सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर छिड़ा सियासी घमासान, बीजेपी ने नेहरू का नाम ले कांग्रेस पर लगाया बायकॉट का आरोप - bjp attack on congress over somnath swabhiman parv nehru accused of obstructing temple construction

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर छिड़ा सियासी घमासान, बीजेपी ने नेहरू का नाम ले कांग्रेस पर लगाया बायकॉट का आरोप - bjp attack on congress over somnath swabhiman parv nehru accused of obstructing temple construction
नई दिल्ली:

देशभर में धूमधाम से ' सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ' मनाया जा रहा है। अब इस पर भी सियासत तेज हो गई है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर सोमनाथ का बायकॉट करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, जब पूरा देश सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहा है, तब कांग्रेस का इससे दूरी बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

रविवार को कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, कांग्रेस पार्टी पिछले 70–75 वर्षों से सोमनाथ मंदिर को लेकर एक ही रुख अपनाती आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विचार पहली बार सामने आया था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे रोकने की कोशिश की थी। यहीं से, उनके अनुसार, कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति की शुरुआत हुई।

नेहरू पर कांग्रेस ने लगाए आरोप

पूनावाला ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर भी आरोप लगाते हुए कहा, जब सोमनाथ ट्रस्ट नदियों से पानी लाना चाह रहा था तब नेहरू ने उसे रोकने का प्रयास किया। पूनावाला ने कहा, नेहरू को चिंता कि पाकिस्तान में उनकी क्या छवि बन रही है।



भाजपा नेता ने आगे कहा कि कांग्रेस ने यही रवैया अयोध्या के मामले में भी अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए। उन्होंने कहा, यह कांग्रेस की हिंदुओं के खिलाफ फतवा जारी करने का कांग्रेस काम करती है, यह उनकी वोट बैंक नीति का हिस्सा बन चुका है।

क्यों मनाया जा रहा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व

‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भारत के उन अनगिनत नागरिकों को याद करने के लिए मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया, जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करता रहेगा। महमूद गजनी ने करीब एक हजार साल पहले 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था और इस दौरान अपना जीवन कुर्बान करने वालों की याद में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

पीआईबी के एक बयान के अनुसार सदियों पहले इस मंदिर को नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज विश्वास, साहस और राष्ट्रीय गर्व के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में खड़ा है। यह सब इसे इसकी प्राचीन महिमा में बहाल करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों के कारण संभव हुआ है।

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