Cervical Cancer:हर 8 मिनट में एक महिला की हो रही है मौत, एम्स में करा सकती हैं फ्री में जांच - Aiims Launches Free Cervical Cancer Screening Who Should Get Tested And Why It Is Important
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सर्वाइकल कैंसर की जांच जरूरी है क्योंकि यह कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है और शुरुआती बदलावों को जांच के जरिए आसानी से पकड़ा जा सकता है। पैप स्मीयर टेस्ट और एचपीवी टेस्ट कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलावों को समय रहते पहचान लेती हैं।
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महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का बढ़ता खतरा
- फोटो : Freepik.com
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कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक अजीब सा डर बन जाता है, हालांकि समय के साथ ये बीमारी काफी आम होती जा रही है। वैश्विक स्तर पर कैंसर के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है, स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता जा रहा है। कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या समझने की गलती न करें, ये बीमारी युवाओं के साथ-साथ अब बच्चों में भी तेज गति पकड़ती दिख रही है।
जब बात महिलाओं में कैंसर के बढ़ते मामलों की होती है तो सबसे पहले दिमाग में ब्रेस्ट कैंसर का ख्याल आता है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि स्तन कैंसर के साथ-साथ महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होता है, इसके लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वायरस के संक्रमण को प्रमुख कारण माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारतीय महिलाओं में जागरूकता और इस कैंसर के बारे में जानकारी कम होने के कारण समय पर रोग का पता नहीं चल पाता है, जिसके कारण ये कैंसर और इससे होने वाले मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) दिल्ली ने फ्री सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग शुरू की है। जनवरी को सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है, इसके तहत 31 जनवरी तक महिलाएं फ्री में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग यहां करा सकती हैं।
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सर्वाइकल कैंसर और इसका खतरा
- फोटो : Freepik.com
भारत में बढ़ रहा है सर्वाइकल कैंसर
आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर 8 मिनट में 1 महिला की मौत सर्वाइकल कैंसर के कारण हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर बचाव के उपाय, स्क्रीनिंग और इलाज हो जाए तो न सिर्फ इसे काफी हद तक रोका जा सकता है, बल्कि सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
जनवरी के पूरे महीने एम्स में 30-65 साल की महिलाएं सोमवार से शुक्रवार (सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक) सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग करवा सकती हैं। इसके साथ ही 9-14 साल की लड़कियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीनेशन शनिवार को (सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक) न्यू बिल्डिंग में उपलब्ध है।
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भारतीय महिलाओं में कैंसर के बढ़ते मामले
- फोटो : Adobe stock photos
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
एम्स दिल्ली में प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पल्लवी शुक्ला कहती हैं, यह एक ऐसा कैंसर है जिसे पूरी तरह से रोका जा सकता है। महिलाओं को किसी भी उम्र में अपनी सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हमें भारत से सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के लिए पूरी कोशिश करनी चाहिए। समय पर जांच इसके लिए सबसे जरूरी कदम है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है इसलिए समय रहते इसकी जांच जरूरी है। टेस्ट के माध्यम से शुरुआती बदलावों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। पैप स्मीयर टेस्ट और एचपीवी टेस्ट जैसी जांचें कोशिकाओं में होने वाले असामान्य बदलावों का आसानी से पता लगाने वाली हो सकती हैं।

4 of 5 सर्वाइकल कैंसर और इसके खतरे - फोटो : Amar Ujala
सर्वाइकल कैंसर और इसके जोखिम
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से (गर्भाशय ग्रीवा) में होता है। भारत में यह महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है।
भारत में हर साल 1.23 लाख से ज्यादा महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित होती हैं।
एचपीवी का संक्रमण आमतौर पर यौन संपर्क से फैलता है। अगर समय पर इसका इलाज न हो तो यह गर्भाशय की कोशिकाओं को कैंसर में बदल देता है।
बहुत कम उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा ज्यादा होता है।
जिन महिलाओं की इम्युनिटी कमजोर होती है, उनमें भी एचपीवी संक्रमण होने का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
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कैंसर का खतरा और बचाव
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समय पर जांच जरूरी
महिलाओं को चाहिए कि वे 21 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से सर्वाइकल कैंसर की जांच कराएं, भले ही कोई लक्षण न हों। एचपीवी वैक्सीन भी इस कैंसर से बचाव में अहम भूमिका निभाती है। इसके लिए अपने डॉक्टर की सलाह लें। सही जानकारी, समय पर जांच और सतर्कता से सर्वाइकल कैंसर को बढ़ने से रोका जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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