Bombay High Court:न्यायालय का बड़ा फैसला, ईडी के जमा पैसों के ब्याज से होगी शहीद के परिवारों की मदद - Half Of Interest Earned On Ed Deposit Will Go To The Soldier Welfare Fund Bombay High Court Order

Bombay High Court:न्यायालय का बड़ा फैसला, ईडी के जमा पैसों के ब्याज से होगी शहीद के परिवारों की मदद - Half Of Interest Earned On Ed Deposit Will Go To The Soldier Welfare Fund Bombay High Court Order

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने देश के लिए जान कुर्बान करने वाले सैनिकों के परिवारों की मदद के लिए एक अहम कदम उठाया है। न्यायालय ने कहा है कि ऐसे परिवारों की सहायता करने की बहुत जरूरत है। इसी के चलते न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक खास निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि ईडी ने जो 46 करोड़ रुपये जमा किए थे, उस पर मिले ब्याज का आधा हिस्सा 'सशस्त्र बल युद्ध हताहत कल्याण कोष' में जमा किया जाए। यह फैसला जस्टिस ए एस गडकरी और आर आर भोंसले की बेंच ने सुनाया है। और पढ़ें loader Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं

क्या है पूरा मामला?
मामले में ईडी ने 2019 के एक ट्रिब्यूनल आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने शापूरजी पल्लोनजी एंड कंपनी लिमिटेड (एसपीसीएल) की 141.50 करोड़ रुपये की संपत्ति की कुर्की को रद्द कर दिया था। जब ईडी ने 2019 में अपील की थी, तब हाई न्यायालय ने ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक लगा दी थी। साथ ही, केंद्रीय एजेंसी को 46.5 करोड़ रुपये न्यायालय में जमा करने का निर्देश दिया था। विज्ञापन विज्ञापन

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न्यायालय का अंतिम आदेश
23 दिसंबर, 2025 को न्यायालय ने अपना आखिरी आदेश दिया। इसकी कॉपी इस हफ्ते सामने आई है। हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही माना और जमा की गई रकम एसपीसीएल को वापस करने का आदेश दिया। बेंच ने निर्देश दिया कि 46.5 करोड़ रुपये पर जो ब्याज मिला है, उसका 50 प्रतिशत सेना के कल्याण कोष में दिया जाए। न्यायालय ने कहा कि सैनिकों के बलिदान और देश सेवा करते हुए उन्हें होने वाले नुकसान को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

हाई कोर्ट ने कहा, "सीमाओं की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले सैनिकों के परिवारों और विधवाओं की मदद करने की तत्काल और बहुत जरूरत है।" न्यायालय ने माना कि ब्याज का आधा हिस्सा कल्याण कोष में ट्रांसफर करना सही होगा ताकि सबके साथ न्याय हो सके।

जमीन सौदे से जुड़ा था विवाद
यह मामला एसपीसीएल द्वारा नीलेश ठाकुर और उनकी कंपनियों को दिए गए पैसों से जुड़ा था। कंपनी ने 2005 से अलीबाग और पेन में 900 एकड़ जमीन खरीदने के एग्रीमेंट के तहत पैसे दिए थे। यह सौदा 30 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से हुआ था। ईडी का दावा था कि यह पैसा एक सरकारी कर्मचारी ठाकुर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़ा था। एजेंसी ने इसे अपराध की कमाई बताया था।

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न्यायालय ने दी कंपनी को दी थी राहत
वहीं, एसपीसीएल ने संपत्ति जब्त करने को चुनौती दी थी। कंपनी ने कहा कि पैसा जमीन खरीदने के एग्रीमेंट के तहत दिया गया था और इसे इनकम टैक्स रिकॉर्ड में एडवांस पेमेंट के तौर पर दर्ज किया गया था। कंपनी ने यह भी दलील दी कि जब पैसे दिए गए, तब ठाकुर लगभग चार साल से बिना मंजूरी की छुट्टी पर थे और सरकारी ड्यूटी नहीं कर रहे थे। जनवरी 2019 में ट्रिब्यूनल ने एसपीसीएल की दलीलों को स्वीकार कर लिया था। ट्रिब्यूनल ने माना था कि इस पैसे को अपराध की कमाई नहीं कहा जा सकता और जब्त संपत्तियों को छोड़ने का आदेश दिया था।

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