भारत के रीजनल एविएशन मार्केट में अपनी पैठ जमाने को तैयार रूस, 'विंग्स इंडिया 2026' में प्रदर्शित करेगा दो यात्री विमान
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भारत के रीजनल एविएशन मार्केट में अपनी पैठ जमाने को तैयार रूस, 'विंग्स इंडिया 2026' में प्रदर्शित करेगा दो यात्री विमान
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भारत के रीजनल एविएशन मार्केट में अपनी पैठ जमाने को तैयार रूस, 'विंग्स इंडिया 2026' में प्रदर्शित करेगा दो यात्री विमान
IANS 25 Jan 2026 17:25 IST
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(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। रूसी विमान कंपनियां भारत में बुधवार से हैदराबाद में शुरू होने वाले विंग्स इंडिया 2026 में अपने यात्री विमान इल्युशिन आईएल-114-300 और सुपरजेट एसजे-100 को प्रदर्शित करेगी।
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यह दिखाता है कि रूसी कंपनियां, भारतीय को एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में देख रही हैं और पश्चिमी देशों को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं।
द संडे गार्जियन की रिपोर्ट में बताया गया कि यह कदम मॉस्को के भारत के तेजी से बढ़ते क्षेत्रीय विमानन बाजार में केवल विमान बिक्री के बजाय दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी के माध्यम से प्रवेश करने के इरादे का संकेत देता है।
वर्तमान में भारतीय बाजारों में पश्चिमी देशों की एयरबस और बोइंग जैसी कंपनियों का दबदबा है, लेकिन सरकार की ओर से टियर 2 और टियर 3 शहरों में एयरपोर्ट्स बनाने से देश में छोटे विमानों की मांग भी काफी तेजी से बढ़ रही है।
रूसी विमान इल्युशिन आईएल-114-300 एक 68 सीटर विमान है, जो कि छोटे रनवे और कठिन परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है।
इसे एटीआर 72-600 और डैश-8 क्यू400 जैसे विमानों के प्रतिस्पर्धी के रूप में पेश किया जा रहा है, जो वर्तमान में भारत के क्षेत्रीय मार्गों पर प्रमुखता से उड़ान भरते हैं।
इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, बड़े पैमाने पर उत्पादन स्थिर होने के बाद इस विमान की कीमत 20 मिलियन डॉलर से 35 मिलियन डॉलर के बीच हो सकती है, जो मौजूदा टर्बोप्रॉप विकल्पों के लगभग बराबर है।
सुपरजेट एसजे-100, जिसमें लगभग 87 से 98 यात्री बैठ सकते हैं, क्षेत्रीय जेट बाजार के उच्च-स्तरीय सेगमेंट को लक्षित करता है।
यह एम्ब्रेयर के ई-जेट परिवार के छोटे विमानों से प्रतिस्पर्धा करता है और इसकी कीमत 30 मिलियन डॉलर से 36 मिलियन डॉलर के बीच होने की उम्मीद है।
हालांकि, दोनों रूसी विमानों की कीमत पश्चिमी विकल्पों की तुलना में बहुत कम नहीं है, लेकिन इनका असली आकर्षण इनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले औद्योगिक अवसरों से जुड़े हुए हैं।
रूसी निर्माता भारत में स्थानीय विनिर्माण, असेंबली और सोर्सिंग के प्रस्तावों के साथ इन विमानों को पेश कर रहे हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत का निर्णय केवल आयात पर आधारित होने के बजाय एक व्यापक औद्योगिक निर्णय में बदल जाता है।
विमान निर्माण और दीर्घकालिक सहायता से इंजीनियरिंग, सटीक विनिर्माण, विमानन और रखरखाव में उच्च-कुशल वाले रोजगार सृजित होते हैं और दशकों तक चलने वाले आपूर्तिकर्ता पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में मदद मिलती है।
यदि रूसी नागरिक विमान भारतीय बाजार में प्रवेश करते हैं, तो रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल एक प्रमुख फोकस क्षेत्र होने की उम्मीद है।
विमान का अधिकांश आर्थिक मूल्य डिलीवरी के बाद स्पेयर पार्ट्स, अपग्रेड, प्रशिक्षण और इंजन ओवरहाल के माध्यम से उसके 25 से 30 वर्षों के परिचालन जीवन से निकलने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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