Bangladesh Bnp Jamat Hindu Violance,बांग्लादेश में या BNP या जमात-ए-इस्लामी बनाए सरकार, हिंदुओं से होती रहेगी हिंसा, 2001-2006 की खतरनाक हकीकत जानें - bangladesh election possibility of bnp-jamaat return anti-hindu violence reminds 2001 period - Asian countries News

Bangladesh Bnp Jamat Hindu Violance,बांग्लादेश में या BNP या जमात-ए-इस्लामी बनाए सरकार, हिंदुओं से होती रहेगी हिंसा, 2001-2006 की खतरनाक हकीकत जानें - bangladesh election possibility of bnp-jamaat return anti-hindu violence reminds 2001 period - Asian countries News
ढाका:

पाकिस्तान हो या बांग्लादेश, इन देशों में अल्पसंख्यकों का रहना हमेशा से मुश्किल रहा है। इस्लामिक कट्टरपंथी नहीं चाहते कि इन देशों में कोई किसी और मजहब के लोग सांस भी ले सके। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान जमात-ए-इस्लामी ने पाकिस्तान सेना का साथ दिया था। इस समय भी बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार किया था। उस समय अल-बद्र और अल-शम्स जैसे संगठनों ने बंगाली हिंदूओं के नरसंहार में हिस्सा लिया था। ये संगठन, हिंदुओं को इस्लाम और पाकिस्तान का दुश्मन मानते थे। इस दौरान बांग्लादेश में कई गांवों से हिंदुओं को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया, हिंदुओं के खिलाफ अभियान चलाए गये, लड़कियों महिलाओं से बलात्कार किए गये। चार भद्रसन नरसंहार को भला कौन भूल सकता है, जहां जमात ने आतंक का नंगा नाच किया था। वहां दर्जनों हिंदुओं को एक साथ मार दिया गया था और पूरे गांव को जलाकर राख कर दिया गया था।

जथिभंगा नरसंहार दूसका उदाहरण है, जब कुछ ही घंटों के अंदर हजारों बंगाली हिंदुओं की हत्या कर दी गई थी। हालांकि आजादी के बाद बांग्लादेश की नई सरकार ने इन घटनाओं की जांच के लिए विशेष न्यायाधिकरण की स्थापना की और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन फिर बांग्लादेश में राजनीति उठापटक का दौरा शुरू हो गया और जमात का राजनीतिक वर्चस्व बढ़ता चला गया। जमात-ए-इस्लामी मुख्य धारा की पार्टी बनकर जड़ें जमाने लगी। हालांकि शेख हसीना ने कई वर्षों तक कंट्रोल में रखने की कोशिश की, लेकिन अब जबकि ये बेलगाम हैं और शेख हसीना की पार्टी के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है तो फिर से हिंदुओं की सुरक्षा खतरे में आ गई है।
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बांग्लादेश में हिंदुओं से हिंसा क्यों हो सकता है सामान्य?
बांग्लादेश में 2001 में जमात-ए-इस्लामी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के साथ गठबंधन के साथ सत्ता में लौटची थी और उसके बाद पूरे देश में हिंदुओं के खिलाफ अभियान शुरू हो गया। 2001 के चुनाव में हिंदुओं के खिलाफ खूब हिंसा किए गये। उस समय इंटरनेशनल मीडिया में इसकी काफी रिपोर्टिंग भी की गई थी। BNP-जमात गठबंधन के समय बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या, बलात्कार, लूटपाट, यातना घरों और पूजा स्थलों को नष्ट करने जैसी घटनाओं बिल्कुल सामान्य घटनाएं हो गईं। इतनी ज्यादा सामान्य, कि उन घटनाओं की खबरें बनना भी बंद हो गई। स्वतंत्र जांच और न्यायिक आयोगों ने पुष्टि की कि हजारों अल्पसंख्यक परिवारों को हिंसा, विस्थापन और मौत का सामना करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट की एक न्यायिक जांच में पाया गया कि BNP-जमात के 26,000 से ज्यादा नेता और समर्थक, जिनमें मंत्री और सांसद भी शामिल थे, वो हिंदुओं से अत्याचार, बलात्कार, हत्या, लूटपाट जैसी घटनाओं में शामिल थे। BNP और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं ने हिंदुओं के घरों पर हमला किया, उनके घरों में घुसकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती थी। चुनाव के दौरान पोलिंग स्टेशनों तक पहुंचने से उन्हें रोका गया और उनके खिलाफ धार्मिक फतवे जारी किए गये। बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए 2001 से 2006 के बीच का समय सबसे ज्यादा विनाशकारी था। सरकारी मशीनरी का उनसे हिंसा में इस्तेमाल किया गया। पुलिस जैसे मूकदर्शक थी। उन्हें हिंदुओं की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं था।

बांग्लादेश में लौट सकता है 2001-2006 का वक्त
बांग्लादेश का सेक्युलर संविधान धर्म या जाति की परवाह किए बिना सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा की गारंटी देता है। फिर भी, चरमपंथी सरकारों के तहत अल्पसंख्यकों के साथ भयानक स्तर पर भेदभाव किया जाता है। इसीलिए चुनाव के बाद सत्ता में BNP आए या जमात-ए-इस्लामी आए, हिंदुओं से होने वाला भेदभाव कम नहीं होगा, बल्कि मजहबी ताकतें इसका फायदा, बांग्लादेश से हिंदुओं का नामोनिशान मिटाने के लिए कर सकते हैं। 1971 में जमात से जुड़े अत्याचारों से लेकर 2001-2006 की BNP-जमात सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ जिस तरह से हिंसा की गई, वो बताता है कि इस बार भी बांग्लादेश में ऐसा ही हो सकता है। बिना जवाबदेही और सुधार के BNP और जमात-ए-इस्लामी का सत्ता में वापस आना आतंक, विस्थापन और भेदभाव के उस दौर को फिर से शुरू करेगा। बांग्लादेश की बहुलवादी पहचान को हमेशा के लिए नष्ट कर देगा।

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