Cash Burnt Case:जस्टिस वर्मा ने संसदीय समिति के सामने दाखिल किया जवाब, कहा- अधजले नोट मामले में मेरी कोई भूमि - Justice Varma Files Response In Cash Burnt Case Before Parliamentary Panel, Denies Any Role
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने सरकारी आवास पर मिले अधजले नोट के मामले में जांच कर रही संसदीय समिति के सामने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया है। अपने जवाब में उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ तौर पर इनकार किया है। मामले की जांच कर रही संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुत अपने जवाब में उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि इस मामले को लेकर उन पर महाभियोग क्यों चलाया जाना चाहिए।
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उनके अनुसार इस मामले में तो उनके आवास पर मौजूद पुलिस, अग्निशमन और सुरक्षा बल के अधिकारियों और कर्मियों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, जिन्होंने मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।सूत्रों के अनुसार, जस्टिस वर्मा ने दावा किया है कि उनके आवासीय परिसर से कोई नकदी बरामद नहीं हुई। उन्होंने यह तर्क दिया कि अधिकारियों की ओर से घटनास्थल की सुरक्षा और जांच में हुई चूक का आरोप उन पर अनुचित तरीके से लगाया जा रहा है, जबकि संसदीय जांच और न्यायिक कार्यवाही जारी है।
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उन्होंने यह भी कहा कि आग लगने के समय वह आवास पर मौजूद नहीं थे। इस कथित घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है। वह घटनास्थल पर सबसे पहुंचने वाले व्यक्ति भी नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग घटना स्थल पर पहुंचे थे वे उसे ठीक से सुरक्षित करने में विफल रहे।
जस्टिस वर्मा की याचिका पर फैसला सुरक्षित
पिछले सप्ताह, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत गठित संसदीय समिति की वैधता को चुनौती देने वाली जस्टिस वर्मा की रिट याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिका में संसद के दोनों सदनों में समानांतर महाभियोग प्रस्तावों और राज्यसभा के उपसभापति की ओर से प्रयोग किए जाने वाले अधिकार से संबंधित संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं।
क्या है मामला?
पिछले साल मार्च में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर में आग लग गई थी। आग बुझाने के क्रम में स्टोर रूम से कथित तौर पर भारी मात्रा में बेहिसाब नकदी बरामद हुई थी। इसमें नोट के कई बंडल बुरी तरह जल गए थे। तब जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात थे। इस मामले ने व्यापक बहस छेड़ दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट की आंतरिक जांच में जस्टिस वर्मा की इस मामले में भूमिका पाई गई थी। उसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था।