Alert:कम उम्र में ही क्यों कमजोर हो रही है आंखों की रोशनी? डॉक्टर ने बताए इसके तीन सबसे बड़े कारण - What Causes Eyesight Weakness In Early Age Aankh Ki Roshni Kam Hone Ke Karan
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लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने आंखों को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है। अब 5-6 साल के बच्चों में भी मायोपिया जैसी दिक्कतें बढ़ गई हैं।
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आंखों की समस्याएं
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आंखें ईश्वर का अनमोल तोहफा हैं, जिनकी मदद से हम इस दुनिया की खूबसूरती का आनंद ले पाते हैं। हालांकि इस अद्भुत आनंद से लाखों लोग वंचित रह जाते हैं। दुनियाभर में जिस तरह से आंखों से संबंधित समस्याओं का जोखिम बढ़ता जा रहा है, ये खतरा और भी बढ़ गया है।
लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने आंखों को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है। इसका उदाहरण ये है कि स्कूल जाने वाले बच्चों में भी अब नजर का चश्मा आम होता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले जहां बच्चों में नजर की समस्या 12-14 साल की उम्र के बाद दिखाई देती थी, वहीं अब 5-6 साल के बच्चों में भी मायोपिया जैसी दिक्कतें बढ़ गई हैं। इसके अलावा युवाओं में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी आंखों की रोशनी को बहुत नुकसान पहुंचा रही हैं।
अब सवाल ये है कि आखिर आंखों की बीमारियां और रोशनी कमजोर होने की समस्या इतनी आम क्यों हो गई है?
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आंखों की समस्याएं
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क्या कहते हैं डॉक्टर?
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ पियूष शर्मा कहते हैं, इसका सबसे बड़ा कारण बदलती जीवनशैली, मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल और आंखों को पर्याप्त आराम न मिल पाना है।
मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन पर लंबे समय तक देखने से आंखों की मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे आंखें जल्दी थक जाती हैं।
इसके अलावा लोगों की आउटडोर एक्टिविटी कम होना, सही पोषण न मिल पाना और नियमित रूप से आंखों की जांच न कराने के कारण भी समस्या बढ़ती जा रही है।
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मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक
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मोबाइल-कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल ठीक नहीं
नेत्र विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो बचपन में शुरू हुई आंखों की समस्याएं आगे चलकर गंभीर नेत्र रोगों का कारण बन सकती है। इतना ही नहीं आपकी रोशनी भी हमेशा के लिए जा सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार कम उम्र में आंखों की रोशनी कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी जैसी डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग है।
जब हम लंबे समय तक पास की स्क्रीन देखते हैं, तो आंखों को बार-बार फोकस बदलने में दिक्कत होती है जिससे चीजें धुंधली दिखने की समस्या हो सकती है।
लगातार स्क्रीन देखने से पलकों का झपकना भी कम हो जाता है, जिससे आंखों में सूखापन बढ़ने लगता है।
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कमजोर तो नहीं हो रही आंखों की रोशनी
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आउटडोर गतिविधि कम होना नुकसानदायक
विशेषज्ञ बताते हैं कि पहले की तुलना में अब लोगों को ज्यादातर समय बंद कमरों में या ऑफिस में बीतता है, इसका भी आंखों की सेहत पर बुरा असर होता है।
लगातार घर के अंदर रहना आंखों पर नकारात्मक असर डालता है।
आंखों के डॉक्टर बताते हैं कि आउटडोर एक्टिविटी की कमी एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से कम उम्र में बच्चों को नजर का चश्मा लगाना पड़ रहा है।
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आंखों को हेल्दी कैसे रखें
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लाइफस्टाइल की गड़बड़ी
आंखों की रोशनी कमजोर होने के पीछे गलत खानपान और बिगड़ी दिनचर्या भी जिम्मेदार है।
आहार में जंक फूड की मात्रा बढ़ गई है, जिससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। विटामिन-ए, ओमेगा-3 फैटी एसिड, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व आंखों की रोशनी बेहतर करने के लिए जरूरी माने जाते हैं। इसके अलावा नींद पूरी न होना और आंखों को पर्याप्त आराम न मिलना भी आंखों की थकान और रोशनी कमजोर होने का कारण बनता है। पोषण की कमी और अनियमित दिनचर्या से आंखों की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं, जिसका असर सीधे नजर पर पड़ता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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