Bmc कितनी पुरानी?:छोटे अपराधों की सुनवाई के लिए 218 साल पहले बनी, कभी सिर्फ टैक्स देने वाले ही देते थे वोट - What Is The History Of The Bmc? How Old Is It? When Did It Begin? Bmc News In Hindi

Bmc कितनी पुरानी?:छोटे अपराधों की सुनवाई के लिए  218 साल पहले बनी, कभी सिर्फ टैक्स देने वाले ही देते थे वोट - What Is The History Of The Bmc? How Old Is It? When Did It Begin? Bmc News In Hindi

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महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों सीटों पर 15 जनवरी को चुनाव होगा। वहीं, 16 जनवरी को मतगणना होगी। यह चुनाव तीन साल की देरी से हो रहे हैं। इसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) भी शामिल है, जो कि भारत की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई के हर दिन के कामकाज और लंबी अवधि के विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में आज जानेंगे की बीएमसी का इतिहास क्या है? इसकी स्थापना कब हुई? इसके साथ ही बीएससी में कब क्या-क्या बदलाव हुए?

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छोटे अपराधों पर तुरंत सुनवाई के लिए हुआ गठन

आज की बीएमसी, जिसका बजट कई राज्यों से ज्यादा है। इसकी शुरुआत बहुत छोटे स्तर से हुई थी। बीएमसी की नींव 19वीं सदी में रखी गई। 1807 में बीएमसी में  सिर्फ पेटी सेशन्स कोर्ट तक ही सीमित  था। इसमें  दो मजिस्ट्रेट और एक जस्टिस ऑफ पीस थे। ताकि शहर के छोटे अपराधों पर तुरंत सुनवाई हो पाए। वहीं, 1845 इसमें संरक्षण बोर्ड को जोड़ा गया। यह साफ-सफाई और नगर व्यवस्था से जुड़ा बोर्ड था, जिसमें सात आम नागरिक सदस्य होते थे। जो शहर की स्वच्छता और सुविधाओं की देखरेख करते थे। इसके बाद 1858 में तीन आयुक्तों के बोर्ड का गठन किया गया। जो पूरे समिति का निर्णय लेते थे। 

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टैक्स देने वाले बने बीएमसी के शुरुआती वोटर

साल 1865 बीएमसी इतिहास के लिए खास रहा। 1865 में बीएमसी में एक नगर आयुक्त और निगमित निकाय का गठन किया गया। बॉम्बे अधिनियम संख्या III, 1872 के अनुसार 1872 में 64 सदस्यों के साथ नियमित निगम का गठन किया गया। वहीं, इन 64 सदस्यों को चुनने का अधिकार उन लोगों को दिया गया, जो कर यानी की टैक्स देते थे। 4 सितंबर 1873 के दिन नागरिक निकाय की पहली बैठक आयोजित हुई थी।

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स्थापना के 100 साल बाद मिली प्रथमिक शिक्षा की जिम्मेदारी
अपनी स्थापना के 100 साल बाद 1907 में शहर की प्राथमिक शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी निगम को सौंप दी गई। 1922 में बॉम्बे अधिनियम संख्या IV के तहत मतदान में बदलाव किया गया। अब सिर्फ करदाताओं ही नहीं बल्कि किरायादाताओं को भी मतदान का अधिकार दिया गया।
 

1931 में बॉम्बे अधिनियम संख्या 21 के तहत अध्यक्ष का नाम बदलकर ‘मेयर’ कर दिया गया। बॉम्बे अधिनियम संख्या 13 के तहत 1 अक्टूबर 1933 को  इम्प्रूवमेंट्स ट्रस्ट का निगम में विलय कर दिया गया था। 7 अगस्त 1947 को बी.ई.एस. एंड टी. कंपनी लिमिटेड को नगर पालिका के अधीन कर दिया गया। 

 

आजादी के बाद पहली बार हुए वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव

1948 में पहली बार वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव हुए। वहीं, 1950 में बॉम्बे अधिनियम संख्या 7 के अनुसार उपनगरों को नगर निगम में मिला दिया गया। अब तक इसमें कुछ पदेन सदस्य थे (जैसे पुलिस आयुक्त, अध्यक्ष, बी.पी.टी., कार्यकारी अभियंता, प्रेसिडेंसी डिवीजन, पी.डब्ल्यू.डी., बॉम्बे सरकार आदि)। 1952 में ऐसे सभी विशेष प्रतिनिधित्व समाप्त कर दिए गए।  निगम पूरी तरह से निर्वाचित निकाय बन गया। 1957 में बॉम्बे अधिनियम संख्या 58, 1956 के अनुसार विस्तारित उपनगरों का निगम में विलय कर दिया गया। 1963 में 140 एकल सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों की शुरुआत की गई।

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साल 1966 बीएमसी के लिए खास रहा। महाराष्ट्र अधिनियम संख्या 33, 1966 के तहत 1968 में पहली बार चुनाव आयोजित किए गए। वहीं, 30 मार्च 1972 में मराठी, जो की महाराष्ट्र की राज्य भाषा है, को निगम की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया। 

साल 1973:  इस साल निगम ने 100 साल पूरा किए। वहीं, महाराष्ट्र अधिनियम संख्या 42 के अनुसार 1976 में अनुसूचित जाति के पार्षदों के लिए सीटों के आरक्षण के प्रावधान किए गए। साल 1982 में महापौर संस्था की स्वर्ण जयंती मनाई गई। वहीं, महाराष्ट्र अधिनियम संख्या 25 के अनुसार पार्षदों की सीटों की संख्या 140 से बढ़कर 170 की गई। 

साल 1983: 7 नवंबर 1983 को सुधार समिति की स्वर्ण जयंती 7 नवंबर 1983 को मनाई गई। महाराष्ट्र सरकार ने 3 मार्च 1983 की अधिसूचना द्वारा पार्षदों की सेवानिवृत्ति की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ा दी। इसके साथ ही एक या अधिक व्यक्तियों की अतिरिक्त नगर आयुक्तों के रूप में नियुक्ति भी चालू हुई। 

साल 1984: महाराष्ट्र अधिनियम संख्या 7 के अनुसार1 अप्रैल 1984 से प्रशासक की नियुक्ति प्रभावी हुई। 

साल 1985: महाराष्ट्र अधिनियम संख्या तृतीय, 1985 के अनुसार प्रशासक की नियुक्ति जारी रही। इसके साथ ही 25 अप्रैल 1985 को 170 सीटों के लिए चुनाव हुए और नया नगर निगम 10 मई 1985 से अस्तित्व में आया।

1989:  स्थायी समिति, सुधार समिति और शिक्षा समिति में सीटों की संख्या 16 से बढ़ाकर 20 कर दी गई। इसके साथ ही  बी.ई.एस. एवं टी. समिति में सीटों की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 कर दी गई।  मतदाओं की न्यूनतम उम्र को घटाकर 18 वर्ष दिया गया।

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1990: बीएमसी का चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष कर दिया गया। इसके साथ ही कुल सीटों में से तीस प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गईं। 

1991: एकल सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या 221 निर्धारित की गई थी। वहीं, वडाला स्थित एकवर्थ कुष्ठ रोग अस्पताल को बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने अधीन ले लिया गया। 

1994:  महिलाओं (अनुसूचित जाति/जनजाति आदि सहित) के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। वहीं, कुल सीटों में से 27 प्रतिशत सीटें पिछड़े वर्ग के सदस्यों के लिए आरक्षित हुईं।   

1996: महापौर के पद में पिछड़े वर्ग के नागरिकों के लिए आरक्षण के प्रावधान के तहत, पहली बार महापौर की नियुक्ति की गई। इसके साथ ही महाराष्ट्र अधिनियम संख्या 25, 1996 के अनुसार, 'बॉम्बे' के स्थान पर 'मुंबई' नाम को पुनर्स्थापित किया गया।

1999: 1999 में महापौर-परिषद को समाप्त कर दिया गया। महाराष्ट्र अधिनियम 27वीं, 1999 के तहत नगर निगम की पुरानी व्यवस्था को पुनर्जीवित किया गया। इसके साथ ही उप महापौर और विपक्ष के नेता के पद की शुरुआत की गई। इसके साथ ही  महापौर को कुछ शक्तियां प्रदान की गईं। 


 

2000: महापौर और उप महापौर के कार्यकाल को ढाई वर्ष तक बढ़ाया गया। 

2002: पार्षदों की सीटों की संख्या 221 से बढ़कर 227 हो गई। सदन के नेता के पद की शुरुआत हुई।

2007:  मेयर और उप मेयर के पद के लिए हाथ उठाकर चुनाव कराने के नियम लाया गया। इसके साथ ही  वैधानिक और विशेष समितियों के अध्यक्षों के पद के लिए हाथ उठाकर मतदान कराने के नियम आया।


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