परिवार ने मरा हुआ मान लिया था, तीन दशकों बाद 70 साल का आदमी SIR के लिए डॉक्यूमेंट्स लेने पहुंचा घर

परिवार ने मरा हुआ मान लिया था, तीन दशकों बाद 70 साल का आदमी SIR के लिए डॉक्यूमेंट्स लेने पहुंचा घर

देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम चल रहा है, SIR कुछ राज्यों में हो चुकी, कुछ में काम चल रहा है, कुछ में आने वाले कुछ महीनों में शुरू होगा. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के लिए डॉक्यूमेंट्स लेने के अपने घरों को कई दशकों बाद लौट रहे लोगों की भावुक कहानियां सामने आ रही हैं, इसी कढ़ी में एक और ऐसी ही सामने आई है, जहां लगभग तीन दशकों की चुप्पी के बाद, एक 70 साल का आदमी, जिसे उसके परिवार ने मरा हुआ मान लिया था, वह उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित मुजफ्फरनगर जिले के अपने होमटाउन खतौली लौटा. वह पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के लिए डॉक्यूमेंट्स लेने आया था, जहाँ वह पिछले कई सालों से रह रहा है.

शरीफ अहमद (79), जो 1997 से ‘लापता’ थे, जब पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी करके पश्चिम बंगाल चले गए थे, 29 दिसंबर को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के लिए डॉक्यूमेंट्स लेने अपने होमटाउन पहुँचे, उनके भतीजे वसीम अहमद ने न्यूज एजेंसी को बताया. वसीम ने कहा, “हमने इतने सालों में उन्हें खोजने की बहुत कोशिश की, पश्चिम बंगाल भी गए और उनकी दूसरी पत्नी द्वारा बताए गए पते पर भी गए, लेकिन सारी कोशिशें नाकाम रहीं.” उन्होंने आगे कहा, “दशकों तक कोई संपर्क न होने के कारण, उनकी चार बेटियों और परिवार ने मान लिया था कि वह अब जीवित नहीं हैं.”

शरीफ ने कहा कि वह बंगाल में SIR एक्सरसाइज से जुड़े डॉक्यूमेंट्स लेने अपने होमटाउन लौटे, जिसकी वजह से उन्हें अपने गाँव से दोबारा संपर्क करना पड़ा. अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने पाया कि उनके पिता और भाई सहित उनके कई करीबी परिवार के सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहे. वसीम ने कहा कि इस भावुक मिलन से परिवार में खुशी का माहौल था. उन्होंने कहा, “इतने सालों बाद उन्हें देखना हम सभी के लिए एक बहुत ही भावुक अनुभव था.” छोटी सी यात्रा के बाद, शरीफ SIR की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले लौट गए, जहाँ वह अपने परिवार के साथ रहते हैं.

SIR की प्रक्रिया का पूरा काम दूर से देखने में भी और करने में भी बेहद मुश्किल है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कितने बिछड़े लोग अपने परिवार से मिले, जिनके तजुर्बों के बाद ऐसा लगता है कि ये सारी प्रक्रियाओं के दौरान की जा रही मेहनत का वाकई में फल मिल गया है. बिछड़े अपनों को मिलने से बेहतर दुनिया में कुछ भी नहीं है.

फ़रहा फ़ातिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2015 में LIVE India में इंटर्नशिप से की. प्रारंभिक दौर में ही उन्होंने जामिया ... और पढ़ें

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