Bhopal News:bmc बैठक में हंगामा, गोमांस विवाद पर वॉकआउट, जानें कौन सी सेवाएं हुईं सस्ती - Bhopal: Chaos At Bmc Meeting, Walkout Over Beef Controversy, Proposals To Reduce Water Connection And Marriage

Bhopal News:bmc बैठक में हंगामा, गोमांस विवाद पर वॉकआउट, जानें कौन सी सेवाएं हुईं सस्ती - Bhopal: Chaos At Bmc Meeting, Walkout Over Beef Controversy, Proposals To Reduce Water Connection And Marriage

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भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक मंगलवार को भारी हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच हुई। एक ओर गोमांस मिलने के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, वहीं दूसरी ओर शहर से जुड़े तीन अहम प्रस्तावों को बहुमत से मंजूरी दे दी गई। बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया, जबकि भाजपा के कुछ पार्षदों ने भी खुले तौर पर नाराजगी जाहिर की। पूरे समय बैठक में हंगामे की स्थिती बनी रही। विपक्ष  महापौर एमआईसी को भी जांच के दायरे में लाने पर अड़ा रहा जबकि पक्ष का कहना है यह मामला इस एमआईसी से पहले का है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि परिषद द्वारा लिए गए सभी निर्णयों का निगम प्रशासन पूरी तरह पालन करेगा। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

गोमांस विवाद से गरमाया सदन
बैठक शुरू होते ही स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया। कांग्रेस पार्षद पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे और महापौर मालती राय व पूरी एमआईसी से इस्तीफे की मांग की। नारेबाजी के बीच कई बार बैठक स्थगित करनी पड़ी। भोजन अवकाश के बाद भी माहौल शांत नहीं हुआ और कांग्रेस पार्षदों ने विरोध में सदन से वॉकआउट कर दिया।भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने जैकेट पर गोमांस विरोधी संदेश चस्पा कर प्रदर्शन किया और सदन में ही इस्तीफा देने की घोषणा कर दी, हालांकि नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने इसे अस्वीकार कर दिया। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद सुरेंद्र बाठिका और पप्पू विलास घाड़गे ने भी मामले पर आपत्ति जताई। विज्ञापन विज्ञापन

भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने दिया जाएगा
एमआईसी सदस्य आरके सिंह बघेल ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की। अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने दिया जाएगा और स्लॉटर हाउस को स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश आयुक्त को दिए गए हैं।निगम आयुक्त ने बताया कि निगम के पशु चिकित्सक बेनी प्रसाद गौर को निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं एमआईसी सदस्य रविंद्र यति ने 11 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए उनके नाम सदन में गिनाए।


तीन बड़े प्रस्ताव पारित

1. व्यक्तिगत जल कनेक्शन: अब कॉलोनियों में बल्क कनेक्शन की जगह सिंगल यानी व्यक्तिगत नल कनेक्शन दिए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित कॉलोनी के 70 प्रतिशत से अधिक निवासियों की सहमति अनिवार्य होगी। व्यक्तिगत कनेक्शन से पानी सस्ता पड़ेगा और बिल से जुड़ी परेशानियां कम होंगी।
2. मैरिज रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ी कटौती: 30 दिन के भीतर विवाह पंजीयन कराने पर शुल्क अब सिर्फ 130 रुपए होगा। पहले विलंब शुल्क के साथ यह राशि 5 हजार रुपए तक पहुंच जाती थी। 30 दिन बाद आवेदन करने पर अधिकतम शुल्क 1100 रुपए तय किया गया है।
3. अमृत 2.0 योजना: शहर में जलप्रदाय और सीवरेज से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स अमृत 2.0 के तहत लागू किए जाएंगे। इस पर कुल 1757 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें केंद्र-राज्य सरकार की हिस्सेदारी के साथ 200 करोड़ रुपए ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए जुटाए जाएंगे।

11 नगर निगम कर्मचारियों पर गिरेगी गाज
 नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी नेआयुक्त को निर्देश दिए कि स्लॉटर हाउस में पदस्थ नगर निगम के सभी 11 कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किया जाए। इसके साथ ही स्लॉटर हाउस का संचालन करने वाली लाइव स्टॉक एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश भी दिए गए। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यह एजेंसी नगर निगम के किसी भी टेंडर में हिस्सा न ले सके, यह सुनिश्चित किया जाए।

शासन स्तर पर होगी जांच
कांग्रेस पार्षद दल ने नगर निगम की आंतरिक जांच पर असंतोष जताते हुए कहा कि निगम के अधिकारियों द्वारा की जाने वाली जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती। उनकी मांग थी कि मामले की जांच शासन स्तर के अधिकारियों से कराई जाए। इस पर नगर निगम अध्यक्ष ने कहा कि परिषद की ओर से यह व्यवस्था की जा रही है कि जांच नगर निगम से बाहर के वरिष्ठ शासन अधिकारियों द्वारा कराई जाए और इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

महापौर का स्पष्टीकरण
महापौर मालती राय ने कहा कि स्लॉटर हाउस प्रकरण में पहले ही उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने विपक्ष द्वारा 2024 में एमआईसी की अनुमति को लेकर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। महापौर ने स्पष्ट किया कि उस समय न तो महापौर परिषद अस्तित्व में थी और न ही यह प्रक्रिया उनके कार्यकाल में शुरू हुई। एमआईसी ने स्लॉटर हाउस में गोवंश कटान की कोई अनुमति नहीं दी। पीपीपी मॉडल पर हुए टेंडर, प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई।
 

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