पैर के नीचे से नहीं... देश के इन 3 राज्यों के नीचे से खिसक रही जमीन? खतरनाक मंजर दिखाने से पहले दे रहे ये संकेत

पैर के नीचे से नहीं... देश के इन 3 राज्यों के नीचे से खिसक रही जमीन? खतरनाक मंजर दिखाने से पहले दे रहे ये संकेत

Hindi India HindiLand Slipping Away From Beneath These Three States Showing This Signs Before A Dangerous Catastrophe पैर के नीचे से नहीं... देश के इन 3 राज्यों के नीचे से खिसक रही जमीन? खतरनाक मंजर दिखाने से पहले दे रहे ये संकेत

भूजल के अत्यधिक दोहन और अनियोजित शहरीकरण के कारण भारत के कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहर धीरे-धीरे धंस रहे हैं. यदि समय रहते वाटर मैनेजमेंट और बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं किया गया, तो ये शहर भविष्य में बड़ी प्राकृतिक आपदाओं और स्थायी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं.

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Published: January 13, 2026 2:41 PM IST email india.com By Satyam Kumar email india.com twitter india.com Facebook india.com twitter india.com telegram india.com Follow Us india.com Follow Us land sinking due excessive suction of ground water सांकेतिक चित्र

क्या हो अगर जिस जमीन पर आप खड़े हैं, वह हर साल धीरे-धीरे नीचे धंसती जाए? यह कोई डरावनी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि दुनिया के कई बड़े शहरों की कड़वे हकीकत बनती जा रही है. हालिया शोधों ने एक ऐसी खतरनाक प्रवृत्ति की ओर इशारा किया है, जो आने वाले समय में बड़ी तबाही का सबब बन सकती है.

दुनिया भर में धंसती जा रही है जमीन

दुनिया के नक्शे पर मौजूद कई व्यस्त शहरी केंद्र धीरे-धीरे नीचे की ओर झुक रहे हैं. सड़कें, इमारतें और पूरे के पूरे मोहल्ले जो कभी मजबूती से खड़े थे, अब हर साल कुछ सेंटीमीटर नीचे जा रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अब केवल जलवायु परिवर्तन की चेतावनी नहीं, बल्कि एक सक्रिय प्रक्रिया बन चुकी है. एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक, हर जगह भूमि धंसने की समस्या पैर पसार रही है.

जकार्ता की डरावनी मिसाल

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता को दुनिया के सबसे तेजी से डूबते शहरों में गिना जाता है. शहर का लगभग आधा हिस्सा अब समुद्र तल से नीचे जा चुका है. दशकों तक भूजल (Ground Water) के अत्यधिक दोहन ने मिट्टी की पकड़ को कमजोर कर दिया है. भारी निर्माण और कंक्रीट के बोझ ने इस नाजुक जमीन पर और दबाव डाल दिया है. यहां बाढ़ अब कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक नियमित खतरा बन गई है.

भारत के महानगरों में भी खतरे की घंटी

जमीन के खिसकने या धसने की चिंता सिर्फ वैश्विक शहरों तक सीमित नहीं है. भारत के महानगरों में भी अब वही चेतावनी भरे संकेत मिलने लगे हैं. नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU) के एक स्टडी के अनुसार, भारत के कई शहरों में जमीन धंसने की दर मापने योग्य और चिंताजनक है. यह शहरी नियोजन और पानी के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता उन शहरों की सूची में है जिस पर वैज्ञानिकों की कड़ी नजर है. रिपोर्टों के अनुसार, शहर के कुछ हिस्से हर साल 2.8 सेंटीमीटर की दर से धंस रहे हैं. सुनने में यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन कुछ ही दशकों में यह बड़ी तबाही ला सकता है. मानसून के दौरान यहाँ बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है और पुराना होता बुनियादी ढांचा इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है.

चेन्नई: दक्षिण भारत में चेन्नई एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है. रिपोर्ट्स की माने तो यहां के कुछ इलाके कोलकाता से भी तेज गति से धंस रहे हैं. भूजल (Ground Water) का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल यहां सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है. शहरी विस्तार ने जमीन पर दबाव को और बढ़ा दिया है, जिससे भारी बारिश के दौरान पानी की निकासी मुश्किल हो जाती है और शहर जलमग्न होने लगता है.

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अहमदाबाद: पश्चिमी भारत में अहमदाबाद की स्थिति भी डरावनी है. यहां के कुछ इलाकों में जमीन धंसने की रफ्तार सालाना 4 सेंटीमीटर से भी अधिक दर्ज की गई है. बिना किसी टिकाऊ जल प्रबंधन के हो रहे शहरी विकास ने जमीन की परतों को कमजोर कर दिया है. यदि यही स्थिति जारी रही, तो भविष्य में अहमदाबाद को विनाशकारी बाढ़ और ढांचागत नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.

क्या है इस तबाही का असली कारण?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस संकट के पीछे सबसे बड़ी वजह भूजल का अंधाधुंध दोहन है. घरों, खेतों और उद्योगों के लिए जब जमीन के नीचे से पानी खींचा जाता है, तो वहां खाली जगह बन जाती है. समय के साथ मिट्टी इन खाली जगहों में समा जाती है और जमीन धंसने लगती है. इसके अलावे भारी इमारतों का बोझ इस कमजोर जमीन को और नीचे धकेलता है. वहीं, जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली अनियमित बारिश इस स्थिति को और बिगाड़ रही है.

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सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें

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