उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी को नई रफ्तार, योगी सरकार ने 6 नए कॉरिडोर को दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश राज्य उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी को नई रफ्तार, योगी सरकार ने 6 नए कॉरिडोर को दी मंजूरी
प्रदेश में सड़क नेटवर्क को संतुलित और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य सरकार ने उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले छह नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है.
Written byDheeraj Sharma
प्रदेश में सड़क नेटवर्क को संतुलित और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य सरकार ने उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले छह नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है.
Dheeraj Sharma 15 Jan 2026 14:37 IST
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प्रदेश में सड़क नेटवर्क को संतुलित और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य सरकार ने उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले छह नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है. इन कॉरिडोर के निर्माण से प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों में आवागमन आसान होगा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी.
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पहली बार उत्तर-दक्षिण दिशा पर फोकस
अब तक प्रदेश में बने अधिकतर एक्सप्रेसवे और हाईवे पूर्व-पश्चिम दिशा में रहे हैं. यह पहली बार है जब उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी को केंद्र में रखकर इतनी व्यापक योजना तैयार की गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष इन प्रस्तावों का प्रस्तुतिकरण किया जा चुका है, जिस पर उनकी सहमति मिल गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से तैयार की गई कार्ययोजना को जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की तैयारी है.
आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
इन नए कॉरिडोर के बनने से न केवल लंबी दूरी का सफर आसान होगा, बल्कि उद्योग, व्यापार, कृषि और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने से स्थानीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे.
श्रावस्ती से प्रयागराज तक पहला कारीडोर
पहला कॉरिडोर- इकौना (श्रावस्ती)-अयोध्या-सुल्तानपुर-प्रयागराज को जोड़ता है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 262 किलोमीटर है. इसमें दो लेन, चार लेन और छह लेन के मिश्रित खंड शामिल हैं. यह मार्ग पूर्वांचल और विंध्य एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा.
कुशीनगर-वाराणसी और नेपाल सीमा से प्रयागराज
दूसरा कॉरिडोर- कुशीनगर से वाराणसी तक करीब 220 किलोमीटर लंबा है, जिससे पूर्वांचल क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा.
तीसरा कॉरिडोर- भारत से नेपाल सीमा (पिपरी) से प्रयागराज तक प्रस्तावित है, जिसकी लंबाई लगभग 295 किलोमीटर है. यह अंतरराष्ट्रीय सीमा से धार्मिक और प्रशासनिक केंद्रों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा.
लखीमपुर-बांदा और बरेली-ललितपुर कॉरिडोर
चौथा कॉरिडोर- लखीमपुर से बांदा तक लगभग 502 किलोमीटर लंबा है, जो अवध और बुंदेलखंड को जोड़ेगा.
पांचवां कॉरिडोर- बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर तक करीब 547 किलोमीटर का है, जो गंगा, यमुना और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जुड़कर लंबी दूरी के यातायात को आसान बनाएगा.
पीलीभीत से हरपालपुर तक छठा कॉरिडोर
छठा और अंतिम कॉरिडोर पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र से उरई-हरपालपुर तक लगभग 514 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है। इसमें कई हिस्सों को चार लेन में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे वनांचल और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिलेगा.
प्रदेश के विकास की नई धुरी
छह नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर न सिर्फ सड़क नेटवर्क को मजबूत करेंगे, बल्कि प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास की नींव भी रखेंगे. सरकार की यह पहल आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को लॉजिस्टिक और आर्थिक हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
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