Basant Panchami 2026: कब है बसंत पंचमी? नोट कर लें तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
धर्म-कर्म Basant Panchami 2026: कब है बसंत पंचमी? नोट कर लें तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Basant Panchami 2026: हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार बसंत पंचमी बेहद विशेष माना जाता है. साल 2026 में यह पर्व किस दिन मनाया जाएगा. इस दिन देवी सरस्वती की पूजा करने से विद्या का आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते हैं इस पर्व के बारे में विस्तार से.
Written byAkansha Thakur
Basant Panchami 2026: हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार बसंत पंचमी बेहद विशेष माना जाता है. साल 2026 में यह पर्व किस दिन मनाया जाएगा. इस दिन देवी सरस्वती की पूजा करने से विद्या का आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते हैं इस पर्व के बारे में विस्तार से.
Akansha Thakur 19 Jan 2026 17:26 IST
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Basant Panchami 2026
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी सिर्फ एक त्योहार नहीं है. यह मौसम में बदलाव के नए प्रकाश का संकेत है. इस दिन हर तरफ पीले रंग की रौनक दिखाई देती है. लोग मां सरस्वती की पूजा करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं. हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में यही सवाल है कि बसंत पंचमी 22 जनवरी को मनाई जाएगी या 23 जनवरी को. चलिए आपको बताते हैं शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में.
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बसंत पंचमी 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 की शाम 06 बजकर 15 मिनट से हो रही है. इसका समापन 23 जनवरी 2026 की रात 08 बजकर 30 मिनट पर होगा. लेकिन उदया तिथि के नियम के अनुसार पर्व अगले दिन मनाना शुभ माना जाता है. इसलिए इस साल बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी. चूंकि 23 जनवरी की सुबह पंचमी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन पूजा करना शुभ माना गया है.
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
मां सरस्वती की आराधना के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है. 23 जनवरी को पूजा के लिए यह समय शुभ रहेगा.
पूजा का समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
अमृत काल: सुबह 08:45 बजे से 10:20 बजे तक
सरस्वती पूजा की आसान विधि
इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है. यह ज्ञान, शुद्धता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. सुबह जल्दी उठें और पीले वस्त्र पहनें. चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं. फिर मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. साथ में भगवान गणेश को भी विराजमान करें. कलश रखें और दीप-धूप जलाएं. पीले फूल, चंदन, केसर और अक्षत अर्पित करें. पुस्तकें, कलम या वाद्य यंत्र मां के पास रखें. बच्चों के लिए इस दिन अक्षर अभ्यास शुरू करना शुभ माना जाता है. भोग में पीले चावल, बूंदी के लड्डू या केसर का हलवा चढ़ाएं. अंत में आरती करें और ज्ञान का आशीर्वाद मांगें.
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी को नई शुरुआत का पर्व कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं. उनके वीणा वादन से सृष्टि में वाणी और संगीत का प्रसार हुआ. इसलिए यह दिन पढ़ाई, कला और रचनात्मकता से जुड़ा माना जाता है. इस दिन लोग अपने ज्ञान को मां के चरणों में समर्पित करते हैं.
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