क्या है एम्फीबियस विमान की खासियत? भारतीय नौसेना के लिए यह क्यों है जरूरी- 5 प्वाइंट्स में जानें यहां

क्या है एम्फीबियस विमान की खासियत? भारतीय नौसेना के लिए यह क्यों है जरूरी- 5 प्वाइंट्स में जानें यहां

Hindi India HindiAmphibious Aircraft Unique Feature Why Is It Important For The Indian Navy Know All Important Facts In Five Points क्या है एम्फीबियस विमान की खासियत? भारतीय नौसेना के लिए यह क्यों है जरूरी- 5 प्वाइंट्स में जानें यहां

Indian Navy Amphibious Aircraft: भारतीय नौसेना 1953 के बाद पहली बार एम्फीबियस विमानों को लीज पर शामिल कर रही है, जो अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और मलक्का स्ट्रेट में भारत की निगरानी क्षमता को दोगुना कर देंगे.

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Published: January 12, 2026 7:35 PM IST email india.com By Satyam Kumar email india.com twitter india.com Facebook india.com twitter india.com telegram india.com Follow Us india.com Follow Us Indian Navy Amphibious Aircraft Amphibious Aircraft (इमेज AI से है)

Indian Navy Amphibious Aircraft: भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लेने जा रही है. लगभग सात दशकों के लंबे इंतजार के बाद, भारतीय समुद्र में फिर से एम्फीबियस विमान (Amphibious aircraft) यानी पानी और जमीन दोनों पर उतरने वाले विमानों की गूंज सुनाई देगी. रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो सीधे तौर पर चीन की समुद्री विस्तारवादी नीति को एक कड़ा जवाब माना जा रहा है.

नौसेना का मास्टरस्ट्रोक

हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका और समुद्री चुनौतियों को देखते हुए नौसेना ने 4 फिक्स्ड-विंग एम्फीबियस विमानों के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (RFI) जारी की है. इस लीज की खास बात यह है कि ये विमान वेट लीज (Wet Lease) पर लिए जाएंगे. इसका मतलब है कि विमान के साथ-साथ क्रू, मेंटेनेंस और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भी संबंधित कंपनी की होगी. इससे नौसेना को बिना किसी बुनियादी ढांचे के निर्माण के तुरंत युद्धक क्षमता मिल जाएगी.

5 प्वाइंट्स में समझें

रणनीतिक अहमियत:

एम्फीबियस विमान बिना रनवे के सीधे समंदर की लहरों पर लैंड कर सकते हैं. भारत कीमैनलेंड से 1200 किलोमीटर दूर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जैसे संवेदनशील इलाकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. मलक्का स्ट्रेट पर पहरा: दुनिया का 40% व्यापार और चीन का 80% तेल आयात मलक्का स्ट्रेट से गुजरता है. इन विमानों की तैनाती से भारत इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकेगा, जिससे युद्ध की स्थिति में दुश्मन की घेराबंदी आसान होगी. लॉजिस्टिक और रेस्क्यू पावर: ये विमान केवल लड़ाई के लिए नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन में भी माहिर हैं. समुद्र के बीच में फंसे जहाजों, मेडिकल इमरजेंसी या सुदूर द्वीपों तक रसद पहुंचाने में इनका कोई मुकाबला नहीं है. निगरानी और पेट्रोलिंग: लंबी समुद्री सीमा, तस्करी और समुद्री आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नौसेना को ऐसे परिंदों की जरूरत थी जो घंटों पानी के ऊपर रहकर जासूसी कर सकें और जरूरत पड़ने पर वहीं उतर सकें. 1953 के बाद पहली बार: भारत ने आखिरी बार 1953 में इस तरह के विमानों का उपयोग किया था. अब आधुनिक तकनीक वाले ये विमान एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) के तहत भारत को हिंद महासागर का असली ‘बॉस’ बनाने में मदद करेंगे.

भारतीय नौसेना का यह कदम न केवल हमारी निगरानी क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य के समुद्री युद्ध कौशल में भारत को एक निर्णायक बढ़त भी दिलाएगा.

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Satyam Kumar

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सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें

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