ईरानी डेरा:25 साल के आतंक का अंत, राजू ईरानी आखिर कौन? जानें अपराध की दुनिया से गिरफ्तारी तक पूरी कहानी - Bhopal News: Who Exactly Is Raju Irani, The Leader Of The Notorious Irani Gang?
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देश के 14 राज्यों में लूट, ठगी और फर्जी अफसर बनकर वारदात को अंजाम देने वाले भोपाल के कुख्यात ईरानी गैंग के सरगना राजू ईरानी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता है। राजू ईरानी के खिलाफ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित देश के 14 राज्यों में 20 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। लूट की रकम से राजू ने अरबों की संपत्ति खड़ी की। उसे महंगी लग्जरी कारों और अरबी नस्ल के घोड़ों का शौक रखने वाला कुख्यात अब 17 जनवरी तक पुलिस की रिमांड पर है। आइए जानते हैं 25 साल के आपराधिक साम्राज्य के अंत की पूरी कहानी।
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पुलिस कार्रवाई में पकड़े गए आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला
क्या है ईरानी डेरा
भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र की अमन कॉलोनी में स्थित ईरानी डेरा लंबे समय से अपराध का गढ़ माना जाता रहा है। यहां करीब 70 मकान हैं और पुलिस सूत्रों के अनुसार इनमें से 50 से अधिक परिवारों के सदस्य किसी न किसी आपराधिक गतिविधि में लिप्त हैं। ईरानी डेरा वर्षों से पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था। 27-28 दिसंबर की दरम्यानी रात पुलिस टीम की बड़ी छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस प्रशासन की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद गैंग का सरगना राजू ईरानी महिलाओं को ढाल बनाकर फरार हो गया था। तब से अब तक प्रशासन की ओर डेरे को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए कई कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। अब गैंग के सरगना राजू ईरानी को सूरत से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया है।
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कुख्यात ईरानी गैंग का सरगना राजू ईरानी।
- फोटो : अमर उजाला
कौन है राजू ईरानी
गिरफ्तार अपराधी का असली नाम आबिद अली पिता हसमत अली है, लेकिन अपराध की दुनिया में वह राजू ईरानी के नाम से जाना जाता है। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश सहित छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल समेत देश के 14 राज्यों में 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें लूट, ठगी, फर्जी पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर अपराध करना, धोखाधड़ी और पुलिस पर हमले जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। राजू ईरानी पर आरोप है कि उसने वर्षों तक एक संगठित गिरोह के जरिए देश के बड़े शहरों में सैकड़ों वारदात को अंजाम दिया। वह खुद कई मामलों में सामने नहीं आया, बल्कि पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करता रहा। पुलिस के मुताबिक वह लूट और ठगी से अर्जित रकम का हिसाब-किताब और बंटवारा भी खुद तय करता था।

राजू ईरानी गिरफ्तार।
- फोटो : अमर उजाला
सूरत में साढ़ू के घर ली पनाह
भोपाल पुलिस की लगातार दबिश के बाद फरार राजू ईरानी को लगातार गिरफ्तारी का डर था। इससे बचने के लिए उसने सूरत में अपने साढ़ू के घर पनाह ली। भोपाल पुलिस को उसके लोकेशन इनपुट मिलते रहे, जिसके आधार पर सूरत पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे भोपाल लाकर निशातपुरा थाने में रखा गया और जिला अदालत में पेश कर 17 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया। पुलिस अब उससे गैंग के नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन, फर्जी जमानत और अन्य राज्यों में दर्ज मामलों को लेकर गहन पूछताछ कर रही है।

अमन कॉलोनी ईरानी डेरा।
- फोटो : अमर उजाला
पिता के जीवित रहते ही संभाल ली थी गैंग की कमान
पहले इस डेरे की कमान मुन्ने ईरानी के हाथ में थी। उसकी मौत के बाद उसका शागिर्द राजू ईरानी यहां का सरगना बन गया। ईरानी डेरा न केवल भोपाल, बल्कि देश के कई राज्यों में सक्रिय बदमाशों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका था। यहीं से गैंग के सदस्यों को ट्रेनिंग दी जाती थी और वारदातों की रणनीति तय होती थी। राजू ईरानी ने वर्ष 2000 में अपने पिता हसमत ईरानी के जीवित रहते ही गैंग की कमान संभाल ली थी। वर्ष 2006 में उसके खिलाफ भोपाल में पहला आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ। इसके बाद से उसने प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लगभग 25 वर्षों तक अपराध की दुनिया में अपना वर्चस्व बनाए रखा। इस दौरान उसने अरबों रुपये की अवैध संपत्ति खड़ी की। वह महंगी लग्जरी कारों और अरबी नस्ल के घोड़ों का शौकीन बताया जाता है। पुलिस के मुताबिक गैंग के आंतरिक विवादों को सुलझाने के लिए वह समानांतर अदालत भी चलाता था, जिसके फैसले सभी को मानने होते थे।

ईरानी गैंग का सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
अलग-अलग भेष हर तरह के अपराध करता था गैंग
राजू ईरानी और उसका गैंग बड़े शहरों में अलग-अलग भेष धारण कर अपराध करता था। कभी पुलिस अधिकारी, कभी सीबीआई या सेल्स टैक्स अफसर बनकर लोगों को डराकर लूट और ठगी की जाती थी। भोपाल और आसपास के इलाकों में वह जानबूझकर कम वारदातें करता था, ताकि स्थानीय पुलिस की नजरों से बचा रहे। गैंग के सदस्यों को ऐसी ट्रेनिंग दी जाती थी कि पकड़े जाने पर वे किसी साथी का नाम उजागर न करें। यहां तक कि कई बार वे अपना नाम और पता तक बदलकर बताते थे। यदि कोई सदस्य गिरफ्तार होता, तो उसकी जमानत, मुकदमे का खर्च और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी गैंग की लूट की रकम से उठाई जाती थी। यही कारण था कि गैंग के सदस्य राजू ईरानी को अपना सरदार मानते थे।