उत्तर प्रदेश में CBG क्रांति: योगी सरकार की खास योजना के तहत गाय बन रही अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

उत्तर प्रदेश में CBG क्रांति: योगी सरकार की खास योजना के तहत गाय बन रही अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

उत्तर प्रदेश राज्य उत्तर प्रदेश में CBG क्रांति: योगी सरकार की खास योजना के तहत गाय बन रही अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

उत्तर प्रदेश अब ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. राज्य सरकार कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के बड़े पैमाने पर उत्पादन के जरिए क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता कम करने की ठोस रणनीति पर काम कर रही है.

Written byDheeraj Sharma

उत्तर प्रदेश अब ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. राज्य सरकार कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के बड़े पैमाने पर उत्पादन के जरिए क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता कम करने की ठोस रणनीति पर काम कर रही है.

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Dheeraj Sharma 13 Jan 2026 17:59 IST

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New Updateयोगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ Photograph: (Social Media)

उत्तर प्रदेश अब ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. राज्य सरकार कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के बड़े पैमाने पर उत्पादन के जरिए क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता कम करने की ठोस रणनीति पर काम कर रही है. इस पहल का केंद्र बिंदु है गाय के गोबर का वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपयोग, जिससे न सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा बनेगी, बल्कि गोपालकों की आय भी बढ़ेगी.

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गोबर बनेगा ऊर्जा का आधार

सीबीजी उत्पादन में गाय के गोबर से निकलने वाली मीथेन गैस का उपयोग किया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार एक देशी गाय से प्रतिदिन औसतन 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है, जिससे बायोगैस तैयार की जा सकती है. शुद्धिकरण के बाद यही गैस कंप्रेस्ड बायोगैस के रूप में रसोई गैस और वाहनों के ईंधन में इस्तेमाल की जाती है.

वैज्ञानिक आकलन बताते हैं कि एक लाख गायों के गोबर से मीथेन निकालकर करीब 500 करोड़ रुपये तक के पेट्रोलियम उत्पादों की बचत संभव है.

तेजी से बढ़ता सीबीजी इंफ्रास्ट्रक्चर

2022 से अब तक यूपी नेडा के अंतर्गत प्रदेश में 26 से अधिक सीबीजी प्लांट लगाए जा चुके हैं. लखनऊ, गोरखपुर, मथुरा, मेरठ, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, बाराबंकी, बदायूं, बरेली और मिर्जापुर जैसे जिलों में इन प्लांट्स से उत्पादन भी शुरू हो चुका है.

इसके अलावा राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 21 से अधिक नए सीबीजी प्लांट निर्माणाधीन हैं, जो आने वाले समय में उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाएंगे.

वैकल्पिक ईंधन के रूप में सीबीजी

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, सीबीजी को वैकल्पिक और स्थायी ईंधन के रूप में स्थापित करने के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना लागू की जा रही है. आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि गोबर से तैयार सीबीजी न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का सस्ता विकल्प भी बन सकता है.

गांवों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

सीबीजी मॉडल से गांवों में रोजगार, आय और ऊर्जा-तीनों का सृजन हो रहा है। गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैव-उर्वरक और जैव-उर्वरक से कृषि उत्पादन बढ़ाने का यह चक्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बना सकता है.

बाराबंकी का निजी भागीदारी वाला सीबीजी प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला इस मॉडल की व्यावहारिक सफलता के उदाहरण हैं.

ऊर्जा सुरक्षा की ओर उत्तर प्रदेश

इस पहल से न केवल किसानों और गोपालकों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल और एलपीजी पर निर्भरता भी घटेगी. स्वदेशी ऊर्जा उत्पादन की दिशा में यह कदम उत्तर प्रदेश को ऊर्जा सुरक्षा और हरित भविष्य की ओर मजबूती से आगे ले जा रहा है.

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