Chhindwara News: A Worker Died After Getting Caught In The Belt Of A Company's Machine. - Madhya Pradesh News
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औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी होती नजर आ रही है। केजीवी कंपनी में हुई गंभीर दुर्घटना को 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि शनिवार को एक और फैक्टरी में श्रमिक की दर्दनाक मौत हो गई। कंपनी में बॉयलर के पास कार्यरत कबर पिपला निवासी 52 वर्षीय श्रमिक धनराज गुजवार की मशीन की बेल्ट में फंसने से मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बिना सुरक्षा उपकरण कराया जा रहा था काम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धनराज गुजवार बॉयलर सेक्शन में नियमित कार्य कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसकी बेल्ट मशीन में फंस गई और वह मशीन की चपेट में आ गया। आरोप है कि मृतक को न तो सेफ्टी गार्ड न हेलमेट और न ही अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो यह हादसा टल सकता था।
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पहले भी हो चुकी है मौत, फिर भी नहीं जागा प्रबंधन
कंपनी में यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी कंपनी प्रबंधन की कथित लापरवाही के चलते कबर पिपला निवासी लोकेश काटोले की जान जा चुकी है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद न तो कंपनी प्रबंधन ने सबक लिया और न ही संबंधित विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई की, जिससे श्रमिकों में भारी असंतोष व्याप्त है।
श्रमिकों का उबाल, कंपनी परिसर में उग्र प्रदर्शन
घटना के बाद फैक्ट्री में काम कर रहे श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में श्रमिकों ने काम बंद कर कंपनी परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। श्रमिकों का कहना था कि फैक्ट्रियों में मजदूरों को मशीनों के सामने बिना सुरक्षा के झोंक दिया जाता है और दुर्घटना होने पर प्रबंधन अपने दायित्व से पल्ला झाड़ लेता है। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
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कंपनी मालिक पर मामला दर्ज करने की मांग
आक्रोशित श्रमिकों और मृतक के परिजनों ने मांग की है कि कंपनी के मालिक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। साथ ही मृतक के परिवार को उचित मुआवजा, एक सदस्य को रोजगार तथा भविष्य में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
प्रशासन और श्रम विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में
औद्योगिक क्षेत्र में लगातार हो रही मौतों के बावजूद श्रम विभाग की निरीक्षण व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। यदि समय-समय पर फैक्ट्रियों का निरीक्षण कर सुरक्षा नियमों का पालन कराया जाता तो 48 घंटे में दूसरी मौत शायद न होती। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। वहीं श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र में यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रबंधन की लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।