पाकिस्तान की रेमिटेंस वित्त वर्ष- 2025 में रिकॉर्ड 38.3 अरब डॉलर, बढ़ती निर्भरता पर अर्थशास्त्रियों की चेतावनी

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कारोबार पाकिस्तान की रेमिटेंस वित्त वर्ष- 2025 में रिकॉर्ड 38.3 अरब डॉलर, बढ़ती निर्भरता पर अर्थशास्त्रियों की चेतावनी

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पाकिस्तान की रेमिटेंस वित्त वर्ष- 2025 में रिकॉर्ड 38.3 अरब डॉलर, बढ़ती निर्भरता पर अर्थशास्त्रियों की चेतावनी

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IANS 14 Jan 2026 17:50 IST

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New UpdatePakistan’s remittances hit record $38.3 bn in FY25, economists warn of rising dependence

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशों में काम कर रहे पाकिस्तानियों द्वारा भेजी गई रेमिटेंस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एफवाई25 में रेमिटेंस 38.3 अरब डॉलर रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है।

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रेमिटेंस में इस तेज उछाल से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिला है और ऐसे समय में घरेलू खपत बढ़ाने में मदद मिली है, जब देश की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है।

हालांकि, डेली टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब विदेशों से आने वाली रेमिटेंस देश के वस्तु निर्यात से भी ज्यादा हो गई है। एफवाई-25 में पाकिस्तान का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट केवल मामूली बढ़त के साथ करीब 32.3 अरब डॉलर तक ही पहुंच सका।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह स्थिति पाकिस्तान की आर्थिक संरचना में गहरे असंतुलन की ओर इशारा करती है, जहां व्यापार और उद्योग से होने वाली कमाई की तुलना में विदेशों से भेजा गया पैसा कहीं अधिक अहम भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रेमिटेंस का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा के खर्चों में उपयोग हो जाता है, न कि दीर्घकालिक निवेश में। इससे अल्पकाल में परिवारों को सहारा मिलता है और अर्थव्यवस्था में गतिविधि बनी रहती है, लेकिन इससे उद्योगों को मजबूती, निर्यात में विस्तार या उत्पादकता में सुधार नहीं हो पाता।

लंबे समय में रेमिटेंस पर अत्यधिक निर्भरता से वास्तविक विनिमय दर ऊंची बनी रह सकती है, जिससे घरेलू उत्पाद वैश्विक बाजार में कम प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं और व्यापार घाटा बढ़ सकता है।

इस बढ़ती निर्भरता के सामाजिक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। लंबे समय तक विदेश में रोजगार करने से परिवारों पर दबाव पड़ता है, खासकर बच्चों और जीवनसाथियों पर जो देश में ही रहते हैं। जिन इलाकों में रेमिटेंस आय का प्रमुख स्रोत है, वहां युवा स्थानीय स्तर पर कौशल विकसित करने, व्यवसाय शुरू करने या देश में ही अवसर तलाशने के बजाय विदेश जाने को प्राथमिकता देने लगते हैं, जिससे स्थानीय आर्थिक गतिविधि कमजोर होती है।

इसके अलावा, रेमिटेंस का असमान क्षेत्रीय वितरण सामाजिक और आर्थिक असमानता को और बढ़ा सकता है।

राजनीतिक स्तर पर भी इसके असर देखे जा रहे हैं। रेमिटेंस पर निर्भर परिवार निजी स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा लेते हैं, जिससे सरकार पर सार्वजनिक सेवाओं में सुधार का दबाव कम हो जाता है। विश्लेषकों के अनुसार, इससे नीतिगत ढिलाई आ सकती है और जरूरी संस्थागत सुधारों की गति धीमी पड़ सकती है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रेमिटेंस बेहद मूल्यवान है और यह विदेशों में रह रहे लाखों पाकिस्तानियों की मेहनत और त्याग को दर्शाती है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि इसे आर्थिक सुधारों का स्थायी विकल्प नहीं बनने दिया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

डीएससी

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