Bombay Hc:'केवल Rt-pcr नेगेटिव आधार नहीं', कोविड मुआवजे पर कोर्ट का फैसला; मृतक नर्स के परिवार को मिली राहत - Bombay High Court Said Negative Rtpcr Report Not Enough To Reject Covid-19 Compensation
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कोरोना काल में जान गंवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि सिर्फ आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव होने के आधार पर कोरोना से मौत का मुआवजा खारिज नहीं किया जा सकता। अगर अन्य मेडिकल रिपोर्ट साफ तौर पर संक्रमण और उससे हुई मौत की पुष्टि करती हैं, तो मुआवजा देना होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला उस नर्स के मामले में आया है, जिसकी ड्यूटी के दौरान कोरोना से मौत हुई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से उसके परिवार को मुआवजा नहीं मिल रहा था।
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पूरे मामले को ऐसे समझा जा सकता है कि माचिंद्र गायकवाड़ का है, जिनकी पत्नी 1993 से अहिल्यानगर सिविल अस्पताल में नर्स के पद पर काम कर रही थीं। मई 2021 में, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान, ड्यूटी के समय उनकी तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई।
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गायकवाड़ ने मुआवजे के लिए किया था आवेदन
गायकवाड़ ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 50 लाख रुपये के बीमा मुआवजे के लिए आवेदन किया था। यह योजना कोरोना के दौरान जान गंवाने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के परिवारों के लिए बनाई गई थी। लेकिन जिला प्रशासन ने उनका दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उन्होंने अपनी पत्नी की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट जमा नहीं की, जिसमें उन्हें कोरोना पॉजिटिव बताया गया हो।
इसके बाद इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद न्यायमूर्ति अरुण पेडनेकर और न्यायमूर्ति वैषाली जाधव की पीठ ने मृतका की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट भले ही नेगेटिव हो, लेकिन सीटी स्कैन रिपोर्ट, ऑक्सीजन लेवल, मेडिकल रिकॉर्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र साफ तौर पर दिखाते हैं कि उनकी मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई।
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आरटी-पीसीआर को आधार मानना गलत
अदालत ने यह भी कहा कि कई मामलों में आरटी-पीसीआर रिपोर्ट गलत आ सकती है, इसलिए उसे ही एकमात्र आधार मानना गलत होगा। जब अन्य मेडिकल सबूत यह साबित करते हैं कि मौत कोरोना की वजह से हुई, तो मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि वह गायकवाड़ का दावा आगे संबंधित विभाग को भेजें और यह मानकर चलें कि उनकी पत्नी की मौत कोरोना संक्रमण से हुई थी।
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मृत नर्स कोरोना काल में क्वारंटीन सेंटर में तैनात थीं और सीधे तौर पर कोरोना मरीजों के संपर्क में थीं। इस फैसले को उन हजारों स्वास्थ्यकर्मियों के परिवारों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जिनके मुआवजे केवल तकनीकी कारणों से रोके गए थे।
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