Best Laddu For Winter,ठंड में तिल, मेथी, अलसी, गोंद या ड्राई फ्रूट के खा रहे हैं लड्डू तो ना करें ये गलतियां, हो जाएगी हालत खराब - which laddu is beneficial in winters and what mistakes to avoid during consumption - Health News
हमारे शरीर का तापमान हर मौसम में नियत यानी फिक्स्ड रहता है। करीब 37-38 डिग्री सेल्सियस यानी 97-98 डिग्री फारेनहाइट। ऐसे में जब सर्दियों में बाहर का तापमान कम होकर 5, 10, 15, 18 डिग्री सेल्सियस होने लगता है तो शरीर को भीतर से गर्म रखने के लिए अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ती है। अगर सही डाइट न मिले, रहन-सहन सही न हो तो अंदर ही तोड़-फोड़ मच जाता है। इसलिए सर्द मौसम में कुछ खास तरह के हेल्दी लड्डू खाने का चलन हमारी संस्कृति में है। सच तो यह है कि ये लड्डू स्वभाव से हेल्दी हैं। लेकिन जब इन पर बहुत ज्यादा स्वादिष्ट होने का दबाव बनाया जाता है तो सेहत के लिहाज से ये बेहतर नहीं रह पाते। इसलिए यह ज़रूरी है कि हम कुछ बातों का ध्यान रखें ताकि ये सेहतमंद तो रहें ही, कुछ स्वादिष्ट भी हों।सर्दियों में हेल्दी लड्डू खाने का चलन है। लेकिन हम पहले स्वाद को प्राथमिकता देते हैं और सेहत को बाद में। इसलिए जब भी हम लड्डू तैयार करें, यह ध्यान रखें कि इन्हें शरीर को हेल्दी बनाने के लिए खा रहे हैं।संजीव कपूर, देश के जाने-माने शेफ
मात्रा और वक्त का रखें ध्यान
हर दिन 1 छोटा लड्डू पर्याप्त है। इससे ज्यादा की अमूमन ज़रूरत नहीं होती। सुबह ब्रेकफस्ट के बाद या दोपहर तक खा लेना सही है। शाम में स्नैकिंग में भी ले सकते हैं। रात में खाने से ये भारी हो सकते हैं। इसलिए रात में न लें। एक ही तरह के लड्डू न खाएं। 3-4 तरह के लड्डू बना लें और उन्हें बदल-बदल कर खाएं। ये ज्यादा हेल्दी हैं। इन्हें लेते समय यह ज़रूरी नहीं कि दूध पिए। अगर ये आसानी से पच रहे हैं तो लें। अगर इन्हें लेने से गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी आदि की परेशानी हो तो न लें। बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे लड्डू नहीं खाने चाहिए। दूसरे शब्दों में जिनके पाचनतंत्र कमजोर हों, वे न लें।
क्या होती है कॉमन गलतियां
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लड्डू को बाइंड यानी बांधने के लिए बहुत ज्यादा मात्रा में घी का इस्तेमाल किया जाता है। इससे यह हाई कैलरी फूड हो जाता है। चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करके यह समझ लेना कि लड्डू हेल्दी हो चुका है। इसलिए डायबीटीज़ वाले भी खा सकते हैं। शुगर बेकाबू होने की स्थिति में भी इस तरह के लड्डू खा लेना। लिवर और किडनी के गंभीर मरीज अपने डॉक्टर या डायटिशन से पूछे बिना इन लड्डुओं का सेवन करते हैं। लोग इसे स्नैक समझते हैं जबकि यह एक तरह से सर्दी की दवा है, शरीर को गर्म रखने की। इसे दवा के रूप में ही खाएं। कई लोग बाहर से खोआ खरीदकर लड्डू बनाते हैं। आजकल इनमें मिलावट की शिकायत काफी आती हैं। घर में भी इन्हें तैयार करने में दूध के इस्तेमाल से बचते हैं। दरअसल, दूध मिलाने से ऐसे लड्डुओं की लाइफ कुछ दिनों की ही रहती है जबकि घी वाले की लाइफ काफी होती है। लेकिन यह भी सच है कि दूध वाले लड्डू घी की तुलना में कम कैलरी वाले होते हैं। साथ ही अलग से मीठा डालने की ज़रूरत भी इनमें कम होती है। हां, अगर दूध या इसके उत्पाद को पचाने में परेशानी हो (लैक्टोज इंटॉलरेंस) तब ही इससे बचना चाहिए।
चीनी और गुड़ के बदले क्या?
अगर इन लड्डुओं को खाकर भी शुगर का स्तर नहीं बढ़ने देना है। इसी तरह वज़न कम करने वालों को अगर वज़न नहीं बढ़ाना है तो इसे तैयार करने में चीनी और गुड़, दोनों के ही इस्तेमाल से बचना चाहिए। इनकी जगह कुदरती मिठास ले सकते हैं। किशमिश, मुनक्का, अंजीर और खासकर खजूर आदि के पेस्ट का इस्तेमाल इन लड्डुओं को मीठा करने के लिए किया जा सकता है। हां, इनके उपयोग से ये चीनी या गुड़ जितने मीठे नहीं होते, लेकिन ये हेल्दी ज़रूर रहते हैं और इन्हें शुगर मरीज भी खा सकते हैं। ड्राई फ्रूट्स वाले लड्डू में तो चीनी या गुड़ देने की हरगिज ज़रूरत नहीं होती।
खासमखास लड्डू
पसंद और ज़रूरत के हिसाब से 3-4 तरह के लड्डू सही तरीके से बना लें और इन्हें हफ्ते में बदल-बदल कर सही मात्रा में खाएं चाहिए। साथ में यह भी ध्यान रखें कि कौन लोग किस तरह का लड्डू न खाएं:
लिवर और किडनी के मामले में कई बार इस तरह के फूड आइटम्स को खाने की मनाही होती है। दरअसल, गंभीर मरीजों में शरीर के कई सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहे होते। इसलिए डॉक्टर के हिसाब से ही डाइट प्लान करें।डॉ. अशोक कुमार चौधरी, अडिशनल प्रफेसर, ILBS
1. तिल के लड्डू
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इंग्लिश में इसे Sesame Seeds कहते हैं। तिल की अहमियत को समझते हुए ही हिंदू धर्म में हर साल 14 या 15 जनवरी को मकर संक्रांति या तिल संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गुड़ के साथ तिल के लड्डू खाए जाते हैं। तिल दो तरह के होते हैं, काले और सफेद। ये शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बनाकर रखने में मददगार होता है। वहीं, यह शुगर पेशंट के लिए फायदेमंद है। कैल्शियम की मौजूदगी की वजह से यह हड्डियों के लिए भी अहम है। इसे कैंसर रोधी भी माना गया है। यह स्किन के लिए अच्छा है। काला तिल बालों के लिए भी फायदेमंद है। भरपूर फाइबर की वजह से यह पाचन में भी मददगार है। यह लिवर के साथ शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत करने में मददगार है।
आजकल भुना पोहा और मुरमुरे के लड्डू गुड़ के साथ बनाए जाते हैं। अगर इनमें थोड़ी मात्रा में बादाम, चना पाउडर यानी सत्तू मिला दें तो शरीर को प्रोटीन भी थोड़ी मात्रा में मिल जाएगी। पर शुगर मरीज बेहद कम मात्रा में ही इन्हें खाएं।नीलांजना सिंह, सीनियर डाइटिशन
इसे अच्छी तरह से पानी में भिगोकर ही खाना चाहिए। तिल के लड्डू अक्सर गुड़ के साथ ही बनाए जाते हैं। इसके अलावा इसे भी स्मूदी के साथ खा सकते हैं। इसे रोस्ट करके भी खा सकते हैं। जब घरों में तिल के लड्डू तैयार किए जाते हैं तो कई बार इन्हें कम भूना जाता है या फिर जल जाने तक भूना जाता है। ये दोनों ही स्थितियां सही नहीं हैं। इसलिए इसे धीमी आंच पर भूनना सही है। जब इससे हल्की खुशबू आने लगे, तब उतारकर बनाएं।
कौन कम खाए या न खाए
लिवर और किडनी के गंभीर मरीज न खाए। जिन्हें लो बीपी की परेशानी हो। यह बीपी लो कर सकता है। गुड् वाले तिल के लड्डू को शुगर मरीज भी न खाए। कुछ मामलों में लिवर के मरीजों को इसलिए भी मना किया जाता है क्योंकि विटामिन K की मौजूदगी की वजह से खून का थक्का जमने का खतरा रहता है।
2. मेथी के लड्डू
मेथी शुगर के मरीजों के लिए और खून साफ करने के लिए बेहद खास है। यह ध्यान रहे कि लड्डुओं के साइज़ छोटे हों। 20-30 ग्राम तक के हों तो बेहतर है। मेथी दानों को ठीक से भिगोया या भुना नहीं जाता। इसे रातभर पानी में भिगोकर, फिर हल्की आंच पर भून कर ही बनाना चाहिए।
कौन कम खाए या न खाए
मेथी की तासीर गर्म होती है। ज्यादा मात्रा में लेने पर गैस, एसिडिटी, लो ब्लड शुगर (खासकर डायबिटीज वालों में) की परेशानी हो सकती है। अगर बहुत ज्यादा एसिडिटी, गैस और ब्लोटिंग की परेशानी हो। लो शुगर की परेशानी हो। ऐसे लोग अपने डॉक्टर की सलाह लेकर ही खाएं।
3. अलसी (फ्लेक्स सीड) के लड्डू
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अलसी को तीसी भी कहते हैं। यह ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का बेहतरीन सोर्स है। हार्ट के लिए बढ़िया, खासकर जो नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए। इसमें फॉस्फोरस की मात्रा ज्यादा होती है। असली को ठीक से भिगोया या भुना नहीं जाता। इसे रातभर पानी में भिगोकर, फिर हल्की आंच पर भून कर ही बनाना चाहिए। कच्ची अलसी को पचाना बेहद मुश्किल होता है।
कौन कम खाए या न खाए
किडनी के मरीज (CKD: क्रॉनिक किडनी डिजीज) में ज्यादा फॉस्फोरस ज्यादा नुकसान करता है। जब शरीर में फॉस्फोरस की मात्रा लिमिट से ज्यादा हो जाती है तो हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा कम होने लगती है, इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। जिनकी हड्डियां कमजोर हों, वे कम खाएं।
4. ड्राई फ्रूट्स के लड्डू
ये हेल्दी हैं, लेकिन काफी हेवी होते हैं। अक्सर लोग यह सोचते हैं कि ड्राई फ्रूट्स हैं। इसमें बादाम, अखरोट, किशमिश, काजू सब कुछ डाला है। इसलिए जितना खाएंगे, उतना फायदेमंद है। यह सोचना गलत है। अगर ज्यादा खाएंगे तो फायदे से ज्यादा नुकसान होगा। यह कब्ज को बढ़ा सकता है। इसलिए फाइबर बैलेंस करना ज़रूरी है। इसमें थोड़ी मात्रा में खजूर, अंजीर और कुछ मात्रा में पंपकिन सीड्स, फ्लैक्स सीड्स आदि को मिलाना भी ज़रूरी है।
कौन कम खाए या न खाए
अगर वेटलॉस में लगे हुए हैं तो कम खाएं या फिर न खाएं। अगर कलेस्ट्रॉल की स्थिति गंभीर है या फिर इन चीज़ों को पचाने में समस्या हो तो भी खाने से बचना चाहिए।
5. गोंद के लड्डू
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गोंद की तासीर बेहद गर्म होती है। कई बार ज़रूरत से ज्यादा लेने पर मुंह में छाले भी हो जाते हैं। यह शरीर को गर्म रखने की एक तरह की दवा है। इस लड्डू को बनाने में गोंद, घी, गेहूं का आटा आदि का उपयोग किया जाता है। महिलाओं को डिलीवरी होने के बाद इस लड्डू को दिया जाता है। बहुत सर्द इलाकों में इसका खूब उपयोग होता है। यह जॉइंट्स के लिए भी खास है। गोंद के लड्डू को बनाने में घी का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इससे फैट और कैलरी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है। चूंकि इसमें गर्मी ज्यादा होती है, इसलिए पचाना बड़ी परेशानी हो सकती है।
कौन कम खाए या न खाए
जिन्हें हेवी फूड पचाना मुश्किल होता है। लिवर के मरीज (खासकर फैटी लिवर-2, सिरोसिस वाले) न खाएं। किडनी के मरीज, शुगर, हाई बीपी वाले भी खाने से बचें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।