घर के माहौल से प्रभावित होती है। यह बच्ची अच्छी तरह समझती है कि मम्मी दिन-रात काम करती हैं, और इसलिए वह यह काम खुद नहीं करना चाहती। यही कारण है कि वह किचन में जाना पसंद नहीं करती, ताकि उसे यह सब जिम्मेदारी न उठानी पड़े।

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क‍िचेन में काम करना बुरी बात नहीं है

क‍िचेन में काम करना बुरी बात नहीं है

डॉक्टर कहती हैं कि किचेन में काम करना बुरी बात नहीं है। यह एक जरूरी लाइफ स्‍क‍िल है। समझिए कि आज से 30 साल पहले घर की व्यवस्था इस तरह थी कि पुरुष बाहर काम करते थे और महिलाएं घर संभालती थीं। हालांकि, आज काम का ड‍िवीजन अलग-अलग तरीके से हो सकता है। संभव है कि पुरुष किचेन में काम करना पसंद करें और महिलाएं बाहर काम कर रही हों। बच्चे दोनों मिलकर पालन-पोषण कर रहे हैं।

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यहां देख‍िए पूरा वीड‍ियो

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बच्‍चों की ऐसी परवर‍िश न करें

बच्‍चों की ऐसी परवर‍िश न करें

चाइल्‍ड स्‍पेशल‍िस्‍ट अंत में कहती हैं क‍ि इसीलिए पेरेंट्स और दादा-दादी को यह समझना चाहिए कि बड़े होने के बाद बच्चों के पास बहुत अधिक तनाव आएगा। प्‍लीज उन्हें इस तरह के साइकोलॉजिकल बैगेज देकर बड़ा न करें। हमारी बेटियां और बेटे दोनों को सभी जरूरी स्किल्स सीखनी चाहिए, ताकि बड़े होकर वे जिम्मेदार और बराबरी से भाग लेने वाले एडल्‍ट बन सकें।

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