सेक्टर-150 में खनन का खेल:नियम कागजों में कैद...जमीन पर मूकदर्शक सिस्टम, युवराज हादसे की जगह भी अवैध खोदाई - Excavation Against Rules At Site Of Yuvraj Accident In Greater Noida Sector-150

सेक्टर-150 में खनन का खेल:नियम कागजों में कैद...जमीन पर मूकदर्शक सिस्टम, युवराज हादसे की जगह भी अवैध खोदाई - Excavation Against Rules At Site Of Yuvraj Accident In Greater Noida Sector-150

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सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की कार जिस निर्माणाधीन स्थल के पास गिरी। वह अनियंत्रित खनन किया गया है। बेसमेंट की खुदाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है। न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी संकेत और न ही रोशनी की समुचित व्यवस्था।

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यही हाल सेक्टर-150 के अन्य निर्माण स्थलों का भी है। जहां गहरे गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं। जो किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। वहीं कार्रवाई के लिए अधिकृत खनन विभाग की नियमों की किताब में सब कुछ दर्ज है, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें लागू कराने वाला तंत्र फिलहाल मूकदर्शक बना हुआ है। विज्ञापन विज्ञापन
 

सेक्टर-150 में बहुमंजिला इमारतों और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के नाम पर हो रहे अंधाधुंध खनन ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां कई ऐसे प्लॉट हैं। जहां तय मानकों से कहीं अधिक गहराई तक खुदाई की गई है। दिन ही नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में भी डंपरों की आवाजाही लगातार जारी रहती है। घटना स्थल वाले प्लॉट से खोदाई करने के बाद इसकी मिट्टी कहां ले जाई। अधिकारियों को भी नहीं पता है।



नियमों के अनुसार नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बहुमंजिला इमारतों के लिए बेसमेंट निर्माण से पहले भू-तकनीकी सर्वे (जियो-टेक्निकल सर्वे), स्ट्रक्चरल डिजाइन की स्वीकृति और खनन की अधिकतम गहराई का स्पष्ट निर्धारण अनिवार्य होता है। सामान्यतः बेसमेंट की खुदाई उतनी ही गहराई तक की जा सकती है। जितनी स्वीकृत नक्शे और भवन उपविधियों में अनुमति दी गई हो। साथ ही निकाली गई मिट्टी के निस्तारण के लिए खनन विभाग से परमिट लेना और रॉयल्टी जमा करना भी जरूरी होता है। इसके अलावा खुदाई के दौरान आसपास की इमारतों, सड़कों और भूमिगत ढांचे की सुरक्षा के लिए शोरिंग, रिटेनिंग वॉल और ड्रेनेज जैसी व्यवस्थाएं करना भी नियमों में शामिल है।

सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल और आसपास के प्लॉटो में बेसमेंट के लिए खोदाई में जमीनी हकीकत इन नियमों से बिल्कुल उलट दिखाई देती है। कई प्रोजेक्ट्स में स्वीकृत गहराई से कहीं ज्यादा खुदाई की गई है। बेसमेंट को दो या तीन मंजिल तक नीचे ले जाने के लिए भारी मशीनों से लगातार मिट्टी निकाली जा रही है। यह मिट्टी बिना किसी वैध चालान के डंपरों में भरकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में डाल दी जाती है।

रात के अंधेरे में होती है खोदाई
स्थानीय गांव के निवासियों और सोसाइटी में रहने वाले लोगों का आरोप है कि रोजाना दर्जनों डंपर यहां से गुजरते हैं। लेकिन न तो खनन विभाग की चेकिंग होती है और न ही परिवहन या पुलिस की ओर से कोई प्रभावी निगरानी है। जब विभाग की ओर से नियम स्पष्ट हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं होती। खनन विभाग, प्राधिकरण और संबंधित एजेंसियों के बीच मिलीभगत इसकी बड़ी वजह है। बिना वैध अनुमति के मिट्टी उठाने और उसे बेचने का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है। जिसमें बिल्डर, ठेकेदार और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ है। 

इसी कारण दिनदहाड़े और रात के अंधेरे में अवैध खुदाई बेखौफ होकर जारी रहती है। रात के समय कार्रवाई न हो पाने के पीछे एक और कारण स्टाफ की कमी और निगरानी तंत्र की कमजोरी भी है। लोगों ने मांग की है कि पूरे सेक्टर-150 में हुए खनन कार्यों का विशेष ऑडिट कराया जाए। यह जांच हो कि कहां-कहां स्वीकृत मानकों से ज्यादा खुदाई की गई, कितनी मिट्टी निकाली गई और उसका निस्तारण कहां किया गया। साथ ही, जिन अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत से यह सब हुआ, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

स्टॉफ की कमी का रोना रोता है विभाग
खनन विभाग के पास न तो पर्याप्त फील्ड स्टाफ है और न ही ऐसे संसाधन। जिससे 24 घंटे निगरानी की जा सके। सीसीटीवी और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग भी बेहद सीमित है। इसका फायदा उठाकर ठेकेदार रात में भारी मशीनें चलाते हैं और मिट्टी को बिना किसी रोक-टोक के बाहर भेज देते हैं।

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