आसमान में 26000 फीट की ऊंचाई पर भारतीय सेना तैनात करेगी तीसरी आंख, दुश्मन पर रहेगी 24 घंटे नजर, क्या है सोलर पावर सर्विलांस ड्रोन?

आसमान में 26000 फीट की ऊंचाई पर भारतीय सेना तैनात करेगी तीसरी आंख, दुश्मन पर रहेगी 24 घंटे नजर, क्या है सोलर पावर सर्विलांस ड्रोन?

Hindi Gallery Hindi What Is Solar Powered Spy Drone Indian Army Surveillance Platform High Altitude Pseudo Satellite Mapss Programme 8264658 आसमान में 26000 फीट की ऊंचाई पर भारतीय सेना तैनात करेगी तीसरी आंख, दुश्मन पर रहेगी 24 घंटे नजर, क्या है सोलर पावर सर्विलांस ड्रोन?

Solar-powered spy drone: सोलर पॉवर से चलने वाला जासूसी ड्रोन ऊंचे हिमालय से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान जैसे इलाकों में ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन पर नजर रखेगा.

Published date india.com Last updated on - January 12, 2026 8:05 AM IST

email india.com By Shivendra Rai email india.com twitter india.com

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सोलर पावर से चलने वाले जासूसी ड्रोन

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भारतीय सेना देश की हजारों किलोमीटर लंबी सीमा की निगरानी के लिए एक खास सोलर पावर से चलने वाले जासूसी ड्रोन की तैनाती करने जा रही है. ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारतीय सशस्त्र बल सोलर पावर से चलने वाले सर्विलांस ड्रोन की तैनाती कर रहे हैं.

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किसने बनाए हैं खास जासूसी ड्रोन?

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सोलर पावर से चलने वाले मानवरहित एरियल सिस्टम के लिए भारतीय सेना ने 168 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए हैं. बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (NRT) ने यह मीडियम एल्टीट्यूड पर्सिस्टेंट सर्विलांस सिस्टम (MAPSS) बनाए हैं.

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26,000 फीट की ऊंचाई से नजर

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दूरदराज के इलाकों में भारत की विशाल सीमाओं की निगरानी इस खास ड्रोन की मदद से आसान हो जाएगी. ये खास ड्रोन 26,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर लगातार 24 घंटे से ज्यादा समय तक उड़ान भर सकता है.

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कम धूप में भी पूरा काम

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मीडियम एल्टीट्यूड पर्सिस्टेंट सर्विलांस सिस्टम सौर ऊर्जा से चलने वाला खास ड्रोन है. इसे भारी बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती. ये कम धूप वाले दिनों में भी अपना काम जारी रख सकता है. इंडियन आर्मी के साथ ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी इस ड्रोन का परीक्षण किया है.

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हिमालय से लेकर रेगिस्तान तक नजर

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सोलर पॉवर से चलने वाला जासूसी ड्रोन ऊंचे हिमालय से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान जैसे इलाकों में ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन पर नजर रखेगा. इसका थर्मल सिग्नेचर बेहद कम है इसलिए यह दुश्मन की नजर में भी नहीं आता.

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आर्मी सोलर-पावर्ड ड्रोन क्यों ले रही है

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दूरदराज के इलाकों में सैनिकों को गश्ती के लिए भेजना मुश्किल काम होता है. ऐसी दुर्गम जगहें जहां कम्युनिकेशन की सुविधा नहीं है वहां भी लगातार निगरानी करना जरूरी है. यही वजह है कि इंडियन आर्मी सोलर-पावर्ड ड्रोन ले रही है.

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मीडियम-एल्टीट्यूड मिशन के लिए

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MAPSS को मीडियम-एल्टीट्यूड मिशन के लिए चुना गया है. बार-बार रिफ्यूलिंग या लैंडिंग के बिना लगातार काम करने की क्षमता इसे खास बनाती है. (तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं.)

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