वैज्ञानिकों का कमाल:बना दिया मेटल फ्री इलेक्ट्रिक मोटर, 80% कम होगा वजन, हल्के होंगे इलेक्ट्रिक वाहन - World First Metal Free Electric Motor Carbon Nanotube Details
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ट्रांसपोर्टेशन की तकनीक में सबसे बड़ी चुनौती गाड़ियों का वजन कम करना है। चाहे इलेक्ट्रिक कार हो, ड्रोन हो या अंतरिक्ष यान, वजन जितना कम होगा, बैटरी उतनी ही ज्यादा चलेगी और वाहन को तेज बनाया जा सकेगा। इस दिशा में दक्षिण कोरिया के कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KIST) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी सफलता हासिल की है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
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मोटर से हुई तांबे की छुट्टी
अब तक इलेक्ट्रिक मोटर्स को चलाने के लिए तांबे (Copper) के कॉइल्स का इस्तेमाल होता रहा है। तांबे में करंट के वजह से मैग्नेटिक फील्ड जनरेट होता है जिससे मोटर काम करता है। लेकिन तांबे और बाहरी मेटल केसिंग के वजह से मोटर का वजन काफी भारी हो जाता है। इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों का वजन बढ़ता है और परफॉर्मेंस घट जाती है। हालांकि, KIST के वैज्ञानिकों की टीम ने तांबे की जगह एक खास मटीरियल का इस्तेमाल कर बेहद हल्की मोटर तैयार की है।
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इस इलेक्ट्रिक मोटर को तैयार करने में कार्बन नैनोट्यूब (CNTs) का इस्तेमाल किया गया है। यह लोहे से कहीं ज्यादा मजबूत और तांबे से कहीं ज्यादा हल्के होते हैं। इस कार्बन नैनोट्यूब मोटर का वजन साधारण कॉपर कॉयल मोटर से लगभग 80% तक कम है। वैज्ञानिकों ने जब इस मेटल-फ्री मोटर का ट्रायल किया, तो पाया कि यह न केवल बिजली को बेहतर तरीके से मैनेज कर रही है, बल्कि इसकी कार्यक्षमता भी बढ़ गई है।
कैसे मुमकिन हुआ ये आविष्कार
कार्बन नैनोट्यूब मोटर को बनाने में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि इन्हें बनाते समय कुछ मेटल पार्टिकल्स इनमें रह जाते थे, जिससे इनकी परफॉरमेंस गिर जाती थी। KIST के वैज्ञानिकों ने लिक्विड क्रिस्टल तकनीक का इस्तेमाल करके एक नया प्यूरिफिकेशन प्रोसेस विकसित किया। इस प्रोसेस से कार्बन नैनोट्यूब की बनावट को नुकसान पहुंचाए बिना इम्प्योरिटिज को बाहर निकाल दिया गया। इसका नतीजा ये हुआ कि कंडक्टिविटी में 133% का उछाल आया और मोटर का वजन 80% तक कम हो गया।
भविष्य में क्या होगा बदलाव?
यह खोज केवल कारों तक सीमित नहीं रहेगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रिक गाड़ियों को हल्का बनाया जा सकता है जिससे ये एक बार चार्ज करने पर ज्यादा दूर तक चलेंगी। इतना ही नहीं, ड्रोन और अंतरिक्ष यान का भी वजन कम किया जा सकेगा जिससे पेलोड कैपिसिटी बढ़ेगी। वहीं, रोबोट और ड्रोन में लगने वाले मोटर भी हल्के होंगे और वे ज्यादा देर तक चलेंगे। इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह खोज केवल शुरुआत है। आने वाले समय में वे बैटरी और सेमीकंडक्टर में भी इस कार्बन तकनीक का इस्तेमाल कर दुनिया को बदलने की तैयारी में हैं।
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