ये 'भूतिया' गांव 82 साल से पड़ा है वीरान, साल में खुलता है सिर्फ 12 दिन, रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान!

ये 'भूतिया' गांव 82 साल से पड़ा है वीरान, साल में खुलता है सिर्फ 12 दिन, रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान!

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क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा गांव है जहां पिछले 8 दशकों से कोई नहीं रहता? इसे 'भूतिया गांव' भी कहा जाता है, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खाली कराया गया था और आज तक वीरान है.

Published date india.com Last updated on - January 13, 2026 1:14 PM IST

email india.com By Gaurav Barar email india.com twitter india.com

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इंग्लैंड में है ये 'भूतिया गांव'

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इंग्लैंड के विल्टशायर के खूबसूरत नजारों के बीच एक ऐसा गांव स्थित है, जहां की खामोशी आज भी इतिहास की गूंज सुनाती है. हम बात कर रहे हैं इम्बर की, जिसे दुनिया 'भूतिया गांव' के नाम से जानती है. यह गांव पिछले 82 वर्षों से वीरान पड़ा है. लेकिन क्या यह वाकई में रूहानी ताकतों का बसेरा है, या इसके पीछे कोई गहरी ऐतिहासिक और सैन्य वजह है? (AI Image)

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वह एक रात, जब गांव खाली हो गया

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इम्बर की वीरानगी की कहानी साल 1943 में शुरू होती है, जब द्वितीय विश्व युद्ध अपने चरम पर था. नाजी जर्मनी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए ब्रिटिश सेना को एक सुरक्षित अभ्यास क्षेत्र की जरूरत थी. इम्बर के निवासियों को केवल एक रात का नोटिस दिया गया और उन्हें अपने घरों को छोड़कर जाने का आदेश दिया गया. (AI Image)

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ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में ये गांव

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उनसे वादा किया गया था कि युद्ध समाप्त होने के बाद उन्हें वापस बुला लिया जाएगा, लेकिन वह दिन कभी नहीं आया. आज 82 साल बीत चुके हैं, पर यह गांव आज भी ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के कड़े नियंत्रण में है. (AI Image)

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मलबे में तब्दील हो चुके हैं घर

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दशकों तक इंसानों से दूर रहने के कारण इम्बर की शक्ल पूरी तरह बदल चुकी है. कभी खिलखिलाने वाले घर आज मलबे में तब्दील हो चुके हैं. कई घरों की छतें गिर चुकी हैं और दीवारें ढह गई हैं. (AI Image)

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सैन्य अभ्यास के निशान

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सेना द्वारा किए गए अभ्यासों और भारी बमबारी ने पुराने विला और इमारतों को क्षतिग्रस्त कर दिया है. वर्तमान में यहां पुराने खंडहरों के साथ-साथ कुछ आधुनिक कंक्रीट की इमारतें भी नजर आती हैं, जिन्हें सेना ने बिना खिड़कियों के केवल फाइटिंग इन बिल्ट-अप एरिया ट्रेनिंग के लिए बनाया है. (AI Image)

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उम्मीद की किरण

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इतनी बर्बादी के बावजूद, गांव का सेंट जिल्स चर्च आज भी गर्व से खड़ा है. ग्रेड-I लिस्टेड यह ऐतिहासिक चर्च इम्बर का हृदय है. इसकी देखभाल 77 वर्षीय नील स्केल्टन कर रहे हैं, जो पिछले कई सालों से इस विरासत को सहेजने में जुटे हैं. (AI Image)

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चर्चेज कंजर्वेशन ट्रस्ट करता है काम

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चर्च के रखरखाव के लिए चर्चेज कंजर्वेशन ट्रस्ट काम करता है. चर्च में आने वाले पर्यटक दान देते हैं और वहां बिकने वाले स्मृति चिह्नों से हर साल लगभग 15,000 से 20,000 पाउंड जमा होते हैं, जिससे इस ढांचे को सुरक्षित रखा जा रहा है. (AI Image)

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पर्यटकों के लिए कब खुलते हैं दरवाजे?

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इम्बर कोई सामान्य पर्यटन स्थल नहीं है. यह इलाका साल के ज्यादातर दिनों में जनता के लिए बंद रहता है क्योंकि यहां सेना सक्रिय रूप से अभ्यास करती है. केवल साल में कुछ चुनिंदा मौकों (जैसे ईस्टर या नया साल) पर ही यहां आम लोगों को आने की अनुमति दी जाती है. इस बार 29 दिसंबर से 1 जनवरी 2026 तक इम्बर के दरवाजे पर्यटकों के लिए खोले गए हैं. (AI Image)

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वन्यजीवों का स्वर्ग

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इंसानी हस्तक्षेप न होने के कारण, इम्बर अब एक विशेष वैज्ञानिक रुचि वाला क्षेत्र बन चुका है. यहां दुर्लभ वन्यजीव और पौधों की प्रजातियां फल-फूल रही हैं. यहां आकर ऐसा महसूस होता है जैसे समय 1943 में ही थम गया हो. भले ही इसे 'भूतिया गांव' कहा जाए, लेकिन इतिहास प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह किसी रोमांचक एडवेंचर से कम नहीं है. (AI Image)

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