Bsf:बीएसएफ इंस्पेक्टरों को 5400 'ग्रेड पे' का सपना टूटा, फोर्स हेडक्वार्टर के स्पीकिंग ऑर्डर में ये कैसा तर्क - Bsf Inspectors’ 5400 Grade Pay Hopes Dashed: Hq Speaking Order Rejects Claim Despite Judicial Favor
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' में जवान/अधिकारी, जब भी अपनी पदोन्नति, भत्ते एवं दूसरे आर्थिक फायदे, जिनमें गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (एनएफएफयू) भी शामिल है, को लेकर अदालत से लड़ाई जीतते हैं तो उस मामले में कोई न कोई बाधा खड़ी कर दी जाती है। कैडर अफसरों को संगठित सेवा का दर्जा देने का केस हो, एनएफएफयू/ओपीएस बहाली का मामला हो या 48 सौ के ग्रेड पे चार साल की सेवा पूरी करने वाले इंस्पेक्टरों को 54 सौ का ग्रेड पे देना, इन सभी में अदालती लड़ाई जीतने के बावजूद याचिकाकर्ताओं को फायदा नहीं मिल सका। अब बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों को 5400 का 'ग्रेड पे' मिलने का सपना भी टूट गया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद फोर्स हेडक्वार्टर ने अपने स्पीकिंग ऑर्डर में ऐसे तर्क दिए हैं, कि इंस्पेक्टर हैरान रह गए हैं। केंद्र सरकार के दूसरे विभागों में समान वेतनमान वाले कर्मियों को जो आर्थिक फायदे मिलते हैं, वे बीएसएफ में जीडी इंस्पेक्टरों के लिए नहीं हैं।
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बीएसएफ मुख्यालय में आईजी 'पर्स' की तरफ से इसी सप्ताह एक स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया गया है। यह ऑर्डर बीएसएफ के इंस्पेक्टर आनंद प्रताप सिंह व 128 अन्य की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद आया है। इंस्पेक्टर आनंद प्रताप सिंह व अन्य ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिका लगाई थी कि उन्हें 48 सौ रुपये के 'ग्रेड पे' में काम करते हुए चार साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन सरकार उन्हें 54 सौ रुपये का वेतनमान नहीं दे रही। यह वेतनमान सहायक कमांडेंट का होता है। इंस्पेक्टर के बाद अगली पदोन्नति बतौर 'सहायक कमांडेंट' होती है। पदोन्नति तो तभी मिलती है, जब पद खाली हों। इसमें तो लगभग पंद्रह साल तक लग जाते हैं। तब तक इंस्पेक्टरों को सहायक कमांडेंट का ग्रेड पे देने का प्रावधान है, ताकि इन्हें आर्थिक नुकसान न हो। ये डीओपीटी का नियम है। इसके चलते ये सभी कार्मिकों पर लागू होता है। इस मामले में विभाग ने कई तरह की बाधाएं खड़ी करने का प्रयास किया, मगर दिल्ली हाईकोर्ट ने कोई बात नहीं सुनी। यह तर्क दिया गया कि इंस्पेक्टरों को 'मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेसन' (एमएसीपी) में यह ग्रेड मिला है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने गत वर्ष 12 फरवरी को आनंद प्रताप सिंह व अन्य 128 अन्य की रिट पिटीशन संख्या 1743/2025 पर आदेश जारी किया था। हाई कोर्ट ने बीएसएफ को यह कहते हुए पिटीशन का निपटारा किया कि इस पिटीशन को ही प्रतिवेदन माना जाए। आठ सप्ताह के अंदर बीएसएफ निर्णय लेकर आदेश जारी करे। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस मामले में आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार के केस की तरह सभी मापदंड पूरे होते हैं तो इन इंस्पेक्टरों को भी उक्त फायदा दे दिया जाए। बीएसएफ ने इसके एवज में छह जनवरी को एक आदेश निकाला। अदालत ने दो माह का समय दिया था, लेकिन बीएसएफ ने आदेश निकालने में 11 महीने ले लिए। बल के आदेश में कहा गया है कि आनंद प्रताप सिंह, 2005 में बीएसएफ में एसआई भर्ती हुए थे। 2009 में इंस्पेक्टर बन गए। यानी वे 4800 ग्रेड में आ गए। साल 2019 में उनकी 10 साल की सेवा पूरी हो गई।
जब इस मामले में डीओपीटी के नियमानुसार कार्यवाही नहीं हुई तो उन्होंने डीजी बीएसएफ को 7 नवंबर 2024 और 9 दिसंबर 2024 को एक प्रतिवेदन दिया कि उन्हें एनएफएफयू का फायदा दिया जाए। इसमें उन्होंने 29 अगस्त 2008 को जारी वित्त मंत्रालय के ओएम का हवाला दिया। इसमें 54 सौ रुपये का ग्रे पे की बात कही गई है। बीएसएफ ने 22 नवंबर 2024 और 6 जनवरी 2025 को जवाब दिया कि आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार के केस में दिए गए फैसले के अनुसार, बीएसएफ इंस्पेक्टरों को फायदा नहीं मिल सकता। इसके बाद बीएसएफ इंस्पेक्टरों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगा दी। बीएसएफ ने तर्क दिया कि आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार के केस में एसएलपी लगी है। हालांकि वह डिसमिस भी हुई। आईटीबीपी ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन लगाई है और वह अभी तक पेंडिंग है।
बीएसएफ के स्पीकिंग ऑर्डर में कहा गया है कि हमने रिट पिटीशन पढ़ी है। वित्त मंत्रालय के 29 अगस्त 2008 का रेजोल्यूशन है, लेकिन वह कुछ ही सेवाओं पर लागू होता है। उसके दायरे में याचिकाकर्ता नहीं आते। ये ग्रुप बी का मामला है। जबकि एनएफएफयू ग्रुप 'ए' वालों को मिलता है। इंस्पेक्टर सुशील कुमार ग्रुप 'बी' में हैं तो उसे मिला है। जानकारों का कहना है कि ये तर्क बीएसएफ ने खुद से जोड़ दिया कि ये एनएफएफयू ग्रुप ए को मिलता है 'बी' को नहीं मिलता है। आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार फार्मासिस्ट हैं। बीएसएफ वाले जीडी कैडर के हैं। यहां पदोन्नति के अवसर ज्यादा हैं। ऐसे में एनएफएफयू की क्या जरुरत है। दूसरी तरफ सुशील कुमार का केस अभी रिव्यू में है, ऐसे में बीएसएफ इंस्पेक्टरों को मेरिट के आधार पर 54 सौ रुपये का ग्रेड पे देने का प्रतिवेदन रिजेक्ट किया जाता है।
वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी एक कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' में कहा गया था कि जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का 'ग्रेड पे' है और वे उसमें चार साल की सेवा कर चुके हैं तो उनका 'ग्रेड पे' 54 सौ रुपये हो जाएगा। यह बात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में स्वत: ही लागू नहीं होती। इसे लागू कराने के लिए अदालतों का सहारा लेना पड़ता है। गत वर्ष आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने दिल्ली कोर्ट से यह लड़ाई जीती थी, इसके बाद बीएसएफ के लगभग सवा सौ इंस्पेक्टरों ने अदालत से अपने हक में आदेश जारी कराया। दिल्ली हाईकोर्ट ने इन इंस्पेक्टरों को 54 सौ रुपये वाला 'ग्रेड पे' देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ, सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वहां पर एसएलपी खारिज हो गई। इसके बाद भी न्याय नहीं मिला। सबसे पहले इस मामले में आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गत वर्ष लंबे संघर्ष के बाद उनकी जीत हुई। अदालत ने उन्हें 54 सौ ग्रे पे देने का फैसला सुनाया। उसके बाद बीएसएफ के इंस्पेक्टर भी अदालत में पहुंच गए। इतना ही नहीं, सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर भी अदालत में पहुंच चुके हैं।
आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार को इस केस में यूं ही जीत नहीं मिली थी। सुशील कुमार के केस में सरकार, सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी में चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल 2025 को एसएलपी, खारिज कर दी। यानी सुशील कुमार का केस कन्फर्म हो गया। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस रेखा पल्ली और जस्टिस शैलेंद्र कौर ने आईटीबीपी निरीक्षक के मामले में सितंबर 2024 को फैसला सुनाया था। अदालत की सुनवाई में बताया गया कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 29 अगस्त 2008 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जिन कर्मियों का 48 सौ ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, तो उनका ग्रेड पे 54 सौ हो जाएगा। इस मामले में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स 'सीबीडीटी' में कार्यरत कर्मियों को यह फायदा नहीं मिला।
इस मामले में सीबीडीटी के इंस्पेक्टर एम सुब्रमणयम, '167/2009' कैट में चले गए। कैट ने भी इंस्पेक्टर के पक्ष में फैसला नहीं दिया। उसके बाद एम सुब्रमणयम, मद्रास हाईकोर्ट '13225/2010' में चले गए। सरकार ने अदालत में कहा, आपको ये लाभ नहीं मिलेगा। जो पदोन्नत होकर आए हैं, उन्हीं को ये लाभ मिलेगा। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, उक्त कर्मचारी को यह लाभ दिया जाए। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ, सरकार सुप्रीम कोर्ट 8883/2011 में चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद सरकार को लताड़ लगाई। मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। केंद्र सरकार, इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी को फायदा देने के लिए तैयार नहीं हुई। सरकारी अपील भी 10 अक्तूबर 2017 को डिसमिस हो गई। सरकार ने एक नहीं, बल्कि दो रिव्यू दो पेटिशन किए थे। ये भी 23 अगस्त 2018 को डिसमिस कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस मामले में जो एसएलपी रिजेक्ट की गई थी, केस का वही स्टे्टस रहेगा।
इसके बाद सीबीडीटी ने भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर कर लिया। सुप्रीम कोर्ट में पेटिशन रद्द होने के बाद केंद्र सरकार ने ग्रुप बी में यह आदेश लागू कर दिया। मतलब, वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, उनका ग्रेड पे 54 सौ रुपये हो जाएगा, ये फायदा दे दिया। सरकार ने कहा, यह आदेश केवल ग्रुप बी वालों के लिए ही लागू होगा। हालांकि यह पे ग्रेड तो ग्रुप ए में भी आता है, लेकिन ग्रुप बी में ही ये फायदा दिया गया। इसके पीछे वजह बताई गई कि ग्रुप बी में कमजोर वर्ग है, उन्हें आर्थिक तौर पर सफल बनाना है।
केंद्र सरकार ने उस वक्त एक नई शर्त लगा दी। सरकार ने कहा, सभी को ये फायदा नहीं मिलेगा, केवल पदोन्नति वालों को ही दिया जाएगा। खास बात है कि केंद्र सरकार ने सभी विभागों में यह फायदा दिया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को इससे बाहर रखा। ग्रुप बी 'सिविल' वालों को लाभ मिला, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को नहीं दिया। आईटीबीपी इंस्पेक्टर 'फार्मासिस्ट' सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उसमें कहा गया कि मद्रास हाईकोर्ट ने इस केस में फैसला दिया है।
हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट ने भी इस केस में फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित रखा है। सुशील कुमार ने उक्त फैसलों के आधार पर 21 जून 2020 को आईटीबीपी को लीगल नोटिस भेजा था। बल ने उसे 18 सितंबर 2020 को रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद 43321/2021 रिट पेटिशन किया। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहकर पेटिशन को डिस्पोज कर दिया कि विभाग इस रिट पेटिशन को ही प्रतिवेदन मानें। इसी पर एक विस्तारित आदेश जारी करें। इसके बावजूद विभाग ने प्रतिवेदन को 24 सितंबर 2021 को रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद रिट पेटिशन हाईकोर्ट में लगाई गई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीबीपी से कहा है, आठ सप्ताह में याचिकाकर्ता को वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, फायदा दिया जाए। ये फायदा, छह जुलाई 2019 से देना होगा।