Bihar :अस्पताल के काउंटर पर महाठग! पटना एम्स और कुर्जी अस्पताल में गबन ने दी बड़ी सीख - Bihar : Embezzlement At Patna Aiims Hospital Scam At Kurji Hospital Counter Patna Bihar

Bihar :अस्पताल के काउंटर पर महाठग! पटना एम्स और कुर्जी अस्पताल में गबन ने दी बड़ी सीख - Bihar : Embezzlement At Patna Aiims Hospital Scam At Kurji Hospital Counter Patna Bihar

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बड़े-बड़े अस्पतालों के काउंटर पर महाठग बैठे हुए हैं, जो न सिर्फ उस अस्पताल को लूट रहे हैं बल्कि आपके रुपए भी डकार रहे हैं। अब इसकी जांच शुरू हो गई है। यह मामला पहले एम्स और अब मिशनरी अस्पताल कुर्जी में जांच चल रही है। आईये अस्पताल के काउंटर पर बैठे महाठग कैसे करते हैं ठगी।    और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

क्या है नया ट्रेंड? कैसे हुई ठगी?
जांच में सामने आया है कि ठगों ने तकनीक और मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर गबन का नया मॉडल तैयार किया है। पटना एम्स में सामने आया कि कुछ कर्मियों ने अस्पताल के सॉफ्टवेयर में सेंधमारी की या उससे मिलती-जुलती फर्जी रसीदें काटीं। मरीज से पूरी रकम ली गई, लेकिन रिकॉर्ड में उसे कम दिखाया गया या दिखाया ही नहीं गया। डिजिटल इंडिया के दौर में भी कई मरीज नकद भुगतान करते हैं। कुर्जी अस्पताल जैसे मामलों में देखा गया कि काउंटर पर बैठे कर्मियों ने कैश ले लिया, लेकिन उसे मुख्य खाते में जमा करने के बजाय निजी जेब में डाल लिया। बिल काटने के कुछ मिनट बाद उसे सिस्टम में कैंसिल कर दिया जाता था। मरीज रसीद लेकर इलाज कराने चला जाता था, जबकि कागजों में वह पैसा वापस दिखा दिया जाता था। विज्ञापन विज्ञापन

ऐसे हो जाती है ठगी 
दूर-दराज के गांवों से आए मरीज और उनके परिजन काउंटर पर लंबी लाइनों और इलाज की जल्दी में होते हैं। वे रसीद पर लिखे बारकोड या उसकी प्रामाणिकता की जांच नहीं करते। ठगों को पता है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहा परिवार सवाल नहीं पूछेगा।

ऐसे हुआ गबन का खुलासा 
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना में करीब 44.50 लाख घोटाले का मामला तब सामने आया, जब संस्थान के ऑडिटर पीयूष आनंद ने इंटरनल ऑडिट किया तो  उसमें कई वित्तीय अनियमितता पाई गई। इंटरनल ऑडिट के तहत कैश बुक, भुगतान रजिस्टर, रसीदों और बैंक खातों का मिलान किया गया। इस दौरान नकद लेन-देन और बैंक एंट्री के बीच काफी अंतर मिला। शुरुआती जांच में कई बड़े लेनदेन बिना आवश्यक दस्तावेजों, वाउचर और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के किए गए थे। ऑडिट टीम के गहन विश्लेषण के बाद लगभग 44.50 लाख रुपए का हिसाब नहीं मिला। इसके बाद एम्स के चीफ कैशियर अनुराग अमन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस को उसने बताया कि वह सारा रुपया अपनी पत्नी के अकाउंट में भेज देता था। 

चीफ कैशियर अनुराग अमन ने बताई वजह 
पुलिस के पूछताछ में एम्स के चीफ कैशियर अनुराग अमन ने बताया कि शेयर मार्केट में लगभग 70 लाख रुपए डूबने के बाद पउसकी नजर पटना एम्स के कैश पर लगी। उसने अलग-अलग तारीख में कुल 44 लाख पचास हजार रुपए कैश से उड़ा लिए। एम्स के कैश सत्यापन में 4 जनवरी 2026 को कैश वाल्ट में 1लाख 51 हजार 280रुपए नगद थे, जिसमें 42 लाख 95 हजार 720 रुपए की कमी पाई गई। इस मामले में जब मुख्य कैशियर अनुराग अमन से पूछताछ की गई तो उन्होंने यह स्वीकार किया कि एम्स कैश से उन्होंने 42 लाख 99 हजार रुपए की राशि की निकासी की थी। वह पैसा उन्होंने अपनी पत्नी के बैंक ऑफ़ इंडिया के अकाउंट के खाता नंबर में जमा किए थे। यह पैसे की निकासी 1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच की गई थी। 

कुर्जी होली फैमिली अस्पताल में भी मामला हुआ उजागर 

एम्स के मामले के बाद कुर्जी होली फैमिली अस्पताल में भी जांच शुरू हुई। जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि एम्स की तरह ही यहां भी 2.91 लाख रुपए का गबन किया गया है। यह आरोप कुर्जी होली फैमिली अस्पताल के अधीन चलने वाले कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्रशिक्षण लिपिक नीरज कुमार पर लगा। सैदपुर का रहने वाला है। मामला उजागर होने के बाद अस्पताल की प्रशासक प्रिंसी मैथ्यु के लिखित बयान पर पाटलिपुत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। हालांकि मामला सामने आने के बाद से नीरज कुमार फरार है। 

खुद के अकाउंट पर कराता था ट्रांजेक्शन  
नीरज कुमार का काम बिहार विश्वविद्यालय के छात्रों से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुल्क लेना और उनका रिकॉर्ड मेंटेन करना था। सितंबर 2025 में नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल को विवि से फोन आया और बताया गया कि सत्र 2024-25 के 59 विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन लंबित है। साथ ही उसका पोर्टल भी बंद है। कॉलेज प्रशासन ने अपने स्तर पर मामले की जांच की, तब गबन का मामला सामने आया। नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल  का कहना है कि नीरज ने 2016 में कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के नर्सिंग कॉलेज को ज्वाइन किया था। 2018 में इसकी सेवा की पुष्टि की गई। रजिस्ट्रेशन के समय 59 छात्रों से इसने अपने खाते में रजिस्ट्रेशन शुल्क ले लिया। नीरज पर कॉलेज की वेबसाइट से भी छेड़छाड़ करने का आरोप है। कुर्जी अस्पताल में वित्तीय लेनदेन की निगरानी के लिए अब सीसीटीवी के साथ-साथ रैंडम क्रॉस-चेकिंग की जा रही है।

आम जनता के लिए 'अमर उजाला' की सलाह: ठगी से कैसे बचें?
इन मामलों के खुलासे के बाद पटना के बड़े अस्पतालों में अब ऑडिट की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। लेकिन इससे अलग आमजन को भी खुद से निगरानी करनी होगी। इसके लिए सबसे पहले लोगों को डिजिटल पेमेंट को प्राथमिकता देनी होगी। आपसे जितना संभव हो, UPI, कार्ड या नेट बैंकिंग से भुगतान करें। इसका रिकॉर्ड बैंक के पास भी रहता है। अगर आपको रसीद मिलता है तो रसीद का अच्छी तरह से मिलान करें। यह जरुर देखें कि आपने जितना पैसा दिया है, रसीद पर उतनी ही राशि छपी है या नहीं। हाथ से लिखी रसीद की भी जांच करवाएं। बिल का भुगतान होने पर मोबाइल पर आने वाले एसएमएस की जांच जरुर करें। क्यों कि कई बड़े अस्पताल अब भुगतान होते ही मरीज के मोबाइल पर पुष्टिकरण मैसेज भेजते हैं। अगर मैसेज न आए, तो काउंटर से तुरंत पूछें। किसी भी तरह का संदेह होने पर हेल्पडेस्क की मदद लें, क्यों कि यदि काउंटर क्लर्क का व्यवहार संदिग्ध लगे, तो तुरंत अस्पताल के शिकायत केंद्र या वरिष्ठ अधिकारी को सूचित करें।

 

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