खत्म होने वाली रूस और अमेरिका के बीच की परमाणु संधि, नई होड़ शुरू होने से डरी दुनिया, 50 सालों में पहली बार होगा ऐसा
Hindi World HindiStrategic Arms Reduction Treaty Between Russia And America Set To End In Weeks Fears Of Renewed Nuclear Arms Race खत्म होने वाली है रूस और अमेरिका के बीच की परमाणु संधि, नई होड़ शुरू होने से डरी दुनिया, 50 सालों में पहली बार होगा ऐसा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोई नई संधि करने की इच्छा नहीं दिखाई है. डोनाल्ड ट्रंप तो सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अमेरिका को नए परमाणु परीक्षण करने चाहिए.
Updated: January 10, 2026 2:48 PM IST
By Shivendra Rai
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US and Russia nuclear treaty: अमेरिका और रूस के बीच लंबे समय से तनाव का माहौल है. यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका और रूस के रिश्ते सबसे खराब दौर में हैं. अब दोनों देशों के बीच आखिरी न्यूक्लियर संधि भी कुछ ही हफ़्तों में खत्म होने वाली है. इसे लेकर पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों में डर है कि परमाणु हथियारों की नई वैश्विक दौड़ शुरू हो सकती है.
क्या है स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी
1963 में तब के सोवियत संघ और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों के अप्रसार को लेकर एक संधि हुई थी. इसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा. साल 2010 में साइन की गई नई स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (न्यू START) 6 फरवरी को खत्म होने वाली है. यह संधि दोनों देशों को जमीन, हवा या पानी के अंदर किसी नए परमाणु परीक्षण पर रोक लगाती है.
अगर यह खत्म हो जाती है तो लगभग 50 सालों में पहली बार होगा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी न्यूक्लियर शक्तियां अपने हथियारों पर बिना किसी औपचारिक रोक के काम करेंगी. इस समय दुनिया के लगभग 87 प्रतिशत न्यूक्लियर वॉरहेड अमेरिका और रूस के पास ही हैं. रूस इस मामले में टॉप पर है जिसके पास 5 हजार से ज्यादा परमाणु हथियार हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संधि खत्म होती है तो दोनों देश नए सिरे से सीमाओं पर परमाणु हथियारो की आक्रामक तैनाती कर सकते हैं. यही नहीं नए परीक्षणों की भी आशंका है. अमेरिका और रूस अगर फिर से परमाणु हथियारों की रेस में शामिल हुए तो दुनिया के अन्य देशों को रोकना मुश्किल हो जाएगा.
2021 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी को 5 साल के लिए बढ़ा दिया था. लेकिन, अब इसे और नहीं बढ़ाया जा सकता. संधि के प्रावधानों के अनुसार, इसे सिर्फ एक बार ही बढ़ाने की इजाजत थी.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कोई नई संधि करने की इच्छा नहीं दिखाई है. डोनाल्ड ट्रंप तो सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अमेरिका को नए परमाणु परीक्षण करने चाहिए. हाल ही में एक साक्षात्कार में ट्रंप ने 2010 के न्यू START समझौते के बारे में कहा कहा कि अगर यह खत्म हो जाता है तो हो जाए. ट्रंप ने कहा कि हम एक बेहतर समझौता करेंगे. उन्होंने कहा कि चीन के पास दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर फोर्स है. उसे भी न्यू START की जगह लेने वाली संधि में शामिल किया जाना चाहिए.
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बता दें कि पहला न्यू START समझौता 1991 में साइन किया गया था और इसके बाद स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर वॉरहेड्स की संख्या कम कर दी गई थी. 1993 में START II का मकसद स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर हथियारों को काफी कम करना था. इसमें इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) पर मल्टीपल वॉरहेड्स (MIRVs) पर बैन लगाना और रूसी SS-18 मिसाइलों को खत्म करना शामिल था.
बाद में अमेरिका के एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल (ABM) संधि से हटने से यह पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया. रूस ने 2002 में इसे औपचारिक रूप से खारिज कर दिया था. आखिर में 2010 में न्यू START-3 ने इसकी जगह ले ली.
अमेरिका और रूस दोनों ही इस समय क्रेन में युद्ध पर ध्यान दे रहे हैं. दोनों देशों ने न्यू START संधि को नए सिरे से लागू करने पर कोई बात नहीं की है. सितंबर 2025 में पुतिन ने सुझाव दिया था कि संधि को और 12 महीनों के लिए बढ़ाया जाए. उन्होंने भविष्य की बातचीत में ब्रिटेन और फ्रांस के न्यूक्लियर हथियारों को भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया जिसे दोनों देशों ने खारिज कर दिया. अमेरिका ने पुतिन के प्रस्ताव पर कभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया.
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Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
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