Cafe Iii:छोटी कारों की परिभाषा बदलने पर बहस क्यों हो गई तेज? क्या यात्री कारों की सुरक्षा से हो रहा है समझौता - Tata Motors Flags Safety Risks In Weight-based Small Car Norms Amid Cafe Iii Debate
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भारत में छोटी कारों की परिभाषा को लेकर चल रही बहस के बीच Tata Motors (टाटा मोटर्स) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर छोटी कारों को वाहन के वजन के आधार पर परिभाषित किया गया, तो इससे सड़कों पर कमजोर और असुरक्षित कारों को बढ़ावा मिल सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) द्वारा प्रस्तावित CAFE III (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) के ड्राफ्ट नियमों पर ऑटो इंडस्ट्री के भीतर गहरे मतभेद सामने आ चुके हैं।
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टाटा मोटर्स का बयान उस दिन आया, जब कंपनी की कॉम्पैक्ट एसयूवी टाटा पंच ने Bharat NCAP (भारत एनसीएपी) के तहत सेगमेंट में पहली बार 5-स्टार क्रैश टेस्ट रेटिंग हासिल की।
टाटा पंच का अनलेडन वजन करीब 1,000 से 1,050 किलोग्राम है।
कंपनी का तर्क है कि बेहतर सेफ्टी स्ट्रक्चर आमतौर पर ज्यादा मजबूत बॉडी और वजन के साथ आता है।
इस उपलब्धि को टाटा मोटर्स अपने उस पक्ष के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है, जिसमें सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
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अप्रैल 2027 से लागू होने वाले CAFE III ड्राफ्ट के तहत:
पेट्रोल कारें जिनका वजन 909 किलोग्राम तक हो
इंजन क्षमता 1.2 लीटर से ज्यादा न हो
लंबाई 4 मीटर तक सीमित हो
ऐसी कारों को अतिरिक्त रेगुलेटरी छूट देने का प्रस्ताव है।
हालांकि, इंडस्ट्री का एक बड़ा वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि फिलहाल 909 किलोग्राम से कम वजन वाली कोई भी कार भारत एनसीएपी सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरती।
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इस मुद्दे पर इंडस्ट्री साफ तौर पर बंटी हुई है।
समर्थन करने वाली कंपनियां:
मारुति सुजुकी
होंडा
रेनो
विरोध करने वाली कंपनियां:
टाटा मोटर्स
महिंद्रा एंड महिंद्रा
ह्यूंदै
जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर
विरोध करने वाली कंपनियों का मानना है कि मौजूदा नियम लागू हुए तो निर्माता प्रीमियम छोटी कारों का वजन घटाने पर मजबूर हो सकते हैं। जिससे सेफ्टी फीचर्स और स्ट्रक्चरल मजबूती से समझौता हो सकता है।
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टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी शैलेश चंद्रा ने साफ शब्दों में कहा कि:
छोटी और कॉम्पैक्ट कारों में सुरक्षा और भी ज्यादा जरूरी है
क्योंकि इनमें पूरा परिवार सफर करता है
कंपनी बिक्री या मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी
उनके मुताबिक, हल्की कार बनाना अगर सुरक्षा और फीचर्स की कीमत पर किया जाए, तो यह सही दिशा नहीं है।
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मार्केट लीडर मारुति सुजुकी वजन-आधारित परिभाषा की सबसे बड़ी समर्थक मानी जा रही है।
कंपनी के कई मॉडल 909 किलोग्राम से कम वजन वाले हैं
इनमें WagonR, Celerio, Alto और Ignis शामिल हैं
इसके टॉप-सेलिंग मॉडल Baleno और Swift भी इस सीमा के बेहद करीब हैं
इसी वजह से यह प्रस्ताव मारुति के मौजूदा पोर्टफोलियो के अनुकूल माना जा रहा है।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की चार सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में से एक के वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दै हि कि CAFE III सिर्फ एक रेगुलेटरी नियम नहीं है। उन्होंने कहा- यह तय करेगा कि इंडस्ट्री सही दिशा में जाएगी या नहीं वाहन का वजन स्थिर नहीं रह सकता समय के साथ नए सेफ्टी फीचर्स और टेक्नोलॉजी जुड़ती रहती हैं इसलिए वजन को आधार बनाना भविष्य की जरूरतों के खिलाफ हो सकता है। यह भी पढ़ें - Electric Scooters: ज्यादा रेंज देने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर खोज रहे हैं? जानें टॉप-5 विकल्प, कीमत और फीचर्स
सरकार के सामने अब क्या चुनौती है?
इंडस्ट्री की शीर्ष संस्था सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चर्रस (SIAM) ने भी बीईई को सूचित किया है कि उसके सदस्यों के बीच वजन-आधारित CAFE III नियमों पर कोई सर्वसम्मति नहीं है।
अब सरकार के सामने यह फैसला लेने की चुनौती है कि:
वह फ्यूल एफिशिएंसी को प्राथमिकता दे
या फिर सुरक्षा मानकों को कमजोर किए बिना संतुलन बनाए
आने वाले हफ्तों में लिया जाने वाला यह फैसला भारत के यात्री कार बाजार की सुरक्षा स्टैंडर्ड्स और उत्पाद रणनीति दोनों की दिशा तय कर सकता है।
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