Border 2: जला हुआ खामोश खड़ा है 59 लोगों की मौत का चश्मदीद, 'बॉर्डर-2' के शोर में परेशान कर रहीं उपहार अग्निकांड की चीखें - uphaar fire tragedy 29 year old screams in the noise of border 2 pain of families who lost 59 lives still fresh

Border 2: जला हुआ खामोश खड़ा है 59 लोगों की मौत का चश्मदीद, 'बॉर्डर-2' के शोर में परेशान कर रहीं उपहार अग्निकांड की चीखें - uphaar fire tragedy 29 year old screams in the noise of border 2 pain of families who lost 59 lives still fresh
नई दिल्ली:

आज से 29 साल पहले कुछ लोग 'बॉर्डर' फिल्म देखने घर से तो निकले थे लेकिन वापस नहीं लौट पाए। जला हुआ खामोश खड़ा उपहार सिनेमा आज भी चीख-चीखकर उन 59 लोगों की दर्दनाक मौत की गवाही दे रहा है, जो थियेटर मैनेजमेंट की लापहवाही की भेंट चढ़ गए।

'बॉर्डर-2' की चर्चा के साथ ही 13 जून 1997 के दर्दनाक उपहार सिनेमा अग्निकांड की यादें ताजा हो गई हैं, जिसमें 'बॉर्डर' फिल्म देखते हुए लोगों की जान चली गई थी। यह त्रासदी दिल्ली के ग्रीन पार्क में हुई, जहां सुरक्षा में लापरवाही के कारण लगी आग में 59 लोग स्वाहा हो गए और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर

बॉर्डर फिल्म की स्क्रीनिंग के करीब डेढ़ घंटे बाद उपहार सिनेमा हॉल के बेसेमेंट में रखे ट्रांसफॉर्मर में अचानक ब्लास्ट हो गया। इस ट्रांसफॉर्मर को सुबह ही ठीक कराया गया था। ट्रांसफॉर्मर से जलता तेल पार्किंग से होते हुए हॉल के अंदर पहुंच गया। पूरे सिनेमाघर घुएं से भर गया। लोगों को कुछ समझ नहीं आया, स्क्रीन चलती रही, लेकिन थियेटर की एग्जिट लाइट नहीं जली। फुट लाइट बंद थी, न कोई अनाउंसमेंट, न कोई वॉर्निंग। लोगों समझ नहीं पा रहे थे आखिर ये हुआ क्या है... जब समझ आया की थियेटर में आग लगी है, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बालकनी सीट पर बैठे दर्शकों के पास जान बचाने का कोई उपाय नहीं था। आग ने उन्हें आसानी से निगल लिया। वहीं नीचे के फ्लोर में बैठ दर्शक जान बचा पाए। लेकिन उनमें से भी कुछ लोग बुरी तरह घायल हो गए थे।

इस दर्दनाक हादसे को देश कभी नहीं भूल सकता

दिल्ली के उपहार सिनेमाघर में 13 जून 1997 को लगी आग एक ऐसी भयानक घटना थी जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। यह आग सिनेमाघर के बेसमेंट में लगे ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट से लगी थी। लेकिन, सिनेमाघर में सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी, बंद आपातकालीन एग्जिट गेट और फायर फाइटिंग के अधूरे इंतजामों के कारण यह हादसा और भी जानलेवा बन गया। 29 साल बाद भी पीड़ितों के परिवारों के लिए यह दर्द ताजा है। हादसे में शिकार हुए लोगों की याद में 'स्मृति उपवन' नामक एक स्मारक पार्क बनाया गया है। यह छोटा सा स्मारक दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में उपहार सिनेमाघर के ठीक सामने स्थित है।

धुएं में दम घुटने से मरे लोग

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग की शुरुआत सिनेमाघर के बेसमेंट में लगे ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट से हुई। आग की लपटें और धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गया। इससे सिनेमाघर के अंदर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। लेकिन, सिनेमाघर में आपातकालीन एग्जिट गेट ठीक से काम नहीं कर रहे थे और सुरक्षा के इंतजाम भी काफी कम थे। इस वजह से ज्यादातर लोग धुएं में दम घुटने से मर गए। यह साफ दिखाता है कि सिनेमाघर चलाने वालों ने सुरक्षा नियमों को बिल्कुल भी नहीं माना। अगर उन्होंने सुरक्षा का ध्यान रखा होता तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती।

बहुत बड़ा सबक है उपहार अग्निकांड

यह घटना हमें याद दिलाती है कि सुरक्षा नियमों का पालन करना कितना जरूरी है। खासकर उन जगहों पर जहां बहुत सारे लोग इकट्ठा होते हैं। सिनेमाघर, मॉल, रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए ताकि ऐसी भयानक घटनाएं दोबारा न हों। पीड़ित परिवारों की लड़ाई आज भी जारी है और वे चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी कोई घटना किसी और के साथ न हो।

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