Author Acharya Prashant Questions On Daughters Father S Role,मशहूर लेखक ने पिता की भूमिका परउठाएसवाल, बोले-अगर बेटियों से प्यार होता, तो उन्हें ऐसे धकेल देते? - author acharya prashant questions father s role if you loved your daughters would you push them like this - Family News
लेखक आचार्य प्रशांत अपने बेबाक विचारों के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर ही रूढ़िवादी सोच, रिश्तों और अन्य संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते हैं। इसी क्रम में हाल ही में उन्होंने बेटियों के प्रति पिता की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर पिताओं को सच में अपनी बेटियों से प्यार होता, तो क्या वे उन्हें इस तरह किसी और के साथ जीवन बिताने के लिए धकेल देते? उनके अनुसार, यह सोच बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। आखिर आचार्य प्रशांत ने ऐसा क्यों कहा, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
(सभी तस्वीरें-सांकेतिक हैं)
क्या वाकई पिताओं को अपनी बेटियों से प्यार है ?
इंस्टाग्राम वीडियो में लेखक आचार्य प्रशांत कहते हैं ‘क्या आपको अपनी बेटी से कभी सच्चा प्यार था? अगर होता, तो क्या आप उसे ऐसे धकेल देते कि ‘जा, शादी कर ले’ और वह भी सिर्फ इसलिए कि हम अपनी जिम्मेदारी से खुद को मुक्त कह सकें? ताकि हम खुद से कह सकें, ‘चलो, दो लड़कियां थीं, गंगा नहा ली, एक की तो शादी हो गई।’
Image-Acharya Prashant Facebook Page
बेटियों के माता-पिता यही कहते हैं पहली की तो हो गई शादी अब बस....
वे आगे कहते हैं ऐसा ही बोलते हैं बेटियों के बाप पहली को तो निपटा दिया, अब दूसरी भी निपट जाए, बस बैतरणी पार हो जाए।’ बिलकुल इसी भाषा में बात करते हैं वे। लेकिन सचमुच, यह प्यार की भाषा है। यह कितनी गैर-जिम्मेदाराना बात है कि आप किसी के मां-बाप हैं और उन्हें एक रिश्ते में धकेल रहे हैं। Image-pexels
शादी कोई छोटी बात नहीं होती
आचार्य कहते हैं कि शादी कोई छोटी बात नहीं होती। आप एक लड़की हैं और आपको अपना घर छोड़कर किसी और के घर जाना है। वहां की गंध अलग है, खाना-पीना अलग है, लोग अलग हैं। चेहरे, व्यवहार, रिश्ते और भी सब कुछ अलग है। और आपको बस कहा गया है- ‘जाओ, उसके घर रहो।’
Image-pexels
शादी के बाद सिर्फ घर नहीं बदलता
लेखक आचार्य प्रशांत आगे कहते हैं- दूसरे के घर जाकर भी आपको एक खास किरदार निभाना होगा और वह है आप वहां पत्नी बनेंगी, बहू बनेंगी। और फिर केवल घर नहीं बदलेगा, आपकी जिंदगी में और भी कुछ बदल जाएगा, क्योंकि अब शारीरिक संबंध शुरू होंगे।’Image-pexels
यहां देखें पूरा वीडियो
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प्रेमहीन रिश्ता क्या तनाव का कारण नहीं बनेगा
आचार्य अंत में कहते हैं माता-पिता अगर दो लोगों को एक प्रेमहीन रिश्ते में डाल देंगे, तो क्या वह तनाव और अवसाद का कारण नहीं बनेगा? आदमी-औरत बस ढो रहे हैं। खरा आदमी, असली इंसान वही है, जो न खुद बर्दाश्त करता है कि कोई उसे दबाए या बांधे, और न ही वह किसी और की जिंदगी को बंधन में डालना चाहता है।
Image-Istock
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई सूचना पूरी तरह इंस्टाग्राम रील पर आधारित है। एनबीटी इसकी सत्यता और सटीकता की जिम्मेदारी नहीं लेता है।